1 अगस्त 2026
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कुलगाम आतंकी हमले में दूसरे मजदूर बोपिंदर की भी मौत, छत्तीसगढ़ के दोनों मृतक ईंट भट्ठे पर करते थे काम

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कुलगाम आतंकी हमले में दूसरे मजदूर बोपिंदर की भी मौत, छत्तीसगढ़ के दोनों मृतक ईंट भट्ठे पर करते थे काम

सारांश

कुलगाम के केलम गांव में आतंकियों ने ईंट भट्ठे पर काम करने वाले दो छत्तीसगढ़ी मजदूरों को गोली मारी — दीपक रैट्रे की शुक्रवार रात मौत हुई, बोपिंदर ने शनिवार सुबह SKIMS में दम तोड़ा। प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाने की यह घटना घाटी में बढ़ती आतंकी हिंसा की एक और कड़ी है।

मुख्य बातें

कुलगाम के केलम गांव में 1 अगस्त 2026 को आतंकवादियों ने ईंट भट्ठे पर दो प्रवासी मजदूरों को गोली मारी।
मृतकों की पहचान दीपक रैट्रे (24) और बोपिंदर (28) के रूप में हुई — दोनों छत्तीसगढ़ के निवासी थे।
बोपिंदर ने शनिवार सुबह श्रीनगर के SKIMS में अंतिम सांस ली; दीपक की मौत शुक्रवार रात अनंतनाग के सरकारी अस्पताल में हुई।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने हमले की कड़ी निंदा की।
सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया; हमलावर अभी फरार हैं।
इससे पहले 22 जुलाई 2026 को अनंतनाग में हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या हुई थी।

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम गांव में शुक्रवार, 1 अगस्त 2026 को हुए आतंकवादी हमले में मरने वालों की संख्या शनिवार को बढ़कर दो हो गई। अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के घायल मजदूर बोपिंदर (28) ने सुबह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में अंतिम सांस ली। इससे पहले शुक्रवार की रात उनके साथी मजदूर दीपक रैट्रे (24) की अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो चुकी थी।

हमले का घटनाक्रम

शुक्रवार शाम आतंकवादियों ने केलम गांव में एक ईंट भट्ठे पर काम करने वाले दो बाहरी मजदूरों पर बेहद करीब से गोलियाँ चलाईं, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों घायलों को तत्काल अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ दीपक रैट्रे ने उसी रात दम तोड़ दिया।

बोपिंदर की हालत अत्यंत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें श्रीनगर के सौरा स्थित SKIMS में स्थानांतरित किया, जहाँ शनिवार सुबह उनकी भी मृत्यु हो गई। दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के निवासी थे और कुलगाम में रोज़ी-रोटी की तलाश में प्रवासी मजदूर के रूप में कार्यरत थे।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित स्थानीय राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने इस कायराना हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने केलम और आसपास के इलाकों की व्यापक घेराबंदी कर दी है और हमलावरों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान जारी है।

बढ़ती आतंकी हिंसा का संदर्भ

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद-रोधी अभियान पहले से तेज़ हैं। गौरतलब है कि 22 जुलाई 2026 को आतंकवादियों ने अनंतनाग में यात्रा ड्यूटी पर तैनात जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या कर दी थी। प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाना आतंकवादियों की एक पुरानी रणनीति रही है, जिसका उद्देश्य घाटी में बाहरी कामगारों में भय फैलाना और आर्थिक गतिविधियों को बाधित करना है।

आम जनता और प्रवासी मजदूरों पर असर

कुलगाम जिले में बड़ी संख्या में बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूर ईंट भट्ठों और निर्माण कार्यों में लगे हुए हैं। इस तरह के हमले उनकी आजीविका और सुरक्षा पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। सुरक्षा एजेंसियाँ अब प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपायों पर विचार कर रही हैं।

आगे की स्थिति

तलाशी अभियान जारी है और सुरक्षा बल हमलावरों की पहचान करने में जुटे हैं। दोनों मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है। यह मामला एक बार फिर घाटी में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी तंत्र की प्रभावशीलता पर बहस को केंद्र में ला देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि घाटी की अर्थव्यवस्था को थामने वाले उन हाथों को डराती है जिनका किसी विवाद से कोई लेना-देना नहीं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे हमलों का पैटर्न बताता है कि आतंकी समूह जानबूझकर 'बाहरी' पहचान को निशाना बनाते हैं। सवाल यह है कि बढ़ते आतंकवाद-रोधी अभियानों के बावजूद प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए ठोस प्रोटोकॉल क्यों नहीं बने। केवल निंदा और तलाशी अभियान पर्याप्त नहीं — जब तक प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को नीतिगत प्राथमिकता नहीं मिलती, ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुलगाम आतंकी हमले में कौन मारे गए?
इस हमले में दीपक रैट्रे (24) और बोपिंदर (28) की मौत हुई — दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और कुलगाम के केलम गांव में एक ईंट भट्ठे पर काम करते थे। दीपक की मौत शुक्रवार रात अनंतनाग अस्पताल में और बोपिंदर की मौत शनिवार सुबह श्रीनगर के SKIMS में हुई।
कुलगाम के केलम गांव में हमला कब और कैसे हुआ?
शुक्रवार, 1 अगस्त 2026 की शाम आतंकवादियों ने केलम गांव में ईंट भट्ठे पर काम करने वाले दो प्रवासी मजदूरों को बेहद करीब से गोली मारी, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में दोनों ने अलग-अलग अस्पतालों में दम तोड़ दिया।
हमले के बाद सुरक्षा बलों ने क्या कार्रवाई की?
सुरक्षा बलों ने केलम गांव और आसपास के इलाकों की तत्काल घेराबंदी कर दी और हमलावरों की तलाश में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, हमलावर अभी तक फरार हैं।
कश्मीर में प्रवासी मजदूरों पर हमले क्यों हो रहे हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, आतंकी समूह जानबूझकर बाहरी राज्यों से आए मजदूरों को निशाना बनाते हैं ताकि घाटी में भय का माहौल बने और आर्थिक गतिविधियाँ बाधित हों। यह रणनीति कश्मीर की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले प्रवासी कामगारों को पलायन के लिए मजबूर करने के इरादे से अपनाई जाती है।
इससे पहले कुलगाम क्षेत्र में कौन-सी बड़ी आतंकी घटना हुई थी?
22 जुलाई 2026 को अनंतनाग में यात्रा ड्यूटी पर तैनात जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। यह हमला भी उसी क्षेत्र में बढ़ती आतंकी गतिविधियों की एक कड़ी था।
राष्ट्र प्रेस
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