कलकत्ता हाईकोर्ट ने रितब्रत बनर्जी को विपक्ष नेता मानने के स्पीकर के फैसले पर रोक से इनकार किया
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 19 जून 2025 को पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस के उस निर्णय पर अंतरिम स्थगन देने से इनकार कर दिया, जिसमें निष्कासित तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक रितब्रत बनर्जी को विधानसभा में बहुमत गुट का नेता और विपक्ष का नेता (LOP) स्वीकार किया गया था। न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने बुधवार को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था और गुरुवार सुबह अपना निर्णय सुनाते हुए स्पीकर के आदेश में कोई हस्तक्षेप करने से मना कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
हाईकोर्ट के इस फैसले के परिणामस्वरूप रितब्रत बनर्जी फिलहाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद पर बने रहेंगे। इसके साथ ही TMC के अल्पमत गुट द्वारा वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की कोशिश को अस्थायी झटका लगा है। अदालत ने दोनों पक्षों को अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली तारीख 28 जुलाई तय की है।
विधायकों का गणित
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के कुल 80 विधायक हैं। इनमें से रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट के साथ 60 विधायकों के होने का दावा किया जा रहा है, जबकि स्वयं रितब्रत बनर्जी ने इसी सप्ताह 64 विधायकों के समर्थन का दावा किया था। दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार मूल गुट के पास कथित तौर पर केवल 20 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है।
विवाद की जड़ और सीआईडी जांच
यह पूरा विवाद उस प्रस्ताव से शुरू हुआ जो TMC के एक गुट ने स्पीकर को सौंपा था, जिसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नयना बंदोपाध्याय को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक (Chief Whip) बनाने की बात कही गई थी। रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने इस प्रस्ताव में हस्ताक्षरों में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया, जिसके बाद सीआईडी ने जांच शुरू की। इसके तुरंत बाद TMC ने दोनों नेताओं को पार्टी से निलंबित कर दिया।
विद्रोह और स्पीकर की मान्यता
निलंबन के बाद रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने खुलकर बगावत कर दी। उन्होंने स्पीकर को एक नया प्रस्ताव सौंपते हुए स्वयं को TMC विधायक दल का बहुमत गुट घोषित किया। स्पीकर रथिंद्र बोस ने यह प्रस्ताव स्वीकार करते हुए रितब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में आधिकारिक मान्यता दे दी, जिसे अब हाईकोर्ट ने अंतरिम रूप से बरकरार रखा है। गौरतलब है कि यह पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर पिछले कुछ वर्षों में सबसे बड़ा आंतरिक विभाजन माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित है। तब तक सीआईडी जांच भी जारी रहेगी और हस्ताक्षर विवाद का निपटारा अदालत की निगरानी में होगा। यह देखना अहम होगा कि क्या TMC का मूल गुट विधायकों की संख्या बढ़ाने में सफल होता है या विद्रोही गुट अपनी बढ़त बनाए रखता है।