कलकत्ता हाईकोर्ट में आज दो अहम सुनवाई: नेता प्रतिपक्ष विवाद और इंद्रनील सेन की जमानत याचिका
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट बुधवार, 17 जून 2026 को दो महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करेगा — पहला, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका, और दूसरा, पूर्व मंत्री एवं गायक इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत अर्जी। दोनों मामले राज्य की राजनीतिक और न्यायिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं।
नेता प्रतिपक्ष विवाद: मामले की पृष्ठभूमि
याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रथिंद्र बोस के उस निर्णय को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को सदन में TMC के नए बहुमत गुट के नेता और आधिकारिक विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी थी। यह मामला इसलिए जटिल है क्योंकि बनर्जी को उनकी मूल पार्टी से निकाला जा चुका है, फिर भी उन्हें एलओपी का दर्जा दिया गया।
11 जून को जस्टिस राव की एकल-पीठ ने स्पीकर के फैसले पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, पीठ ने यह महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाया था कि क्या किसी निष्कासित विधायक को संबंधित राजनीतिक दल की औपचारिक सहमति के बिना विपक्ष का नेता नियुक्त किया जा सकता है।
फ्लोर टेस्ट पर उठे सवाल
16 जून की सुनवाई में जस्टिस राव ने यह प्रश्न उठाया कि सदन में फ्लोर टेस्ट कराए बिना TMC की विधायी पार्टी में बहुमत वाले गुट के संबंध में निर्णय क्यों लिया गया। इस पर ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि वे फ्लोर टेस्ट के लिए पूरी तरह तैयार हैं, क्योंकि उनके अनुसार इससे स्वतः स्पष्ट हो जाएगा कि विधानसभा में TMC का कौन-सा गुट बहुमत में है।
वर्तमान स्थिति के अनुसार, 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के कुल 80 विधायक हैं। इनमें से 60 विधायक बनर्जी के नेतृत्व वाले नए गुट के साथ हैं, जबकि 20 विधायक पुराने गुट में बने हुए हैं। गौरतलब है कि यह आंतरिक विभाजन राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के लिए एक असाधारण राजनीतिक संकट का रूप ले चुका है।
इंद्रनील सेन की जमानत याचिका: क्या है मामला
इसी दिन जस्टिस जय सेनगुप्ता की एकल-पीठ पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका पर पहली सुनवाई करेगी। सेन पर वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज है।
इस महीने की शुरुआत में एक टूरिज्म कंपनी ने सेन और उनकी पत्नी के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि उन्होंने 'यूनेस्को' के नाम का अनधिकृत उपयोग करते हुए गैर-कानूनी तरीके से प्री-पूजा टिकटों की बिक्री की। इसके बाद इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी ने अग्रिम जमानत की अर्जी के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
आगे क्या होगा
दोनों मामलों में बुधवार की सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है। नेता प्रतिपक्ष विवाद में अदालत का रुख यह तय करेगा कि क्या स्पीकर के फैसले पर कोई अंतरिम रोक लगेगी, जबकि इंद्रनील सेन के मामले में यह पहली सुनवाई है, जिसमें अदालत प्रारंभिक तर्क सुनेगी। दोनों मामलों के परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति और न्यायिक प्रक्रियाओं पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।