28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीओजेके में बर्बर कार्रवाई पर पूर्व डीजीपी एसपी वैद का बड़ा बयान, UN और पश्चिमी मीडिया की चुप्पी पर उठाए सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीओजेके में बर्बर कार्रवाई पर पूर्व डीजीपी एसपी वैद का बड़ा बयान, UN और पश्चिमी मीडिया की चुप्पी पर उठाए सवाल

सारांश

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पीओजेके में पाकिस्तान सेना की कार्रवाई को बर्बर करार दिया और UN तथा पश्चिमी मीडिया की चुप्पी पर सवाल उठाए। साथ ही दिल्ली-बिहार में पुलिस बल प्रयोग और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर भी अपनी राय रखी।

मुख्य बातें

पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पीओजेके में पाकिस्तान रेंजर्स और सेना द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी को बर्बर कार्रवाई बताया।
वैद ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद , अमेरिका और पश्चिमी मीडिया की चुप्पी पर तीखे सवाल उठाए।
दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल को परिस्थितिजन्य बताया, लेकिन छात्रों के मामले में न्यूनतम बल की वकालत की।
बिहार में एके-47 से फायरिंग को अनुचित करार दिया; कहा — एसओपी के तहत वाटर कैनन व आंसू गैस का इस्तेमाल होना चाहिए था।
पेपर लीक विरोधी कानून का समर्थन किया और शिक्षा में नैतिक मूल्यों तथा पारदर्शिता को अनिवार्य बताया।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने 28 जुलाई को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताई और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद, अमेरिका तथा पश्चिमी मीडिया की चुप्पी को लेकर तीखे सवाल उठाए। उनके अनुसार पाकिस्तान रेंजर्स और सेना द्वारा वहाँ प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की गई है, जिसमें कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं। वैद ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पीओजेके के हालात को मजबूती से उठाना चाहिए।

पीओजेके में लोकतंत्र की असलियत

पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि पीओजेके में होने वाले चुनाव वास्तविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं हैं — वहाँ वही राजनीतिक दल जीतता है जिसे पाकिस्तानी सेना का समर्थन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग विरोध-प्रदर्शन में शामिल हैं, ऐसे में मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। वैद के अनुसार, 'यह दुखद है कि पीओजेके में निर्दोष लोगों के खिलाफ बर्बर कार्रवाई हो रही है।'

अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चुप्पी पर सवाल

वैद ने कहा कि पीओजेके से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं, जिनमें स्थानीय लोग अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और पश्चिमी मीडिया की चुप्पी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि ऐसी घटनाएँ कहीं और होतीं तो व्यापक अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया देखने को मिलती। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मानवाधिकार संस्थाओं की निष्पक्षता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।

दिल्ली और बिहार में पुलिस कार्रवाई पर राय

नई दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर वैद ने कहा कि जब बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए, पथराव हुआ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया, तब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग की आवश्यकता पड़ती है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के मामलों में बल का प्रयोग न्यूनतम होना चाहिए।

बिहार में प्रदर्शन के दौरान एके-47 से फायरिंग के मामले पर वैद ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल उचित नहीं है। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत वाटर कैनन, आंसू गैस, चिली ग्रेनेड और आवश्यकता पड़ने पर लाठीचार्ज जैसे उपाय अपनाए जाने चाहिए। गौरतलब है कि बिहार पुलिस ने संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया है और इस मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग उठ रही है।

पेपर लीक और शिक्षा सुधार पर जोर

पेपर लीक रोकने के लिए प्रस्तावित सख्त कानून पर वैद ने कहा कि यदि कानून में कड़ी सजा और भारी आर्थिक दंड के प्रावधान हैं, तो इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने विपक्ष से भी राजनीति से ऊपर उठकर रचनात्मक सुझाव देने की अपील की।

पूर्व डीजीपी ने देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा का अत्यधिक व्यावसायीकरण चिंता का विषय है। उन्होंने नैतिक शिक्षा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने की वकालत की और कहा कि केवल कठोर कानून पर्याप्त नहीं — शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी समान रूप से मजबूत करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्रियान्वयन तंत्र कितना मजबूत होगा — क्योंकि भारत में कड़े कानून बनाना और उन्हें लागू करना दो अलग बातें रही हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पीओजेके की स्थिति पर क्या कहा?
एसपी वैद ने पीओजेके की स्थिति को गंभीर बताया और कहा कि पाकिस्तान रेंजर्स व सेना द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की गई है, जिसमें कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबरें हैं। उन्होंने भारत से आग्रह किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन हालात को मजबूती से उठाए।
वैद ने UN और पश्चिमी मीडिया की चुप्पी पर सवाल क्यों उठाए?
वैद का कहना है कि पीओजेके से आ रहे वीडियो में स्थानीय लोग मानवाधिकार संगठनों से मदद माँग रहे हैं, फिर भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और पश्चिमी मीडिया चुप है। उनके अनुसार, यदि ऐसी घटनाएँ किसी और जगह होतीं तो व्यापक अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया देखने को मिलती।
बिहार में एके-47 से फायरिंग के मामले पर वैद की क्या राय है?
वैद ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में एके-47 जैसी असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल उचित नहीं है और एसओपी के तहत वाटर कैनन, आंसू गैस व चिली ग्रेनेड जैसे उपाय अपनाए जाने चाहिए। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की और कहा कि सभी तथ्य सामने आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाए।
दिल्ली प्रदर्शन में पैलेट गन के इस्तेमाल पर वैद का क्या रुख है?
वैद ने कहा कि जब पुलिसकर्मी घायल हों, पथराव हो और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचे, तब बल प्रयोग अपरिहार्य हो जाता है। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों से जुड़े मामलों में बल का प्रयोग न्यूनतम होना चाहिए।
पेपर लीक और शिक्षा सुधार पर वैद ने क्या सुझाव दिए?
वैद ने पेपर लीक विरोधी कड़े कानून का समर्थन किया और कहा कि कठोर सजा व आर्थिक दंड से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। साथ ही उन्होंने शिक्षा में नैतिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही को अनिवार्य बनाने की वकालत की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले