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टीएमसी की हार पर बिस्वजीत देब का बड़ा बयान: अति-आत्मविश्वास, भ्रष्टाचार और आई-पैक बने पतन की वजह

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टीएमसी की हार पर बिस्वजीत देब का बड़ा बयान: अति-आत्मविश्वास, भ्रष्टाचार और आई-पैक बने पतन की वजह

सारांश

टीएमसी के अपने वरिष्ठ नेता बिस्वजीत देब ने पार्टी की हार की भीतरी कहानी बयान कर दी — भ्रष्टाचार, आई-पैक की दलाली के आरोप और जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा। दो दिन में पार्टी छोड़ने का संकेत देकर उन्होंने टीएमसी के आंतरिक संकट को और गहरा कर दिया है।

मुख्य बातें

बिस्वजीत देब ने टीएमसी की हार के लिए अति-आत्मविश्वास, घमंड और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया।
पिछले पाँच वर्षों में कई मंत्री, सांसद और विधायक गिरफ्तार हुए; लगभग 26,000 शिक्षकों की नौकरियाँ गईं।
आई-पैक पर आरोप कि टिकट के बदले पैसे माँगे जाते थे; जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया।
देब ने दो दिनों में पार्टी छोड़ने या न छोड़ने का फैसला करने की बात कही।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कमरहटी में 10,000 लोगों के साथ बकरीद की नमाज को शांतिपूर्ण बताया; BJP पर टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और मिजोरम के एडवोकेट जनरल बिस्वजीत देब ने पार्टी की हालिया चुनावी हार के लिए अति-आत्मविश्वास, घमंड और व्यापक भ्रष्टाचार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। 29 मई को कोलकाता में दिए गए अपने बयान में देब ने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को यह पहले से दिख रहा था कि हालात हाथ से निकल रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बिस्वजीत देब ने कहा, "हम जमीनी स्तर पर थे और समझ सकते थे कि हालात धीरे-धीरे हाथ से निकल रहे थे। पिछले पाँच सालों में भ्रष्टाचार चरम पर था। हर विभाग में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए, कई मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को गिरफ्तार किया गया।" उन्होंने आगे कहा कि कुछ आरोपी नेताओं को दोबारा टिकट दिए जाने से जनता में गहरा रोष पैदा हुआ। इसके अलावा, लगभग 26,000 शिक्षकों की नौकरियाँ जाने और आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड ने जनता के गुस्से को और हवा दी।

अभिषेक बनर्जी और आई-पैक पर सवाल

देब ने अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर बहुत ज्यादा भरोसा किया। अभिषेक ने पार्टी को कॉर्पोरेट संस्था बनाने की कोशिश की, जबकि राजनीतिक पार्टी जमीनी स्तर पर काम करती है।" उन्होंने यह भी कहा कि जमीनी कार्यकर्ताओं को न पहचान मिली और न सम्मान, और सारा संवाद केवल आई-पैक के माध्यम से होता था। देब के अनुसार, आरोप है कि आई-पैक टिकट दिलाने के बदले पैसे माँगता था — हालाँकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पार्टी छोड़ने पर फैसला बाकी

देब ने यह भी बताया कि वे दो दिनों के भीतर पार्टी छोड़ने या न छोड़ने का निर्णय लेंगे। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को भी उचित ठहराया और कहा कि यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग का वैध अधिकार है।

बकरीद और सौगत रॉय की प्रतिक्रिया

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने बकरीद के शांतिपूर्ण आयोजन पर संतोष जताया। उन्होंने कहा, "बकरीद शांतिपूर्ण ढंग से गुजरी। मेरे इलाके कमरहटी में करीब 10,000 लोगों ने बकरीद की नमाज में हिस्सा लिया।" उन्होंने बताया कि इस बार ब्रिगेड ग्राउंड में बेहतर व्यवस्था के चलते कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जबकि पहले रेड रोड और शहीद मीनार पर नमाज होती थी।

भाजपा पर हमले का आरोप और पुलिस की भूमिका

सौगत रॉय ने कोलकाता के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) द्वारा सुरक्षा इंतजामों की तारीफ किए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि वह अधिकारी सरकार के प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं पर टीएमसी सदस्यों पर हमले का आरोप लगाते हुए इसे पुलिस की लापरवाही करार दिया। उन्होंने कहा, "हम शांतिपूर्वक पुलिस थाने में ज्ञापन देने गए थे। वहाँ भाजपा के कुछ लोग बाहर आ गए और नारे लगाने लगे।" यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव का माहौल बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक भीतरी दरार का सार्वजनिक स्वीकारोक्ति है। आई-पैक पर टिकट के बदले पैसे माँगने के आरोप और अभिषेक बनर्जी की 'कॉर्पोरेट राजनीति' की आलोचना यह बताती है कि पार्टी का संगठनात्मक ढाँचा जमीनी वास्तविकता से कट चुका था। गौरतलब है कि आरजी कर कांड और शिक्षक भर्ती घोटाले जैसे मुद्दे लंबे समय से जनता में रोष का कारण थे, फिर भी नेतृत्व ने सुधार की बजाय दागी नेताओं को दोबारा टिकट दिए। यह चुनावी गणित की नहीं, नैतिक साख की हार है — और जब तक पार्टी इस फर्क को नहीं समझेगी, विपक्ष में बैठने की अवधि लंबी होती जाएगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिस्वजीत देब के अनुसार टीएमसी की हार के मुख्य कारण क्या हैं?
बिस्वजीत देब ने टीएमसी की हार के लिए अति-आत्मविश्वास, घमंड और पिछले पाँच वर्षों में हर विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया। इसके साथ ही आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड और लगभग 26,000 शिक्षकों की नौकरी जाने से जनता में गहरा रोष था।
आई-पैक पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
बिस्वजीत देब के अनुसार, आरोप है कि आई-पैक टिकट दिलाने के बदले पैसे माँगता था। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में सारा संवाद केवल आई-पैक के जरिए होता था, जिससे जमीनी कार्यकर्ता नेतृत्व से कट गए।
क्या बिस्वजीत देब टीएमसी छोड़ेंगे?
बिस्वजीत देब ने कहा है कि वे दो दिनों के भीतर पार्टी छोड़ने या न छोड़ने का फैसला लेंगे। उन्होंने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
सौगत रॉय ने बकरीद आयोजन के बारे में क्या कहा?
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने बकरीद के शांतिपूर्ण आयोजन पर संतोष जताया और बताया कि उनके इलाके कमरहटी में करीब 10,000 लोगों ने नमाज अदा की। इस बार ब्रिगेड ग्राउंड में बेहतर व्यवस्था के कारण कार्यक्रम सफल रहा।
SIR को लेकर बिस्वजीत देब का क्या रुख है?
बिस्वजीत देब ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को उचित ठहराया और कहा कि यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 तथा संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग का वैध संवैधानिक अधिकार है।
राष्ट्र प्रेस
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