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कलकत्ता हाईकोर्ट में आज दो अहम सुनवाई: नेता प्रतिपक्ष विवाद और इंद्रनील सेन की जमानत याचिका

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कलकत्ता हाईकोर्ट में आज दो अहम सुनवाई: नेता प्रतिपक्ष विवाद और इंद्रनील सेन की जमानत याचिका

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट में बुधवार को दो संवेदनशील मामलों पर सुनवाई होगी — TMC से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष मानने के स्पीकर के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका, और पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की यूनेस्को नाम के कथित दुरुपयोग से जुड़ी धोखाधड़ी मामले में अग्रिम जमानत अर्जी।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट 17 जून 2026 को नेता प्रतिपक्ष नियुक्ति विवाद पर सुनवाई करेगा।
स्पीकर रथिंद्र बोस ने TMC से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक एलओपी के रूप में मान्यता दी थी, जिसे चुनौती दी गई है।
TMC के 80 विधायकों में से 60 बनर्जी गुट के साथ, 20 पुराने गुट के साथ हैं।
जस्टिस राव ने फ्लोर टेस्ट के बिना बहुमत का निर्धारण करने पर सवाल उठाया है।
पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका पर जस्टिस जय सेनगुप्ता की पीठ पहली सुनवाई करेगी।
सेन पर आरोप है कि उन्होंने 'यूनेस्को' के नाम का अनधिकृत उपयोग कर प्री-पूजा टिकट बेचे।

कलकत्ता हाईकोर्ट बुधवार, 17 जून 2026 को दो महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करेगा — पहला, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका, और दूसरा, पूर्व मंत्री एवं गायक इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत अर्जी। दोनों मामले राज्य की राजनीतिक और न्यायिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं।

नेता प्रतिपक्ष विवाद: मामले की पृष्ठभूमि

याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रथिंद्र बोस के उस निर्णय को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को सदन में TMC के नए बहुमत गुट के नेता और आधिकारिक विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी थी। यह मामला इसलिए जटिल है क्योंकि बनर्जी को उनकी मूल पार्टी से निकाला जा चुका है, फिर भी उन्हें एलओपी का दर्जा दिया गया।

11 जून को जस्टिस राव की एकल-पीठ ने स्पीकर के फैसले पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, पीठ ने यह महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाया था कि क्या किसी निष्कासित विधायक को संबंधित राजनीतिक दल की औपचारिक सहमति के बिना विपक्ष का नेता नियुक्त किया जा सकता है।

फ्लोर टेस्ट पर उठे सवाल

16 जून की सुनवाई में जस्टिस राव ने यह प्रश्न उठाया कि सदन में फ्लोर टेस्ट कराए बिना TMC की विधायी पार्टी में बहुमत वाले गुट के संबंध में निर्णय क्यों लिया गया। इस पर ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि वे फ्लोर टेस्ट के लिए पूरी तरह तैयार हैं, क्योंकि उनके अनुसार इससे स्वतः स्पष्ट हो जाएगा कि विधानसभा में TMC का कौन-सा गुट बहुमत में है।

वर्तमान स्थिति के अनुसार, 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के कुल 80 विधायक हैं। इनमें से 60 विधायक बनर्जी के नेतृत्व वाले नए गुट के साथ हैं, जबकि 20 विधायक पुराने गुट में बने हुए हैं। गौरतलब है कि यह आंतरिक विभाजन राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के लिए एक असाधारण राजनीतिक संकट का रूप ले चुका है।

इंद्रनील सेन की जमानत याचिका: क्या है मामला

इसी दिन जस्टिस जय सेनगुप्ता की एकल-पीठ पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका पर पहली सुनवाई करेगी। सेन पर वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज है।

इस महीने की शुरुआत में एक टूरिज्म कंपनी ने सेन और उनकी पत्नी के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि उन्होंने 'यूनेस्को' के नाम का अनधिकृत उपयोग करते हुए गैर-कानूनी तरीके से प्री-पूजा टिकटों की बिक्री की। इसके बाद इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी ने अग्रिम जमानत की अर्जी के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

आगे क्या होगा

दोनों मामलों में बुधवार की सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है। नेता प्रतिपक्ष विवाद में अदालत का रुख यह तय करेगा कि क्या स्पीकर के फैसले पर कोई अंतरिम रोक लगेगी, जबकि इंद्रनील सेन के मामले में यह पहली सुनवाई है, जिसमें अदालत प्रारंभिक तर्क सुनेगी। दोनों मामलों के परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति और न्यायिक प्रक्रियाओं पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल उठता है कि 'असली' TMC कौन-सी है। अदालत का यह सवाल कि फ्लोर टेस्ट के बिना बहुमत कैसे तय हुआ, स्पीकर की निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। इंद्रनील सेन का मामला दर्शाता है कि राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राज्य में जवाबदेही की माँग भी उतनी ही तेज़ है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट में नेता प्रतिपक्ष विवाद क्या है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रथिंद्र बोस ने TMC से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) के रूप में मान्यता दी, जिसे अदालत में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि पार्टी की औपचारिक सहमति के बिना निष्कासित विधायक को यह दर्जा नहीं दिया जा सकता।
ऋतब्रत बनर्जी के गुट में कितने TMC विधायक हैं?
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के कुल 80 विधायक हैं। इनमें से 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले नए गुट के साथ हैं, जबकि 20 विधायक पुराने गुट में बने हुए हैं।
इंद्रनील सेन पर क्या आरोप हैं?
पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी पर आरोप है कि उन्होंने 'यूनेस्को' के नाम का अनधिकृत उपयोग करते हुए गैर-कानूनी तरीके से प्री-पूजा टिकटों की बिक्री की। इस मामले में एक टूरिज्म कंपनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई।
फ्लोर टेस्ट को लेकर अदालत ने क्या कहा?
जस्टिस राव ने 16 जून की सुनवाई में यह प्रश्न उठाया कि सदन में फ्लोर टेस्ट कराए बिना TMC की विधायी पार्टी में बहुमत वाले गुट के बारे में निर्णय क्यों लिया गया। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि वे फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हैं।
इन दोनों मामलों में आगे क्या होने की संभावना है?
नेता प्रतिपक्ष मामले में अदालत अंतरिम राहत पर विचार कर सकती है और फ्लोर टेस्ट का आदेश दे सकती है। इंद्रनील सेन के मामले में यह पहली सुनवाई है, जिसमें अदालत प्रारंभिक तर्क सुनेगी और अग्रिम जमानत पर निर्णय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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