24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: राजस्थान-पंजाब में 7 ठिकानों पर छापे, 5,300 सिम कार्ड कंबोडिया से फ्रॉड में शामिल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: राजस्थान-पंजाब में 7 ठिकानों पर छापे, 5,300 सिम कार्ड कंबोडिया से फ्रॉड में शामिल

सारांश

ईडी ने राजस्थान और पंजाब में 7 ठिकानों पर छापे मारकर एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जिसमें भारतीय सिम वेंडरों ने हजारों नंबर मलेशियाई नागरिक को सप्लाई किए — और कंबोडिया से व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए सैकड़ों करोड़ की ठगी की गई।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 5 जून 2026 को किशनगढ़, नागौर, जोधपुर और लुधियाना में 7 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
जांच में 2.3 लाख मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया; 36,000 सिम कंबोडिया में सक्रिय मिले।
5,300 सिम कार्ड देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े पाए गए।
राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ, संदीप भट्ट सहित कई सिम वेंडर नेटवर्क में शामिल पाए गए।
तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज़, लगभग 30 बैंक खाते और चल-अचल संपत्तियाँ चिन्हित की गईं।
मामला पीएमएलए, 2002 के तहत दर्ज; ईडी की आगे की जांच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर स्थित जोनल ऑफिस ने 5 जून 2026 को किशनगढ़ (अजमेर), नागौर, जोधपुर और लुधियाना (पंजाब) में 7 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत एक मलेशियाई नागरिक द्वारा संचालित साइबर फ्रॉड नेटवर्क के विरुद्ध की गई, जिसमें भारतीय सिम वेंडरों ने धोखाधड़ी से हजारों मोबाइल नंबर एक्टिवेट कर कंबोडिया से भारत में साइबर ठगी को अंजाम दिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने साइबर पुलिस स्टेशन, डीसीपी (क्राइम), जोधपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) वेंडरों के पास टेलीकॉम ऑपरेटरों की पीओएस आईडी थी, जिसका उपयोग सिम कार्ड जारी करने और एक्टिवेट करने के लिए किया जाता था। इन वेंडरों ने कम पढ़े-लिखे और आसानी से बहकावे में आने वाले लोगों को सिम पोर्ट करने या नए सिम जारी करने के बहाने निशाना बनाया।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे चला फ्रॉड नेटवर्क

जांच के अनुसार, सिम वेंडरों ने वैध ग्राहकों के नाम पर सिम एक्टिवेट करते समय अतिरिक्त सिम भी सक्रिय किए। ये अतिरिक्त सिम राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट के माध्यम से प्रति सिम कमीशन के बदले मलेशियाई नागरिक को सप्लाई किए गए। इनके साथ अन्य सिम वेंडर — प्रकाश भील, रामावतार राठी, हरीश मलाकार और हेमंत पंवार — भी इस नेटवर्क में शामिल पाए गए।

इन भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कंबोडिया से व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए भारत के अलग-अलग राज्यों में साइबर फ्रॉड करने के लिए किया गया। गौरतलब है कि कंबोडिया हाल के वर्षों में भारत-निर्देशित साइबर ठगी का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।

आंकड़ों का खुलासा: 36,000 सिम कंबोडिया में सक्रिय

ईडी के विश्लेषण में लगभग 2.3 लाख मोबाइल नंबरों की जांच की गई। इनमें से करीब 36,000 सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय पाए गए। इनमें से भी लगभग 5,300 सिम कार्ड देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड मामलों से सीधे जुड़े पाए गए। यह आंकड़ा इस नेटवर्क की व्यापकता और संगठित स्वरूप को उजागर करता है।

तलाशी में क्या मिला

छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज़ और सामग्री जब्त की गई। इसके अलावा लगभग 30 बैंक खातों की पहचान की गई और आरोपियों से जुड़ी चल व अचल संपत्तियों का भी पता लगाया गया। ईडी के अनुसार, मामले में आगे की जांच जारी है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार और दूरसंचार विभाग (DoT) सिम कार्ड के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियमों को सख्त कर रहे हैं। ईडी की यह कार्रवाई पीएमएलए के तहत संपत्ति कुर्की और आरोपियों की गिरफ्तारी की दिशा में आगे बढ़ सकती है। जांच एजेंसी मलेशियाई नागरिक तक पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावना भी तलाश रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 का कंबोडिया में सक्रिय होना बताता है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि व्यवस्थागत चूक है। सवाल यह है कि टेलीकॉम ऑपरेटरों की पीओएस प्रणाली इतने बड़े पैमाने पर दुरुपयोग को रोकने में क्यों नाकाम रही। ईडी की कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन जब तक पीओएस सत्यापन तंत्र को मज़बूत नहीं किया जाता, ऐसे नेटवर्क नए रूप में उभरते रहेंगे।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने यह साइबर फ्रॉड छापेमारी किन जगहों पर की?
ईडी के जयपुर जोनल ऑफिस ने 5 जून 2026 को किशनगढ़ (अजमेर), नागौर, जोधपुर (सभी राजस्थान) और लुधियाना (पंजाब) में कुल 7 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की गई।
इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क में सिम कार्ड का इस्तेमाल कैसे हुआ?
भारतीय सिम वेंडरों ने कम पढ़े-लिखे लोगों को बहाने से सिम पोर्ट या नए सिम जारी करने के लिए तैयार किया और उनके नाम पर अतिरिक्त सिम एक्टिवेट किए। ये सिम मलेशियाई नागरिक को सप्लाई किए गए, जिनसे कंबोडिया में बैठकर व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए भारत में साइबर ठगी की गई।
इस मामले में कितने सिम कार्ड और बैंक खाते चिन्हित किए गए?
ईडी के विश्लेषण में लगभग 2.3 लाख नंबरों की जांच की गई, जिनमें से करीब 36,000 सिम कंबोडिया में सक्रिय थे। इनमें से लगभग 5,300 सिम सैकड़ों करोड़ रुपए के फ्रॉड मामलों से जुड़े पाए गए और तलाशी में लगभग 30 बैंक खाते चिन्हित किए गए।
इस मामले में कौन-कौन से आरोपी सामने आए हैं?
जांच में राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट मुख्य आरोपियों के रूप में सामने आए हैं। इनके साथ सिम वेंडर प्रकाश भील, रामावतार राठी, हरीश मलाकार और हेमंत पंवार भी नेटवर्क में शामिल पाए गए।
ईडी की इस जांच में आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
ईडी पीएमएलए के तहत चिन्हित संपत्तियों की कुर्की और आरोपियों की गिरफ्तारी की दिशा में आगे बढ़ सकती है। मलेशियाई नागरिक तक पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावना भी तलाशी जा रही है और मामले में जांच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले