1 अगस्त 2026
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कुलगाम आतंकी हमला: दो प्रवासी मजदूरों की हत्या, धर्म पूछकर बनाया निशाना — पूर्व डीजीपी एसपी वैद

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कुलगाम आतंकी हमला: दो प्रवासी मजदूरों की हत्या, धर्म पूछकर बनाया निशाना — पूर्व डीजीपी एसपी वैद

सारांश

कुलगाम में आतंकियों ने धर्म पूछकर दो प्रवासी मजदूरों की हत्या की — यह पहलगाम जैसी कार्यशैली है। पूर्व डीजीपी एसपी वैद और रिटायर्ड ब्रिगेडियर धीमान का कहना है कि 90% सफलता दर के बाद आतंकी अब बड़े हमले नहीं कर सकते, इसलिए निहत्थे नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।

मुख्य बातें

कुलगाम जिले में 1 अगस्त 2026 को शुक्रवार शाम आतंकी हमले में दो प्रवासी मजदूरों की हत्या हुई।
दोनों पीड़ित छत्तीसगढ़ के निवासी थे, उम्र लगभग 25-26 वर्ष ; हमले से पहले नाम और धर्म पूछा गया।
पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने इसे पहलगाम बैसरन घाटी हमले जैसी कार्यशैली बताया।
रिटायर्ड ब्रिगेडियर विजय सागर धीमान के अनुसार सुरक्षा बलों की सफलता दर 90% होने से आतंकी अब आसान लक्ष्यों को निशाना बना रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र कुमार चौधरी ने दुख जताया; अनंतनाग में कुछ दिन पहले एक सैनिक भी शहीद हुआ था।
सुरक्षा एजेंसियाँ जाँच में जुटी हैं; अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर सतर्कता बढ़ाई गई है।

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में 1 अगस्त 2026 को शुक्रवार शाम हुए एक आतंकवादी हमले में दो प्रवासी मजदूरों की निर्मम हत्या कर दी गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने दोनों मजदूरों से उनका नाम और धर्म पूछने के बाद उन्हें निशाना बनाया। दोनों पीड़ित छत्तीसगढ़ के निवासी थे और उनकी उम्र लगभग 25 से 26 वर्ष के बीच बताई जा रही है।

हमले का तरीका और पहलगाम से समानता

जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने इस हमले को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हत्या से पहले पीड़ितों से उनकी पहचान और धर्म के बारे में पूछा गया, जो पिछले वर्ष पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के तौर-तरीकों से मेल खाता है। उनके अनुसार, घटना का पैमाना भले छोटा हो, लेकिन आतंकियों की कार्यशैली वही है — पहचान के आधार पर निर्दोष लोगों को निशाना बनाना।

अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा की समीक्षा

एसपी वैद ने यह भी कहा कि यह हमला ऐसे समय हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा जारी है। उन्होंने बताया कि पुलिस, सेना, केंद्रीय अर्धसैनिक बल, खुफिया एजेंसियाँ, सीआईडी और आईबी के वरिष्ठ अधिकारी संयुक्त रूप से पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि हमले में शामिल आतंकियों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

रिटायर्ड ब्रिगेडियर विजय सागर धीमान ने कहा कि वर्ष 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा अभियानों की प्रभावशीलता काफी बढ़ी है। उनके अनुसार, सुरक्षा बलों की सफलता दर लगभग 90 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जिसके कारण आतंकवादी पहले की तरह बड़े हमले करने में सक्षम नहीं रहे। इसी वजह से वे अब निहत्थे नागरिकों और प्रवासी मजदूरों जैसे अपेक्षाकृत आसान लक्ष्यों को निशाना बना रहे हैं, ताकि भय का माहौल बनाया जा सके।

पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार वहाँ पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स द्वारा बड़ी संख्या में लोगों की हत्या किए जाने की खबरें सामने आई हैं, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

सरकार की प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र कुमार चौधरी ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने याद दिलाया कि कुलगाम में दो मजदूरों की हत्या से कुछ दिन पहले अनंतनाग में एक सैनिक भी शहीद हुआ था। चौधरी ने कहा कि ये घटनाएँ लगातार यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किन अतिरिक्त कदमों की आवश्यकता है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियाँ पूरे मामले की जाँच में जुटी हैं और दोषियों की तलाश जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो निहत्थे प्रवासी मजदूर 'सॉफ्ट टारगेट' बन जाते हैं, और यह पैटर्न पहलगाम के बाद दूसरी बार दोहराया गया है। सवाल यह है कि 90% सफलता दर का दावा करने वाली सुरक्षा व्यवस्था उन्हीं मजदूरों को सुरक्षित क्यों नहीं रख पा रही जो कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। अमरनाथ यात्रा के दौरान इस हमले का समय भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है — और यह सुरक्षा तंत्र की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार की माँग करता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुलगाम आतंकी हमले में क्या हुआ?
1 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार शाम आतंकवादियों ने दो प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी। हमलावरों ने पहले दोनों से उनका नाम और धर्म पूछा, फिर उन्हें निशाना बनाया।
पीड़ित मजदूर कहाँ के रहने वाले थे?
दोनों पीड़ित छत्तीसगढ़ के निवासी थे और उनकी उम्र लगभग 25 से 26 वर्ष के बीच बताई जा रही है। वे आजीविका के लिए कश्मीर आए हुए थे।
पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने इस हमले पर क्या कहा?
पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने इस हमले को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि हमले से पहले पहचान व धर्म पूछना पहलगाम की बैसरन घाटी हमले की कार्यशैली से मेल खाता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियाँ संयुक्त समीक्षा कर दोषियों को पकड़ेंगी।
आतंकी अब प्रवासी मजदूरों को क्यों निशाना बना रहे हैं?
रिटायर्ड ब्रिगेडियर विजय सागर धीमान के अनुसार, 2019 के बाद सुरक्षा बलों की सफलता दर लगभग 90% तक पहुँच गई है, जिससे आतंकी बड़े हमले नहीं कर पा रहे। इसलिए वे अब निहत्थे नागरिकों और प्रवासी मजदूरों जैसे आसान लक्ष्यों को निशाना बनाकर भय का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र कुमार चौधरी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि ये घटनाएँ सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कुलगाम हमले से कुछ दिन पहले अनंतनाग में एक सैनिक भी शहीद हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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