टीएमसी में अभिषेक बनर्जी का एकछत्र राज, सबका मुंह बंद था: बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने 15 जून 2026 को नई दिल्ली में पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के सत्ता में रहने के दौरान पार्टी के भीतर असहमति की कोई गुंजाइश नहीं थी — सभी का मुंह बंद रखा गया था। सत्ता परिवर्तन के बाद अब लोग खुलकर सच बोल रहे हैं।
टीएमसी पर आरोप: 'बच्चे का खेल चलता था'
चक्रवर्ती ने कहा, 'एक अकेला व्यक्ति (अभिषेक बनर्जी) चलाता था। टीएमसी एक असली राजनीतिक मंच नहीं है। वहां एक बच्चे का खेल चलता था।' उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में न कोई समिति की भूमिका थी, न सामूहिक निर्णय की परंपरा — जो मर्जी होती थी, वही होता था और जो जिस पद पर बैठना चाहता था, बैठ जाता था।
उन्होंने कहा कि पार्टी में बैठकें होनी चाहिए, प्रस्ताव आने चाहिए और सदस्यों की राय ली जानी चाहिए — लेकिन टीएमसी में ऐसा कुछ नहीं था। 'क्या आप पार्टी के हेडमास्टर हैं?' — यह सवाल उन्होंने सीधे पार्टी नेतृत्व पर तंज कसते हुए उठाया।
चुप्पी का कारण: पुलिस का डर
चुनावों से पहले पार्टी के भीतर विरोध की आवाज़ें क्यों नहीं उठीं, इस पर चक्रवर्ती ने कहा कि 'कोई आवाज उठाता और कोई उठाने देता? सभी का मुंह बंद करके रखा था। कोई भी पुलिस के डर में कुछ नहीं कर पाता था।' उनके अनुसार, अब जब टीएमसी सत्ता से बाहर हो गई है, तभी लोग सच बोलने की स्थिति में आए हैं।
एनसीपीआई से विलय और राजनीतिक भविष्य
एनसीपीआई के साथ विलय पर चक्रवर्ती ने कहा, 'इसके पीछे सिर्फ एक ही कारण है। हम दोनों पार्टियां एक साथ आकर एक मजबूत स्थिति में आना चाहती हैं ताकि हम आगे बढ़ सकें।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विलय राजनीतिक ताकत को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है।
केंद्र-राज्य संबंधों पर उन्होंने कहा कि नई सरकार के आने के बाद अब दोनों स्तरों पर समन्वय बेहतर होगा — वह विवाद खत्म होगा जिसमें राज्य और केंद्र एक-दूसरे पर दोष मढ़ते थे।
जनता की समझदारी और राजनीतिक इतिहास
चक्रवर्ती ने भारत की जनता को 'बहुत समझदार' बताते हुए कहा कि जनता ने लेफ्ट फ्रंट को 35-36 साल तक रखा, फिर हटाया; ममता बनर्जी को 5 साल में मुख्यमंत्री बनाया और 15 साल बाद हटाया; और अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 5 साल के भीतर बंगाल में पूरी सत्ता मिल गई।
ममता-अभिषेक और टीएमसी का भविष्य
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के व्यवहार पर चक्रवर्ती ने कहा कि 'उन लोगों के लिए बोलना बड़ा मुश्किल है। ममता बनर्जी घर के डर में राजनीति करती हैं।' टीएमसी के कांग्रेस में संभावित विलय पर उन्होंने कहा कि ममता ने ही कभी कांग्रेस को तोड़ा था — अब अगर वे वापस जाना चाहती हैं तो जा सकती हैं, लेकिन 'इसकी कोई औचित्य नहीं है।'
चुनावी धांधली के आरोपों पर उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में काफी सक्रिय था और कोई भी वोट चोरी साबित नहीं हुई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बारे में उन्होंने कहा कि वे सभी राजनीतिक दलों के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाकर सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बागी सांसदों का यह गुट नई राजनीतिक धुरी बनाने में कितना सफल होता है।