24 अगस्त 2026
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कश्मीरी पंडितों को हथियार दें, गद्दारों को लाल चौक पर लटकाओ: पूर्व डीजीपी एसपी वैद का तीखा बयान

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कश्मीरी पंडितों को हथियार दें, गद्दारों को लाल चौक पर लटकाओ: पूर्व डीजीपी एसपी वैद का तीखा बयान

सारांश

पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को 'सॉफ्ट टारगेट' बताते हुए उन्हें हथियार और आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने की माँग की। साथ ही धमकियों के पीछे अंदरूनी नेटवर्क को बेनकाब कर कड़ी सजा देने की बात कही — यह बयान राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में हलचल मचा रहा है।

मुख्य बातें

पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने 24 अगस्त को कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को हथियार और सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग देने की माँग की।
वैद ने कहा कि पंडित कर्मचारी आतंकवादियों के लिए 'सॉफ्ट टारगेट' हैं और उन्हें सुरक्षित सरकारी दफ्तरों में तैनात किया जाए।
धमकियों के पीछे अंदरूनी व्यक्ति की संलिप्तता का संदेह जताते हुए उसे लाल चौक पर लटकाने की बात कही।
एसआईए द्वारा वंधामा नरसंहार केस फिर से खोले जाने का स्वागत किया; जीवित चश्मदीदों के बयान दर्ज करने की अपील।
एनएसए अजीत डोभाल के चीन दौरे को ब्रिक्स समिट से पहले सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश बताया।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसपी वैद ने 24 अगस्त को घाटी में केंद्र सरकार के पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही कथित आतंकी धमकियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से तत्काल एक ठोस सुरक्षा योजना बनाने की माँग की और कहा कि इन कर्मचारियों को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग के साथ-साथ हथियार भी मुहैया कराए जाने चाहिए।

मुख्य बयान: 'सॉफ्ट टारगेट' हैं कश्मीरी पंडित

पूर्व डीजीपी वैद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि घाटी में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारी आतंकवादियों के लिए 'सॉफ्ट टारगेट' बन चुके हैं। उनके अनुसार, 'ये सुरक्षा बलों का सामना नहीं कर सकते और इनकी संख्या लगातार घट रही है — इसीलिए आतंकवादी ऐसे आसान निशानों की तलाश में हैं।'

उन्होंने माँग की कि सरकार चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, इंटेलिजेंस चीफ और सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारियों को शामिल कर एक समन्वित सुरक्षा ढाँचा तैयार करे।

सुरक्षित दफ्तरों में तैनाती और हथियार देने की सिफारिश

वैद ने सुझाव दिया कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को डिप्टी कमिश्नर कार्यालय, निदेशालय और सचिवालय जैसी उन इमारतों में तैनात किया जाए जहाँ हथियार लेकर प्रवेश संभव नहीं है। उन्होंने कहा, 'इन्हें सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए और हथियार भी, ताकि हमले की स्थिति में ये अपनी रक्षा कर सकें।'

अंदरूनी नेटवर्क पर संदेह, 'लाल चौक पर लटकाने' की माँग

धमकियों के स्रोत पर वैद ने कहा कि जिस तरह से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के फोन नंबर और वाहनों की जानकारी आतंकवादियों तक पहुँच रही है, उससे किसी 'अंदरूनी व्यक्ति' की संलिप्तता का संदेह होता है। उन्होंने कहा, 'उस व्यक्ति की पहचान कर उसे सीधा लाल चौक पर उल्टा टाँगना चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि ऐसा व्यक्ति देश से बाहर है, तो भारत को इज़रायल की तर्ज पर उसे 'डेड मैन वॉकिंग' घोषित कर उसका सफाया करना चाहिए — जैसा इज़रायल ने 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद किया।

वंधामा नरसंहार केस: एसआईए की कार्रवाई का समर्थन

जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष जाँच एजेंसी एसआईए (SIA) द्वारा वंधामा नरसंहार केस को फिर से खोले जाने पर वैद ने इसे सराहनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एसआईटी गठन से इनकार के बावजूद एसआईए ने पहले सरला भट्ट का मामला उठाया, फिर एक अन्य हत्या का मामला और अब वंधामा — यह तीसरा मामला है। उन्होंने कहा, '25 साल बीत जाने के बावजूद जो भी सबूत मिल सकते हैं, उनके आधार पर काम होना चाहिए और जीवित चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए।'

डोभाल के चीन दौरे पर टिप्पणी

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के चीन दौरे पर वैद ने कहा कि आगामी ब्रिक्स समिट से पहले भारत-चीन सीमा विवाद पर किसी समझौते की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के समिट में शामिल होने की उम्मीद है, इसलिए सीमा मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश हो रही है।'

वैद की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब घाटी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा रही है और राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और सुरक्षा नीति में बदलाव पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक वास्तविक और दीर्घकालिक नीतिगत विफलता छिपी है — घाटी में पैकेज कर्मचारियों की सुरक्षा का सवाल वर्षों से अनुत्तरित है। 'लाल चौक पर लटकाने' जैसी भाषा सुर्खियाँ बटोरती है, लेकिन असली सवाल यह है कि खुफिया तंत्र में सेंध क्यों नहीं रोकी जा सकी। वंधामा जैसे पुराने मामलों को फिर से खोलना न्याय की दिशा में सकारात्मक कदम है, पर बिना साक्ष्य-आधारित अभियोजन के ये प्रयास भी अधूरे रह सकते हैं। डोभाल के चीन दौरे पर वैद की टिप्पणी यह भी दर्शाती है कि सुरक्षा विशेषज्ञ कश्मीर और सीमा — दोनों मोर्चों को एक ही रणनीतिक संदर्भ में देख रहे हैं।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कश्मीरी पंडितों के लिए क्या माँग की है?
वैद ने माँग की है कि घाटी में केंद्र सरकार के पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग और हथियार दिए जाएँ। साथ ही उन्हें डिप्टी कमिश्नर कार्यालय, सचिवालय जैसे सुरक्षित दफ्तरों में तैनात किया जाए।
वैद ने 'गद्दार को लाल चौक पर लटकाने' की बात क्यों कही?
वैद का मानना है कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के फोन नंबर और वाहनों की जानकारी आतंकवादियों तक पहुँचना किसी अंदरूनी व्यक्ति की संलिप्तता दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को बेनकाब कर कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
वंधामा नरसंहार केस क्या है और एसआईए ने इसे क्यों फिर खोला?
वंधामा नरसंहार जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुई एक पुरानी हिंसक घटना है। एसआईए ने इसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एसआईटी गठन से इनकार के बावजूद दोबारा खोला है — यह इस एजेंसी का तीसरा ऐसा मामला है, इससे पहले सरला भट्ट केस और एक अन्य हत्या का मामला उठाया गया था।
एनएसए डोभाल के चीन दौरे पर वैद ने क्या कहा?
वैद ने कहा कि डोभाल का चीन दौरा आगामी ब्रिक्स समिट से पहले भारत-चीन सीमा विवाद पर समझौते की कोशिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पुतिन और शी जिनपिंग के समिट में शामिल होने की उम्मीद है, इसलिए सीमा मुद्दे पर सहमति बनाने का प्रयास हो रहा है।
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को किस तरह की धमकियाँ मिल रही हैं?
कथित तौर पर घाटी में केंद्र सरकार के पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को आतंकी धमकियाँ मिल रही हैं। वैद के अनुसार, उनके फोन नंबर और वाहनों की जानकारी तक आतंकवादियों की पहुँच यह संकेत देती है कि यह एक संगठित नेटवर्क है।
राष्ट्र प्रेस
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