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अभिषेक बनर्जी का लोकसभा में केंद्र पर प्रहार: पेपर लीक बिल समर्थन जवाबदेही का विकल्प नहीं

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अभिषेक बनर्जी का लोकसभा में केंद्र पर प्रहार: पेपर लीक बिल समर्थन जवाबदेही का विकल्प नहीं

सारांश

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में पेपर लीक विधेयक का समर्थन करते हुए भी केंद्र को घेरा — 12 साल की व्यवस्थागत विफलता, नीट आंदोलन पर बल प्रयोग और 'सजा बढ़ाओ, जवाबदेही भूलो' की नीति पर सीधा प्रहार किया।

मुख्य बातें

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर बहस में केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की।
TMC ने विधेयक का समर्थन किया, लेकिन बनर्जी ने कहा कि यह समर्थन सरकार की 12 साल की जवाबदेही का विकल्प नहीं बन सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा सुरक्षा, मेरिट और छात्रों के विश्वास — तीनों की रक्षा में विफल रही।
नीट-यूजी पेपर लीक आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज, पैलेट गन और आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
बनर्जी ने कहा कि आज की पीढ़ी सरकार का रिपोर्ट कार्ड केवल एक शब्द में लिखेगी — 'फेल' ।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर बहस के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट किया कि TMC इस विधेयक का समर्थन करती है, परंतु किसी कानून को समर्थन देना सरकार की जवाबदेही की जगह नहीं ले सकता।

छात्रों और अभिभावकों के भरोसे का सवाल

बनर्जी ने कहा कि देश के हर छात्र को यह आश्वासन मिलना चाहिए कि परीक्षाएँ निष्पक्ष होंगी और हर अभिभावक को यह विश्वास होना चाहिए कि उनके बच्चे की सफलता मेहनत, प्रतिभा और ईमानदारी से तय होगी — न कि पैसे, प्रभाव या संगठित आपराधिक गिरोहों के बल पर। उन्होंने कहा, "इस विधेयक का समर्थन जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता। सख्त कानून जरूरी है, लेकिन केवल कानून बना देने से काम नहीं चलेगा।"

उन्होंने आगे जोड़ा, "अगर परीक्षा प्रणाली लगातार व्यवस्थागत विफलताओं की शिकार होती रही, तो कितना भी कड़ा कानून बना लें, करोड़ों छात्रों का टूटा विश्वास वापस नहीं आएगा।"

सरकार की विफलता का स्वीकार

TMC सांसद ने आरोप लगाया कि यह विधेयक किसी समाधान का प्रतीक नहीं, बल्कि NDA और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की विफलता की स्वीकृति है। उन्होंने कहा, "सरकार परीक्षाओं की सुरक्षा करने में विफल रही, छात्रों की रक्षा करने में विफल रही और मेरिट की रक्षा करने में भी विफल रही। अब जब यह विफलता पूरे देश के सामने उजागर हो गई है, तो सरकार यह विश्वास दिलाना चाहती है कि सिर्फ सजा बढ़ाने से 12 साल की नाकामी मिट जाएगी — लेकिन ऐसा नहीं होगा।"

शासन की कार्यशैली पर निशाना

बनर्जी ने केंद्र की कार्यशैली पर तंज कसते हुए कहा कि जब भी शासन विफल होता है तो कानून बदल दिया जाता है, जब प्रशासनिक व्यवस्था नाकाम होती है तो सजा बढ़ा दी जाती है और जब संस्थाएँ कमजोर पड़ती हैं तो नई समिति बना दी जाती है। उन्होंने कहा, "शासन सुर्खियों से नहीं, बल्कि परिणामों से मापा जाता है। हर साल सरकार नई व्यवस्था का वादा करती है, लेकिन छात्रों को वही घोटाले देखने पड़ते हैं। परीक्षाओं के नाम बदल जाते हैं, पीड़ित बदल जाते हैं, आरोपी बदल जाते हैं, लेकिन अपराध और सरकार नहीं बदलते।"

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी पेपर लीक विवाद से लेकर अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों ने देशभर में छात्रों को सड़कों पर उतरने पर मजबूर किया है।

नीट-यूजी आंदोलन और बल प्रयोग के आरोप

बनर्जी ने नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन का विशेष उल्लेख किया। उनके अनुसार, लाखों मेडिकल और इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों का एकमात्र कसूर यह था कि उन्होंने सरकार से सवाल पूछे और मेरिट आधारित व्यवस्था की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन छात्रों की बात सुनने के बजाय सरकार ने बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज, पैलेट गन, आँसू गैस और बल प्रयोग का सहारा लिया।

उन्होंने सवाल उठाया, "सरकार को लगता है कि हर विरोध एक साजिश है, हर छात्र उसका दुश्मन है और हर सवाल देशविरोधी है। जब छात्र न्याय माँगते हैं तो सरकार संवाद के बजाय बल प्रयोग क्यों करती है?"

सरकार को 'फेल' का दर्जा

अपने संबोधन के अंत में बनर्जी ने कहा कि आज की पीढ़ी मौजूदा सरकार का जो रिपोर्ट कार्ड तैयार करेगी, उसमें सबसे ऊपर केवल एक शब्द लिखा होगा — 'फेल'। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली, मेरिट, छात्रों के विश्वास और उनकी गरिमा — सभी की रक्षा करने में असफल रही। यह बहस संसद में परीक्षा सुधार को लेकर आगे के विधायी कदमों की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसे केवल केंद्र की विफलता बताना उतना ही अधूरा सच है जितना उसे केवल राज्यों की लापरवाही कहना। जब तक परीक्षा सुधार को दलगत राजनीति से अलग कर स्वतंत्र जवाबदेही ढाँचे में नहीं रखा जाता, तब तक ऐसे भाषण सुर्खियाँ तो बनाएँगे, परिवर्तन नहीं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में पेपर लीक विधेयक पर क्या कहा?
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 का समर्थन करते हुए कहा कि इस समर्थन का अर्थ सरकार को जवाबदेही से मुक्त करना नहीं है। उन्होंने केंद्र पर 12 साल की परीक्षा प्रणाली विफलता का आरोप लगाया।
पब्लिक एग्जामिनेशंस संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए मौजूदा कानून में संशोधन करता है और पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए सख्त दंड का प्रावधान करता है। इसे लोकसभा में 28 जुलाई 2026 को बहस के लिए रखा गया।
नीट-यूजी पेपर लीक का इस बहस से क्या संबंध है?
बनर्जी ने नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों मेडिकल और इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों पर बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। यह विधेयक उसी विवाद की पृष्ठभूमि में लाया गया है।
TMC ने इस विधेयक पर क्या रुख अपनाया?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने विधेयक का समर्थन किया, लेकिन साथ ही सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। बनर्जी ने स्पष्ट किया कि सजा बढ़ाने से व्यवस्थागत विफलता नहीं छुपती और करोड़ों छात्रों का टूटा भरोसा केवल कानून से नहीं लौटेगा।
इस विधेयक से आगे क्या होने की उम्मीद है?
लोकसभा में बहस के बाद विधेयक को पारित होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विपक्षी दलों ने स्वतंत्र जवाबदेही तंत्र और परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार की माँग की है, जिस पर सरकार का आधिकारिक जवाब अभी सामने आना बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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