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कलकत्ता हाईकोर्ट ने ऋतब्रत बनर्जी की विपक्ष नेता मान्यता पर रोक से किया इनकार, स्पीकर का आदेश माँगा

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने ऋतब्रत बनर्जी की विपक्ष नेता मान्यता पर रोक से किया इनकार, स्पीकर का आदेश माँगा

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने निष्कासित TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष नेता मानने के स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने पूछा — क्या पार्टी की सहमति के बिना निष्कासित विधायक LOP बन सकता है? 80 में से 60 विधायकों की बगावत से बंगाल की राजनीति में बड़ा संकट।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने 11 जून 2026 को ऋतब्रत बनर्जी की LOP मान्यता पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया।
अदालत ने स्पीकर रथींद्र बोस का लिखित आदेश न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
294 सदस्यीय विधानसभा में TMC के 80 में से 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के गुट के साथ; 20 विधायक ममता-अभिषेक खेमे में।
CID हस्ताक्षर विसंगति मामले की जांच जारी; ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा TMC से निलंबित।
अदालत ने उठाया अहम सवाल — दल से निष्कासित विधायक क्या बिना पार्टी की सहमति के LOP बन सकता है?

कलकत्ता हाईकोर्ट की अवकाशकालीन एकल पीठ ने 11 जून 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें निष्कासित तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक ऋतब्रत बनर्जी को सदन में बहुमत गुट का नेता और आधिकारिक विपक्ष के नेता (LOP) के रूप में मान्यता दी गई थी। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने स्पष्ट किया कि पहले स्पीकर का लिखित आदेश न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, उसके बाद ही आगे की सुनवाई होगी।

मामले की पृष्ठभूमि

स्पीकर के इस फैसले को चुनौती देते हुए इस सप्ताह की शुरुआत में एक याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने अंतरिम संरक्षण आदेश की माँग की थी, जिसे अदालत ने गुरुवार की सुनवाई में अस्वीकार कर दिया। अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि स्पीकर का आदेश रिकॉर्ड पर आने के बाद ही पुनः न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएँ।

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न भी उठाया — क्या किसी राजनीतिक दल से निष्कासित विधायक उस दल की औपचारिक सहमति के बिना विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकते हैं? यह प्रश्न इस मामले के केंद्र में है।

TMC में विभाजन और बगावत का घटनाक्रम

294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायक हैं। इनमें से 60 विधायक — जिनकी संख्या ऋतब्रत बनर्जी के अनुसार 1 जून तक बढ़कर 65 हो गई थी — उनके नेतृत्व वाले नए गुट का समर्थन कर रहे हैं। शेष 20 विधायक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए हुए हैं।

इससे पहले विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में शोभनदेब चट्टोपाध्याय, दो उपनेताओं के रूप में असीमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय तथा मुख्य सचेतक के रूप में फिरहाद हकीम के नामांकन प्रस्ताव में कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित गड़बड़ी की शिकायत सामने आई थी। इस मामले में अपराध जांच विभाग (CID) की जांच पहले से जारी है।

हस्ताक्षर विवाद और निलंबन

ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने इन कथित हस्ताक्षर विसंगतियों की जानकारी स्पीकर कार्यालय को दी, जिसके बाद CID जांच शुरू हुई। इसके तत्काल बाद तृणमूल कांग्रेस ने दोनों विधायकों — ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा — को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

निलंबन के कुछ समय बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने बगावत का ऐलान कर दिया और खुद को TMC विधायक दल का बहुमत गुट बताते हुए स्पीकर को नया प्रस्ताव सौंपा। स्पीकर रथींद्र बोस ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक विपक्ष नेता की मान्यता दे दी।

आगे क्या होगा

अब सभी पक्षों की निगाहें स्पीकर के लिखित आदेश पर टिकी हैं, जिसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है। उसके बाद ही अदालत अंतरिम राहत या आगे की सुनवाई पर कोई निर्णय लेगी। यह मामला न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति बल्कि विधायी प्रक्रिया और दल-बदल कानून की व्याख्या के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दल-बदल कानून की उस खामी का है जो बहुमत के नाम पर निष्कासित विधायकों को संवैधानिक पद दिलाने की राह खोलती है। स्पीकर का फैसला — जो स्वयं TMC की नई सरकार के समर्थन से चुने गए हैं — सत्तारूढ़ दल के भीतर की दरारों को उजागर करता है। अदालत का वह प्रश्न कि 'क्या पार्टी की सहमति के बिना निष्कासित विधायक LOP बन सकता है', संविधान की दसवीं अनुसूची की व्याख्या को नई परीक्षा में डाल सकता है। बंगाल में यह संकट आने वाले महीनों में विधायी स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने ऋतब्रत बनर्जी की LOP मान्यता पर क्या फैसला सुनाया?
अदालत ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि पहले स्पीकर का लिखित आदेश न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। उसके बाद ही आगे की सुनवाई होगी।
ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता कैसे मिली?
TMC से निलंबन के बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने बगावत कर खुद को TMC विधायक दल का बहुमत गुट घोषित किया और स्पीकर को नया प्रस्ताव सौंपा। स्पीकर रथींद्र बोस ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर उन्हें आधिकारिक LOP की मान्यता दे दी।
TMC में यह विभाजन क्यों हुआ?
ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने पूर्व LOP नामांकन प्रस्ताव में हस्ताक्षर विसंगतियों की शिकायत स्पीकर कार्यालय से की, जिसके बाद CID जांच शुरू हुई। इसके जवाब में TMC ने दोनों को तत्काल निलंबित कर दिया, जिसके बाद 60 विधायकों की बगावत सामने आई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के कितने विधायक किस गुट में हैं?
294 सदस्यीय विधानसभा में TMC के कुल 80 विधायक हैं। इनमें से 60 (ऋतब्रत बनर्जी के अनुसार 1 जून तक 65) ऋतब्रत बनर्जी के गुट में हैं, जबकि 20 विधायक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खेमे के साथ बने हुए हैं।
इस मामले में अदालत ने कौन-सा अहम संवैधानिक सवाल उठाया?
अदालत ने पूछा कि क्या किसी राजनीतिक दल से निष्कासित विधायक उस दल की औपचारिक सहमति के बिना विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रश्न दल-बदल कानून और संविधान की दसवीं अनुसूची की व्याख्या से जुड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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