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फर्जी कॉल सेंटर रैकेट पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: चंडीगढ़-मोहाली समेत 8 ठिकानों पर छापे, ₹70 लाख जब्त

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फर्जी कॉल सेंटर रैकेट पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: चंडीगढ़-मोहाली समेत 8 ठिकानों पर छापे, ₹70 लाख जब्त

सारांश

अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को टेक सपोर्ट के नाम पर ठगने वाले रैकेट पर ईडी ने 8 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। ₹70 लाख की जब्ती और फ्रीज़ के साथ यह कार्रवाई दर्शाती है कि भारत से संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क अब केंद्रीय एजेंसियों के सीधे निशाने पर हैं।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 अगस्त 2026 को चंडीगढ़, मोहाली और मध्य प्रदेश में 8 ठिकानों पर पीएमएलए के तहत छापेमारी की।
कार्रवाई विजय राज कपूरिया, वरिंदर राज और मेसर्स इन्फिमम एंटरप्राइजेज एलएलपी के ठिकानों पर हुई।
रैकेट ने अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को फर्जी Apple/Microsoft टेक सपोर्ट पॉप-अप से निशाना बनाया।
ठगी की रकम PayPal, बिटकॉइन, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के ज़रिए ट्रांसफर की जाती थी।
छापेमारी में ₹20 लाख नकद जब्त और ₹50 लाख बैंक बैलेंस फ्रीज; कुल ₹70 लाख से अधिक।
पंजाब पुलिस पहले ही आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है; ईडी की जांच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 अगस्त 2026 को अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक संगठित फर्जी कॉल सेंटर रैकेट के खिलाफ व्यापक तलाशी अभियान चलाया। चंडीगढ़, मोहाली और मध्य प्रदेश में 8 ठिकानों पर की गई इस कार्रवाई में ₹20 लाख नकद जब्त किए गए और ₹50 लाख का बैंक बैलेंस फ्रीज किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह तलाशी अभियान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 के तहत चलाया गया। ईडी के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस ने यह कार्रवाई सोहाना पुलिस स्टेशन, एसएएस नगर, पंजाब में आईपीसी और आईटी एक्ट 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर मोहाली के सेक्टर 108 स्थित एमार के प्लॉट नंबर 29 से कथित तौर पर संचालित धोखाधड़ी वाले कॉल सेंटर से जुड़ी है। पंजाब पुलिस इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है।

ठगी का तरीका: टेक सपोर्ट स्कैम

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने विदेश में बैठे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को निशाना बनाया। पीड़ितों को प्रिंटर, आईपैड तथा कथित Apple और Microsoft के टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर फर्जी पॉप-अप और कॉल भेजे जाते थे। इन पॉप-अप में सिस्टम में तकनीकी खराबी का झूठा संदेश दिखाया जाता था और एक टोल-फ्री नंबर दिया जाता था।

जैसे ही पीड़ित उस नंबर पर कॉल करते, पूर्व-तैयार स्क्रिप्ट के ज़रिए ऑपरेटर उन्हें अपने सिस्टम का रिमोट एक्सेस देने के लिए राज़ी कर लेते और फिर अनावश्यक या नकली सेवाओं के लिए भुगतान करवाते। यह तरीका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'टेक सपोर्ट स्कैम' के नाम से जाना जाता है और भारत से संचालित ऐसे रैकेट पहले भी उजागर हो चुके हैं।

पैसों का लेन-देन: क्रिप्टो से हवाला तक

जांच के अनुसार, पीड़ितों से वसूली गई रकम PayPal, Stripe, बैंकिंग चैनलों, बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के साथ-साथ हवाला के ज़रिए ट्रांसफर की जाती थी। यह धनराशि मुख्य रूप से अमेरिका स्थित विदेशी संस्थाओं — RHL ऑपरेटिंग सॉल्यूशंस और RG सिक्योरिटी सॉल्यूशंस एलएलसी — के खातों के ज़रिए घुमाई जाती थी। पीएमएलए जांच में खुलासा हुआ कि मेसर्स इन्फिमम एंटरप्राइजेज एलएलपी के बैंक खाते में कई विदेशी संस्थाओं से धन प्राप्त हुआ था, जिन्हें संदिग्ध डमी और शेल कंपनियों के रूप में चिह्नित किया गया है।

छापेमारी में क्या मिला

तलाशी के दौरान ईडी ने ₹20 लाख बेहिसाब नकद जब्त किया। इसके अतिरिक्त आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी ज़ब्त किए गए। ₹50 लाख का बैंक बैलेंस फ्रीज किया गया, जिससे कुल जब्ती और फ्रीज़ की गई संपत्ति ₹70 लाख से अधिक हो गई। कार्रवाई विजय राज कपूरिया, वरिंदर राज, मेसर्स इन्फिमम एंटरप्राइजेज एलएलपी और उनसे जुड़े अन्य व्यक्तियों व संस्थाओं के ठिकानों पर की गई।

आगे की जांच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब भारत से संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट पर केंद्रीय एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। जांच का दायरा और आरोपियों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि अमेरिका स्थित शेल कंपनियों — RHL ऑपरेटिंग सॉल्यूशंस और RG सिक्योरिटी सॉल्यूशंस एलएलसी — तक जांच कितनी पहुँच पाती है। घरेलू छापे ज़रूरी हैं, लेकिन बिना अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग के रैकेट की मुख्य कमाई अछूती रह सकती है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी क्यों की?
ईडी ने पीएमएलए 2002 के तहत यह कार्रवाई सोहाना पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर की, जो मोहाली के सेक्टर 108 से कथित तौर पर संचालित धोखाधड़ी वाले कॉल सेंटर से जुड़ी है। इस रैकेट पर अमेरिका और कनाडा के नागरिकों से ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं।
इस फर्जी कॉल सेंटर रैकेट में ठगी का तरीका क्या था?
पीड़ितों को Apple और Microsoft के कथित टेक सपोर्ट के नाम पर फर्जी पॉप-अप और कॉल भेजे जाते थे, जिनमें सिस्टम में खराबी का झूठा संदेश होता था। पीड़ित के कॉल करने पर ऑपरेटर उनसे रिमोट एक्सेस लेकर नकली सेवाओं के लिए भुगतान करवाते थे।
छापेमारी में ईडी ने क्या-क्या जब्त किया?
ईडी ने ₹20 लाख बेहिसाब नकद, आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए। इसके अलावा ₹50 लाख का बैंक बैलेंस फ्रीज किया गया, जिससे कुल जब्ती और फ्रीज़ ₹70 लाख से अधिक हो गई।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपियों में विजय राज कपूरिया, वरिंदर राज और मेसर्स इन्फिमम एंटरप्राइजेज एलएलपी शामिल हैं। पंजाब पुलिस इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और ईडी की जांच अभी जारी है।
ठगी की रकम कैसे ट्रांसफर की जाती थी?
वसूली गई रकम PayPal, Stripe, बैंकिंग चैनलों, बिटकॉइन, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के ज़रिए ट्रांसफर की जाती थी। यह धन अमेरिका स्थित RHL ऑपरेटिंग सॉल्यूशंस और RG सिक्योरिटी सॉल्यूशंस एलएलसी जैसी संदिग्ध शेल कंपनियों के खातों से होकर गुज़रता था।
राष्ट्र प्रेस
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