कुलगाम मजदूर हत्याकांड: विपक्ष नेता सुनील शर्मा बोले — 'सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों को फिर सक्रिय होना होगा'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने 1 अगस्त 2026 को कुलगाम के किल्लम में हुई दो प्रवासी मजदूरों की हत्या को 'इंसानियत पर हमला' करार दिया और सुरक्षा बलों तथा जांच एजेंसियों से आतंकी नेटवर्क के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की। 31 जुलाई को आतंकवादियों ने एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों को उनके परिवार के सामने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
घटनास्थल पर पहुँचे सुनील शर्मा
शर्मा ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने कहा, 'कुलगाम के किल्लम में दो मजदूरों की उनके परिवार के सामने निर्मम हत्या की गई — यह दुखद है, यह इंसानियत की हत्या है, मानवता को तार-तार किया गया है।' उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से भी बातचीत करवाई, जिन्होंने पीड़ित परिवारों को सहायता का आश्वासन दिया।
सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों पर जोर
शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह घटना अचानक अंजाम दी गई, इसलिए इसे सुरक्षा बलों की लापरवाही नहीं कहा जा सकता। हालाँकि उन्होंने जोड़ा कि 'सुरक्षा बलों को एक बार फिर सक्रिय होने की आवश्यकता है, जांच एजेंसियों को फिर से जागना होगा और इस आतंकी इकोसिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त करना होगा।' उन्होंने इस हमले को पाकिस्तान-प्रायोजित प्रॉक्सी वॉर का हिस्सा बताया।
फारूक अब्दुल्ला के बयान पर पलटवार
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने इस हत्याकांड को पूर्ण राज्य के दर्जे की माँग से जोड़ा था। शर्मा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'राज्य का दर्जा संसद देने वाली है और आतंकवाद पाकिस्तान से प्रायोजित है — दोनों का आपस में क्या संबंध है?' उन्होंने अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि वे ऐसे बयानों से आतंकी घटनाओं का परोक्ष बचाव करते हैं।
महबूबा मुफ्ती की आलोचना पर प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने पर शर्मा ने कहा कि ऐसे बयान 'सुरक्षा बलों का मनोबल गिराते हैं और घटना को अंजाम देने वालों को बढ़ावा देते हैं।' उन्होंने दोनों नेताओं से अपील की कि वे इस प्रकार के बयानों से बाज आएँ और पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हों।
आगे की राह
शर्मा ने कहा कि इस समय की सबसे बड़ी जरूरत पीड़ित परिवारों को दोबारा खड़ा करना है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी सहायता का आश्वासन दिया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब घाटी में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई है।