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क्या चुनाव आयोग ने टीएमसी नेता के परिवार के सदस्यों को जानबूझकर तलब किया?

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क्या चुनाव आयोग ने टीएमसी नेता के परिवार के सदस्यों को जानबूझकर तलब किया?

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके परिवार के सदस्यों को जानबूझकर तलब नहीं किया गया। यह मामला पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है। जानिए इस मामले में क्या कहा गया है।

मुख्य बातें

चुनाव आयोग ने टीएमसी नेता के आरोपों को खारिज किया।
परिवार के सदस्यों को जानबूझकर नहीं तलब किया गया था।
आयोग का कहना है कि यह सिर्फ भ्रामक आरोप हैं।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर विवाद उठ रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इन व्यक्तियों का कोई संबंध नहीं है।

कोलकाता, 27 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की चार बार की लोकसभा सदस्य और पार्टी की वर्तमान मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया। दस्तीदार का आरोप है कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के मसौदे पर आपत्ति और दावों को लेकर आयोग ने उनके परिजनों को केवल परेशान करने के लिए तलब किया है।

शनिवार सुबह घोष दस्तीदार ने मीडियाकर्मियों से कहा कि उनके दो बेटों, उनकी बुजुर्ग मां और छोटी बहन को ईसीआई ने सुनवाई के लिए तलब किया है, और आरोप लगाया कि उनके पारिवारिक संबंधों के कारण उन्हें जानबूझकर परेशान किया गया है।

हालांकि, शनिवार दोपहर को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने एक बयान जारी कर इन आरोपों को निराधार बताया।

सीईओ के कार्यालय द्वारा अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा किए गए बयान में दावा किया गया है कि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से भ्रामक थे।

सीईओ कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इन व्यक्तियों को 'अज्ञात' मतदाताओं के रूप में सुनवाई के लिए बुलाया गया था, क्योंकि इनमें से किसी का भी पश्चिम बंगाल की 2002 की मतदाता सूची से कोई संबंध नहीं था, न तो 'स्वयं-पहचान' के माध्यम से और न ही 'वंशानुगत-पहचान' के माध्यम से।

पश्चिम बंगाल में अंतिम बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2002 में किया गया था।

घोष दस्तीदार ने दावा किया कि उनके दोनों बेटों, उनकी मां और उनकी बहन को सुनवाई के लिए नोटिस मिले हैं क्योंकि उनके नाम 16 दिसंबर को प्रकाशित मतदाता सूची के मसौदे में शामिल नहीं थे।

तृणमूल कांग्रेस सांसद ने यह भी दावा किया कि उनके दो बेटों के अलावा, उनकी मां और छोटी बहन को भी मतदाता सूची के मसौदे से संबंधित दावों और आपत्तियों पर सुनवाई में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। उनके नाम भी मतदाता सूची के मसौदे में शामिल नहीं थे।

उन्होंने कहा कि मेरे दोनों बेटे सरकारी कर्मचारी हैं। उनके दिवंगत पिता, सुदर्शन घोष दस्तीदार, पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल के सदस्य थे। मैं 2009 से चार बार लोकसभा सदस्य रह चुकी हूं। फिर भी, उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया है। इसलिए एसआईआर के नाम पर जो कुछ हो रहा है, उसकी आसानी से कल्पना की जा सकती है। यह लोगों को परेशान करने की एक चाल के अलावा और कुछ नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें एक प्रमुख पार्टी की सांसद द्वारा उठाए गए आरोपों की गंभीरता को समझना आवश्यक है। निर्वाचन आयोग की स्पष्टता इस बात की पुष्टि करती है कि राजनीतिक विवादों में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या काकोली घोष दस्तीदार के आरोप सही हैं?
भारत निर्वाचन आयोग ने उनके आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि यह पूरी तरह से भ्रामक है।
क्यों तलब किए गए थे उनके परिवार के सदस्य?
उन्हें अज्ञात मतदाताओं के रूप में बुलाया गया था, जिनका मतदाता सूची से कोई संबंध नहीं था।
राष्ट्र प्रेस
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