कुलगाम आतंकी हमला: ईंट भट्ठे पर गोलीबारी में UP और छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूर शहीद
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में 31 जुलाई 2026 की शाम आतंकवादियों ने केलम गांव स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे दो प्रवासी मजदूरों पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं, जिसमें उत्तर प्रदेश के भूपिंदर और छत्तीसगढ़ के दीपक की मौत हो गई। दोनों को गंभीर हालत में अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्होंने दम तोड़ दिया।
हमले का घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, शाम के वक्त आतंकवादियों ने कुलगाम के केलम गांव में ईंट भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों को निशाना बनाया। हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर ली और हमलावरों की तलाश में व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँच गए और अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
ताज़ा हिंसा का संदर्भ
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद-रोधी अभियान पहले से तेज़ किए जा चुके हैं। गौरतलब है कि पिछले ही हफ्ते आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या की थी। अक्टूबर 2024 में गांदरबल के गगनगीर में एक निर्माण शिविर पर हुए हमले में भी कई बाहरी इंजीनियर और मजदूर मारे गए थे।
बदलती आतंकी रणनीति
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 2019 के बाद से आतंकवादी समूहों ने अपनी कार्यशैली में बड़ा बदलाव किया है। 1990 के दशक में जहाँ प्रमुख हस्तियों, न्यायाधीशों और सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता था, वहीं अब 'हाइब्रिड' तरीकों और कम दिखाई देने वाले हमलों पर ज़ोर दिया जा रहा है। प्रवासी मजदूरों, सड़क किनारे व्यापारियों और ट्रक चालकों को सार्वजनिक स्थानों पर निशाना बनाकर आर्थिक एकीकरण को बाधित करने की कोशिश की जा रही है।
आम जनता और प्रवासी मजदूरों पर असर
जम्मू-कश्मीर में हज़ारों की संख्या में बाहरी राज्यों के प्रवासी मजदूर निर्माण, ईंट भट्ठा और कृषि क्षेत्र में काम करते हैं। इस तरह के लक्षित हमले न केवल उनकी जान के लिए खतरा हैं, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और विकास परियोजनाओं को भी प्रभावित करते हैं। सुरक्षा बल अब ट्रांजिट कॉरिडोर और बाहरी मजदूरों के कार्यस्थलों की निगरानी बढ़ा रहे हैं।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल हमलावरों की पहचान नहीं हो पाई है और तलाशी अभियान जारी है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस हमले की जिम्मेदारी और आतंकवादियों के नेटवर्क की जाँच कर रही हैं। यह घटना घाटी में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।