कुलगाम आतंकी हमला: UP और छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की गोली मारकर हत्या, LG सिन्हा और महबूबा मुफ्ती ने की निंदा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में 31 जुलाई 2026 को शाम के वक्त आतंकवादियों ने केलम गांव स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे प्रवासी मजदूरों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें उत्तर प्रदेश के भूपिंदर और छत्तीसगढ़ के दीपक की मौत हो गई। छत्तीसगढ़ का एक तीसरा मजदूर भी इस हमले में घायल हुआ है। इस कायरतापूर्ण हमले की उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कड़ी निंदा की है।
हमले का घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, शाम के समय आतंकवादियों ने कुलगाम के केलम गांव में ईंट भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों को निशाना बनाया। घायल मजदूरों को तत्काल अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद दीपक और भूपिंदर दोनों ने गंभीर चोटों के कारण दम तोड़ दिया। छत्तीसगढ़ के एक अन्य घायल मजदूर को भी तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
उपराज्यपाल सिन्हा की प्रतिक्रिया
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'कुलगाम में हुए बर्बर आतंकवादी हमले के बाद मैंने डीजीपी नलिन प्रभात और सुरक्षा के शीर्ष अधिकारियों से बात की। मैं इस कायरतापूर्ण हरकत की कड़ी निंदा करता हूं। मैंने सुरक्षा बलों को अपने ऑपरेशन तेज करने और आतंकवादियों को खत्म करने का निर्देश दिया है।' उन्होंने यह भी बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दोषियों को पकड़ने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
महबूबा मुफ्ती की निंदा
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस हमले को 'अकल्पनीय रूप से क्रूर' बताया। उन्होंने कहा, 'आज कुलगाम में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की हत्या की मैं कड़ी निंदा करती हूं। वे अपने परिवार का पेट पालने के लिए घर से दूर जाकर कड़ी मेहनत करते हैं। हिंसा की ऐसी बेमतलब की घटनाओं में उन्हें निशाना बनाना अकल्पनीय रूप से क्रूर है।'
व्यापक सुरक्षा संदर्भ
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद-रोधी अभियान पहले से तेज किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या कर दी थी। यह घटना उस बढ़ते पैटर्न की ओर इशारा करती है जिसमें आतंकवादी सुरक्षाबलों के बजाय निहत्थे प्रवासी मजदूरों को निशाना बना रहे हैं — जो घाटी की आर्थिक स्थिरता को कमजोर करने की सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।
सुरक्षा बलों का अभियान
अधिकारियों ने बताया कि हमले के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने केलम गांव और आसपास के इलाकों की घेराबंदी कर दी है। हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए व्यापक तलाशी अभियान जारी है। उपराज्यपाल सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।