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कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC विधायक कुणाल घोष की याचिका खारिज की, विधानसभा में बोलने के अधिकार का था मामला

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC विधायक कुणाल घोष की याचिका खारिज की, विधानसभा में बोलने के अधिकार का था मामला

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC विधायक कुणाल घोष की याचिका खारिज कर दी, जो विधानसभा में बोलने के अधिकार से जुड़ी थी। अदालत ने कहा — विधानसभा की आंतरिक कार्यवाही में न्यायिक दखल संभव नहीं। यह मामला TMC के भीतर ममता-वफादार और रिताब्रत गुट के बीच बढ़ती दरार को उजागर करता है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति कृष्ण राव की सिंगल बेंच ने 7 अगस्त 2026 को TMC विधायक कुणाल घोष की याचिका खारिज की।
घोष का आरोप था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में उनके बोलने के अधिकार को दबाया जा रहा है।
अदालत ने कहा — विधानसभा की आंतरिक कार्यवाही में न्यायिक समीक्षा संभव नहीं।
घोष को सलाह दी गई कि वे विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस के पास जाएँ।
बजट सत्र में हंगामे के बाद घोष को मार्शल द्वारा सदन से बाहर निकाला गया था और उस दिन के लिए निलंबित किया गया था।
TMC के अधिकांश विधायक अब रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में हैं, जो विधानसभा में विपक्ष के आधिकारिक नेता हैं।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में उनके बोलने के अधिकारों को जानबूझकर दबाया जा रहा है। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि अदालत विधानसभा की आंतरिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने में सक्षम नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

पत्रकार से राजनेता बने कुणाल घोष TMC के उस गुट का हिस्सा हैं जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठावान है। घोष का आरोप था कि विधानसभा के पिछले बढ़े हुए बजट सत्र में वक्ताओं की सूची से उनका नाम जानबूझकर हटाया गया। उन्होंने इसके लिए पार्टी के 'बागी गुट' — जिसका नेतृत्व पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रत बनर्जी करते हैं — को जिम्मेदार ठहराया।

गौरतलब है कि TMC के अधिकांश विधायक अब रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बहुमत गुट में शामिल हो गए हैं। रिताब्रत बनर्जी फिलहाल पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के आधिकारिक नेता के रूप में मान्यता प्राप्त हैं।

सदन में हंगामा और निलंबन

बजट सत्र के दौरान घोष की रिताब्रत गुट के चीफ व्हिप अखरुज्जमां के साथ तीखी नोकझोंक हुई थी। इस हंगामे के बाद मार्शल की सहायता से घोष को सदन से बाहर निकाला गया और उस दिन के लिए उन्हें विधानसभा से निलंबित भी कर दिया गया। इसके बावजूद घोष ने अपनी आवाज दबाने की साजिश के आरोप लगाने जारी रखे और अंततः कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अदालत में क्या हुआ

शुक्रवार दोपहर जब न्यायमूर्ति कृष्ण राव की बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई हुई, तो घोष के वकील ने 'न्यायिक समीक्षा' की माँग की। दूसरी ओर, राज्य विधानसभा की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि घोष को जून में सदन में बोलने का अवसर मिला था। विधानसभा के वकील ने पूछा, 294 विधायक हैं। सभी को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए। कोर्ट यह कैसे तय कर सकती है कि कौन से विधायक बोल सकते हैं और कौन से नहीं?

दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति राव ने न्यायिक समीक्षा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में अदालत की कोई भूमिका नहीं बनती। साथ ही उन्होंने घोष को सलाह दी कि वे अपनी शिकायत लेकर विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस के पास जाएँ।

TMC में अंदरूनी खींचतान

यह मामला TMC के भीतर गहरी होती दरार का प्रतीक है। एक ओर ममता-अभिषेक के प्रति वफादार 'अल्पसंख्यक गुट' है, तो दूसरी ओर रिताब्रत के नेतृत्व में बहुमत वाला 'बागी गुट'। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं।

आगे क्या

अदालत के निर्देश के अनुसार, घोष के पास अब विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराने का विकल्प बचा है। यह देखना होगा कि क्या स्पीकर इस आंतरिक विवाद में कोई निर्णायक भूमिका निभाते हैं, या यह मामला TMC की अंदरूनी राजनीति में और उलझता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह विधायी लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है। अदालत का यह रुख — कि विधानसभा की आंतरिक कार्यवाही न्यायिक समीक्षा से परे है — संवैधानिक रूप से सही है, लेकिन इससे यह सवाल अनुत्तरित रह जाता है कि अल्पमत गुट के विधायकों की आवाज़ सदन में कैसे सुनी जाएगी। पश्चिम बंगाल में TMC की अंदरूनी राजनीति अब विधानसभा की कार्यवाही को भी प्रभावित कर रही है — और यह प्रवृत्ति राज्य के संसदीय स्वास्थ्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुणाल घोष की याचिका किस बारे में थी?
TMC विधायक कुणाल घोष ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में उनके बोलने के अधिकार को जानबूझकर दबाया जा रहा है। उन्होंने बजट सत्र में वक्ताओं की सूची से उनका नाम हटाने और सदन से निष्कासन को इसका प्रमाण बताया था।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
न्यायमूर्ति कृष्ण राव की सिंगल बेंच ने कहा कि अदालत विधानसभा की आंतरिक कार्यवाही के मामलों में हस्तक्षेप करने में सक्षम नहीं है। इसलिए न्यायिक समीक्षा की माँग सुनवाई योग्य नहीं पाई गई।
TMC में कुणाल घोष और रिताब्रत बनर्जी गुट का विवाद क्या है?
TMC के अधिकांश विधायक पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए हैं, जो अब विधानसभा में विपक्ष के आधिकारिक नेता हैं। कुणाल घोष ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार अल्पसंख्यक गुट का हिस्सा हैं और उन्होंने रिताब्रत गुट पर अपनी आवाज दबाने की साजिश का आरोप लगाया है।
अब कुणाल घोष के पास क्या विकल्प हैं?
अदालत ने घोष को सलाह दी है कि वे अपनी शिकायत विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस के समक्ष रखें। फिलहाल यही उनका एकमात्र संस्थागत विकल्प बचा है।
विधानसभा में घोष को निलंबित क्यों किया गया था?
बजट सत्र के दौरान कुणाल घोष और रिताब्रत गुट के चीफ व्हिप अखरुज्जमां के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसके बाद सदन में हंगामा हुआ। मार्शल की सहायता से घोष को सदन से बाहर निकाला गया और उस दिन के लिए उन्हें विधानसभा से निलंबित कर दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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