एसपी वैद का सीजेपी को करारा जवाब: 'देश कानून से चलेगा, अराजकता से नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसपी वैद ने 29 जुलाई को जम्मू में कड़े शब्दों में कहा कि यह देश कानून से चलेगा, अराजकता से नहीं — यह बयान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके की उस चेतावनी के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने एक बड़े विरोध-प्रदर्शन की बात कही थी। वैद ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान सभी पक्षों के लिए अनिवार्य है।
सीजेपी की चेतावनी क्या थी
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया कि 'अगर पुलिस की तरफ से छात्रों को परेशान करने का सिलसिला जारी रहा, तो कॉकरोच जनता पार्टी जल्द ही एक बड़े और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के जरिए इसका जवाब देगी।' उन्होंने सरकार से माँग की कि छात्रों को निशाना बनाना और उन्हें परेशान करना तत्काल बंद किया जाए।
एसपी वैद का स्पष्ट रुख
पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा, 'एक नागरिक और पूर्व पुलिस अधिकारी के नाते मेरा यही मत है कि देश कानून से चलता है। सुप्रीम कोर्ट, जो देश का सर्वोच्च न्यायालय है, उसका आदेश सभी पर मान्य होना चाहिए और सबके सिर माथे पर होना चाहिए। किसी को भी इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए।'
वैद ने प्रदर्शनकारियों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि 16 वर्ष से कम आयु के जिन बच्चों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बच्चों को भविष्य में पासपोर्ट सत्यापन में भी परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके विरुद्ध कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के उस बयान पर — जिसमें कथित तौर पर पीओजेके की जनता को 'दुश्मन' बताया गया — एसपी वैद ने कहा कि यह अत्यंत निंदनीय बयान है। उन्होंने कहा, 'किसी भी समझदार नेता को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। यह दिखाता है कि पाकिस्तान को सिर्फ वहाँ की ज़मीन और संसाधनों से प्रेम है, वहाँ के लोगों से नहीं।'
विशेषज्ञ की नज़र में कानून और व्यवस्था
गौरतलब है कि एसपी वैद जम्मू-कश्मीर में दशकों तक कानून-व्यवस्था की जटिल परिस्थितियों को संभालने का अनुभव रखते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है। सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश को वे कानून के शासन की सर्वोच्चता का प्रमाण मानते हैं — और उनका आग्रह है कि सरकार और विपक्ष दोनों इसका पालन करें।
आने वाले दिनों में सीजेपी की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा।