कुलगाम आतंकी हमले में दूसरे मजदूर बोपिंदर की भी मौत, छत्तीसगढ़ के दोनों मृतक ईंट भट्ठे पर करते थे काम
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम गांव में शुक्रवार, 1 अगस्त 2026 को हुए आतंकवादी हमले में मरने वालों की संख्या शनिवार को बढ़कर दो हो गई। अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के घायल मजदूर बोपिंदर (28) ने सुबह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में अंतिम सांस ली। इससे पहले शुक्रवार की रात उनके साथी मजदूर दीपक रैट्रे (24) की अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो चुकी थी।
हमले का घटनाक्रम
शुक्रवार शाम आतंकवादियों ने केलम गांव में एक ईंट भट्ठे पर काम करने वाले दो बाहरी मजदूरों पर बेहद करीब से गोलियाँ चलाईं, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों घायलों को तत्काल अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ दीपक रैट्रे ने उसी रात दम तोड़ दिया।
बोपिंदर की हालत अत्यंत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें श्रीनगर के सौरा स्थित SKIMS में स्थानांतरित किया, जहाँ शनिवार सुबह उनकी भी मृत्यु हो गई। दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के निवासी थे और कुलगाम में रोज़ी-रोटी की तलाश में प्रवासी मजदूर के रूप में कार्यरत थे।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित स्थानीय राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने इस कायराना हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने केलम और आसपास के इलाकों की व्यापक घेराबंदी कर दी है और हमलावरों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान जारी है।
बढ़ती आतंकी हिंसा का संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद-रोधी अभियान पहले से तेज़ हैं। गौरतलब है कि 22 जुलाई 2026 को आतंकवादियों ने अनंतनाग में यात्रा ड्यूटी पर तैनात जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या कर दी थी। प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाना आतंकवादियों की एक पुरानी रणनीति रही है, जिसका उद्देश्य घाटी में बाहरी कामगारों में भय फैलाना और आर्थिक गतिविधियों को बाधित करना है।
आम जनता और प्रवासी मजदूरों पर असर
कुलगाम जिले में बड़ी संख्या में बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूर ईंट भट्ठों और निर्माण कार्यों में लगे हुए हैं। इस तरह के हमले उनकी आजीविका और सुरक्षा पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। सुरक्षा एजेंसियाँ अब प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपायों पर विचार कर रही हैं।
आगे की स्थिति
तलाशी अभियान जारी है और सुरक्षा बल हमलावरों की पहचान करने में जुटे हैं। दोनों मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है। यह मामला एक बार फिर घाटी में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी तंत्र की प्रभावशीलता पर बहस को केंद्र में ला देता है।