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टीएमसी के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 25 अगस्त को, CJI सूर्यकांत की पीठ करेगी विचार

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टीएमसी के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 25 अगस्त को, CJI सूर्यकांत की पीठ करेगी विचार

सारांश

टीएमसी के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता पर लोकसभा अध्यक्ष की चुप्पी अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गई है। 25 अगस्त की सुनवाई तय करेगी कि क्या स्पीकर को समयबद्ध फैसले का निर्देश मिलेगा — और इसका असर दल-बदल कानून की भावी व्याख्या पर भी पड़ेगा।

मुख्य बातें

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 20 बागी लोकसभा सांसदों की अयोग्यता पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की देरी को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।
25 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी।
याचिका अभिषेक बनर्जी के माध्यम से दायर; पार्टी ने समयबद्ध निर्णय के लिए अदालत से निर्देश माँगा।
बागी सांसद दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता के दायरे में हैं — वे नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी की इन सांसदों से मुलाकात ने मामले को राजनीतिक आयाम दिया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने 20 बागी लोकसभा सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा निर्णय लेने में हो रही देरी को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। 25 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी। यह याचिका टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी के माध्यम से दायर की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद पार्टी छोड़कर नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए थे। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने इन सांसदों के विरुद्ध दल-बदल विरोधी कानून के तहत लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिकाएँ दायर की थीं। पार्टी का तर्क है कि जिस दल के टिकट पर ये सांसद निर्वाचित हुए, उसे छोड़ने के बाद संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त होनी चाहिए।

स्पीकर कार्यालय की चुप्पी और टीएमसी का दबाव

सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से पहले अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर याचिकाओं के शीघ्र निपटारे की माँग की थी। इसके अतिरिक्त, महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी सहित टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने स्पीकर से व्यक्तिगत रूप से मिलकर इन सांसदों को तत्काल अयोग्य घोषित करने का आग्रह किया था। हालाँकि, स्पीकर कार्यालय की ओर से अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है।

बागी सांसदों की स्थिति और राजनीतिक समीकरण

गौरतलब है कि इन 20 बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था पहले ही दी जा चुकी है, जबकि उनके नए दल को औपचारिक मान्यता का प्रश्न अभी भी अनिर्णीत है। यह ऐसे समय में आया है जब हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल के एक वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने दिल्ली में इन सांसदों के साथ बैठक की थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन सांसदों से मुलाकात की थी — जिससे यह मामला महज संसदीय प्रक्रिया से आगे बढ़कर राजनीतिक महत्व का बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट से क्या माँगा गया है

टीएमसी ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह लोकसभा अध्यक्ष को अयोग्यता याचिकाओं पर समयबद्ध ढंग से फैसला लेने के निर्देश जारी करे। न्यायिक हस्तक्षेप की यह माँग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दल-बदल के मामलों में स्पीकर के निर्णय में अनावश्यक विलंब को पहले भी अदालतों ने गंभीरता से लिया है।

आगे क्या होगा

25 अगस्त को होने वाली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय यह तय कर सकता है कि क्या लोकसभा अध्यक्ष को इस मामले में निर्धारित समय-सीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए। इस फैसले का असर न केवल इन 20 सांसदों की संसदीय स्थिति पर, बल्कि भविष्य में दल-बदल के मामलों में स्पीकर की भूमिका और जवाबदेही पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी स्पीकर के विवेकाधिकार की आड़ में अयोग्यता याचिकाएँ वर्षों तक लंबित रहती हैं — यह कोई नई बात नहीं। असली सवाल यह है कि जब बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था मिल चुकी हो और वे प्रधानमंत्री से मिल चुके हों, तो स्पीकर कार्यालय की 'प्रक्रियागत देरी' वास्तव में प्रक्रियागत है या राजनीतिक? सर्वोच्च न्यायालय यदि समयबद्ध निर्देश जारी करता है, तो यह भविष्य के दल-बदल मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर बनेगा — लेकिन अदालत स्पीकर के विशेषाधिकार और न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा के बीच की बारीक रेखा पर भी ध्यान देगी।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट में किस बात को चुनौती दी है?
तृणमूल कांग्रेस ने अपने 20 बागी सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा निर्णय न लेने की देरी को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। पार्टी ने अदालत से माँग की है कि स्पीकर को समयबद्ध फैसला लेने का निर्देश दिया जाए।
ये 20 बागी सांसद कौन हैं और उन्होंने क्या किया?
ये वे 20 लोकसभा सांसद हैं जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए। दल-बदल विरोधी कानून के तहत टीएमसी ने इनकी संसद सदस्यता समाप्त करने की माँग की है।
25 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट क्या कर सकता है?
सर्वोच्च न्यायालय यह तय कर सकता है कि लोकसभा अध्यक्ष को अयोग्यता याचिकाओं पर एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए या नहीं। पीठ न्यायिक हस्तक्षेप और स्पीकर के संवैधानिक विशेषाधिकार के बीच संतुलन पर भी विचार करेगी।
दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का फैसला कौन करता है?
संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार लोकसभा में दल-बदल के मामलों में अयोग्यता का फैसला लोकसभा अध्यक्ष करते हैं। हालाँकि, स्पीकर के इस निर्णय में होने वाली देरी को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, जैसा कि टीएमसी ने किया है।
इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन 20 बागी सांसदों से मुलाकात की थी। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी दिल्ली में इन सांसदों के साथ बैठक की थी, जिससे यह मामला संसदीय प्रक्रिया से परे राजनीतिक महत्व का बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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