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अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर 20 बागी TMC सांसदों की अयोग्यता की माँग की

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अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर 20 बागी TMC सांसदों की अयोग्यता की माँग की

सारांश

TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को 20 याचिकाएँ सौंपकर NCPI में गए बागी सांसदों की अयोग्यता की माँग की। उनका तर्क है कि दसवीं अनुसूची के तहत तृणमूल टिकट पर जीते और फिर दल बदलने वाले ये सांसद स्वतः अयोग्य हो जाते हैं।

मुख्य बातें

अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में TMC प्रतिनिधिमंडल ने 19 जून 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने NCPI में शामिल 20 बागी TMC सांसदों के विरुद्ध 20 अलग-अलग याचिकाएँ सौंपीं।
TMC ने संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) का हवाला देते हुए अयोग्यता की माँग की।
बागियों में काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय प्रमुख हैं, जिन्होंने इस महीने NCPI में शामिल होने की घोषणा की।
लोकसभा में TMC के वर्तमान में 27 सदस्य हैं; बसीरहाट सीट सितंबर 2024 से रिक्त है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार, 19 जून 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर त्रिपुरा स्थित राष्ट्रवादी नागरिक दल (NCPI) में शामिल हुए 20 बागी TMC सांसदों की अयोग्यता की औपचारिक माँग रखी। उनके साथ तीन लोकसभा और एक राज्यसभा सांसद का चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी उपस्थित था।

मुलाकात में क्या हुआ

बैठक के दौरान TMC प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष को 20 अलग-अलग याचिकाएँ सौंपीं — प्रत्येक बागी सांसद के विरुद्ध एक। बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इन सांसदों का कृत्य असंवैधानिक है और इस पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी सांसद को तृणमूल से आपत्ति है, तो वह पार्टी छोड़ सकता है — लेकिन ऐसी स्थिति में उसे लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा देकर नए सिरे से जनादेश माँगना चाहिए।

संवैधानिक आधार

TMC ने तर्क दिया कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के अंतर्गत कोई भी निर्वाचित प्रतिनिधि जो स्वेच्छा से उस दल की सदस्यता छोड़ता है जिसके टिकट पर वह चुना गया था, वह स्वतः अयोग्य हो जाता है। बनर्जी ने यह भी बताया कि संविधान में दो-तिहाई सदस्यों द्वारा विलय से जुड़े प्रावधान किसी राजनीतिक दल पर समग्र रूप से लागू होते हैं — केवल उसके विधायी या संसदीय विंग पर नहीं।

बागियों की पृष्ठभूमि

चार बार की विधायक काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में TMC के 20 बागी लोकसभा सदस्यों ने पहले दल के भीतर रहते हुए विद्रोह किया था, किंतु इस महीने की शुरुआत में उन्होंने NCPI में शामिल होने की घोषणा कर दी। यह ऐसे समय में आया जब तृणमूल पहले से ही आंतरिक असंतोष से जूझ रही थी।

TMC की वर्तमान स्थिति

वर्तमान में लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 27 सदस्य हैं। उत्तरी 24 परगना जिले की बसीरहाट सीट सितंबर 2024 से रिक्त है, जब TMC सांसद हाजी शेख नूरुल इस्लाम का चुनाव के कुछ महीनों बाद निधन हो गया था।

आगे क्या होगा

अब निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर है। दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की कार्यवाही में अध्यक्ष की भूमिका निर्णायक होती है, और ऐसे मामले अक्सर न्यायिक समीक्षा तक भी पहुँचते हैं। गौरतलब है कि यह मामला भारतीय संसदीय लोकतंत्र में दल-बदल कानून की व्याख्या और सीमाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो इससे उपचुनावों की एक लहर आएगी जो पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा दोनों की राजनीति को प्रभावित करेगी। मुख्य सवाल यह है कि क्या दसवीं अनुसूची की 'दो-तिहाई विलय' छूट इस मामले में लागू होती है — और इसका जवाब अंततः अदालत ही देगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात क्यों की?
TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने 19 जून 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर NCPI में शामिल हुए 20 बागी TMC सांसदों की अयोग्यता की माँग की। प्रतिनिधिमंडल ने प्रत्येक बागी सांसद के विरुद्ध अलग-अलग 20 याचिकाएँ सौंपीं।
दसवीं अनुसूची क्या है और यह इस मामले में कैसे लागू होती है?
संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे दल-बदल विरोधी कानून भी कहते हैं, के तहत कोई भी निर्वाचित प्रतिनिधि जो स्वेच्छा से उस दल की सदस्यता छोड़ता है जिसके टिकट पर वह चुना गया था, वह अयोग्य हो जाता है। TMC का तर्क है कि NCPI में शामिल होना इसी श्रेणी में आता है।
कौन से बागी सांसद NCPI में शामिल हुए हैं?
चार बार की विधायक काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में TMC के 20 लोकसभा सदस्यों ने इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रवादी नागरिक दल (NCPI) में शामिल होने की घोषणा की। इससे पहले ये सांसद दल के भीतर रहते हुए बागी बने हुए थे।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
अयोग्यता की याचिकाएँ अब लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष हैं, जिनका निर्णय दसवीं अनुसूची के तहत बाध्यकारी होता है। ऐसे मामले सामान्यतः न्यायिक समीक्षा तक भी पहुँचते हैं, इसलिए अंतिम फैसला अदालत में भी जा सकता है।
अभी लोकसभा में TMC की स्थिति क्या है?
वर्तमान में लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 27 सदस्य हैं। उत्तरी 24 परगना की बसीरहाट सीट सितंबर 2024 से रिक्त है, जब TMC सांसद हाजी शेख नूरुल इस्लाम का निधन हो गया था।
राष्ट्र प्रेस
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