टीएमसी सांसद जगदीश बर्मा बसुनिया ने अभिषेक बनर्जी को ठहराया पार्टी हार का जिम्मेदार, लोकसभा स्पीकर से माँगी मान्यता
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद जगदीश बर्मा बसुनिया ने 12 जून 2026 को स्पष्ट किया कि बागी सांसदों के समूह ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर खुद को 'असली टीएमसी' के रूप में मान्यता देने की माँग की है। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है — पहले विधायकों ने राज्यपाल को पत्र लिखा, अब सांसदों ने लोकसभा स्पीकर का दरवाज़ा खटखटाया है।
मुख्य घटनाक्रम
बसुनिया ने बताया कि सभी बागी सांसदों ने हस्ताक्षर कर यह पत्र भेजा है और सोमवार को वे स्पीकर से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा, 'जितने सांसदों ने साथ देने की बात कही है और हस्ताक्षर किए हैं, वे सभी हमारा साथ देंगे।' सदन में नेतृत्व की औपचारिक मान्यता उनकी प्रमुख माँग है।
बगावत की जड़ें: टिकट वितरण पर गहरा असंतोष
बसुनिया के अनुसार असंतोष की शुरुआत विधानसभा चुनाव के उम्मीदवार चयन से हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी सांसद को उनके संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सात विधायक सीटों पर प्रत्याशियों की जानकारी नहीं दी गई। 'घोषणा के बाद हमें पता चला — यह अपमानजनक था,' उन्होंने कहा। उनके अनुसार यही नाराज़गी सामूहिक विद्रोह में बदली।
अभिषेक बनर्जी पर सीधा आरोप
बसुनिया ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी की चुनावी हार के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, 'अगर उन्होंने ठीक से चुनाव लड़ा होता तो इतनी बड़ी हार नहीं होती।' उनका यह भी कहना था कि 2022 के बाद से पार्टी का वास्तविक नेतृत्व ममता बनर्जी के हाथ से निकलकर अभिषेक बनर्जी के पास चला गया और दोनों मिलकर पार्टी चला रहे थे, जिसमें आम सांसदों की कोई भागीदारी नहीं थी।
भाजपा की 'बी' टीम के आरोप का खंडन
विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर कि बागी सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'बी' टीम के रूप में काम कर रहे हैं, बसुनिया ने कहा कि यह फैसला सभी सांसदों ने मिलकर लिया है और इसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि बंगाल में अब भाजपा की सरकार है और काम के लिए मुख्यमंत्री से मिलना पड़ सकता है, लेकिन इसे पार्टी-निष्ठा से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब TMC में आंतरिक विद्रोह की आवाज़ें उठी हों, लेकिन इस बार सांसद स्तर पर संगठित रूप से लोकसभा स्पीकर तक पहुँचना इसे अधिक गंभीर बनाता है। स्पीकर से मुलाकात के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी — क्या यह समूह औपचारिक विभाजन की ओर बढ़ेगा या पार्टी नेतृत्व के साथ कोई समझौता होगा, यह आने वाले दिनों में तय होगा।