कल्याण बनर्जी का अभिषेक को अल्टीमेटम: 'ममता दी चुनें — वे या मैं', TMC में दरार गहरी
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने 12 जून को पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ सार्वजनिक मोर्चा खोलते हुए पार्टी नेतृत्व को खुला अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से सीधे शब्दों में कहा कि यदि अभिषेक बनर्जी के बिना पार्टी नहीं चल सकती, तो वे साथ नहीं रहेंगे। इस बयान ने TMC के भीतर वर्षों से सुलग रहे अंतर्द्वंद्व को एक नई राजनीतिक लड़ाई में बदल दिया है।
कल्याण बनर्जी ने क्या कहा
चार बार के सांसद कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर कड़े शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा, 'यह मेरे लिए बहुत अपमानजनक है। उनके अहंकारी रवैये ने पार्टी को बर्बाद कर दिया है। उन्हें यह समझना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि 'उन्हें हर दिन लगता है कि वही राजा हैं। बुरे दिनों में भी, जब मैं पार्टी के साथ खड़ा रहता हूं और ममता बनर्जी का समर्थन करता हूं, तब अभिषेक बनर्जी के इस रवैये के कारण मेरे लिए काम करना मुश्किल हो जाता है।'
अल्टीमेटम देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया, 'सबसे पहले ममता दी को तय करना होगा। उन्हें ही फैसला लेना है। अगर वह अभिषेक के बिना पार्टी को आगे नहीं बढ़ा सकतीं, तो मैं उनके साथ नहीं रहूंगा।'
भाजपा की प्रतिक्रिया: 'TMC के अंत का संकेत'
केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि TMC के अंदरूनी मतभेद अब साफ तौर पर दिखने लगे हैं। उनके अनुसार, 'टीएमसी के सदस्य — खासकर सांसद — एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं। शुरू से ही पार्टी का वरिष्ठ नेतृत्व अभिषेक बनर्जी के टीएमसी में दूसरे सबसे ताकतवर नेता के तौर पर अचानक उभरने से खुश नहीं था।'
बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने दावा किया कि 'टीएमसी का अस्तित्व खत्म हो चुका है। टीएमसी के विधायकों और सांसदों में गहरी नाराजगी है और इस नाराजगी की मुख्य वजह अभिषेक बनर्जी द्वारा पैदा की गई अशांति है। पार्टी ने जनता के साथ-साथ कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों का भी समर्थन खो दिया है।' बिहार के ही मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि जब ममता बनर्जी की सरकार मजबूती से सत्ता में थी, तो अभिषेक बनर्जी जो कुछ भी कहते थे वही नियम बन जाता था, और सालों तक TMC सांसद दबाव में काम करते रहे।
विपक्षी दलों की राय
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा, 'लोगों को अब एहसास हो गया है कि टीएमसी ने जो रास्ता चुना था, वह सही दिशा में नहीं था। जो लोग उस रास्ते पर चले, वे अब समझ रहे हैं कि आज एनडीए की सरकार है और एनडीए का एकमात्र फोकस विकास है।'
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने विश्लेषण करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर की आलोचना ममता बनर्जी पर नहीं, बल्कि अभिषेक बनर्जी पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, 'कल्याण बनर्जी चार बार के सांसद हैं और ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक हैं। यह साफ है कि किसी भी बागी सांसद को ममता बनर्जी से कोई निजी समस्या नहीं है। अगर कोई समस्या है, तो वह अभिषेक बनर्जी से है।'
TMC की राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में करीब 15 वर्षों से ममता बनर्जी और TMC का वर्चस्व रहा है। पार्टी ने लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते हैं और लगातार चार लोकसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यह ऐसे समय में आया है जब TMC 2026 के बंगाल विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच आंतरिक एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
आगे क्या होगा
कल्याण बनर्जी के इस अल्टीमेटम के बाद अब सबकी नजरें ममता बनर्जी के अगले कदम पर टिकी हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व इस विवाद को आंतरिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश कर सकता है, लेकिन सार्वजनिक रूप से दिए गए अल्टीमेटम ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह दरार और चौड़ी होती है या पाट दी जाती है।