कलकत्ता हाईकोर्ट ने नगरपालिका नौकरी घोटाले में सुजीत बोस की गिरफ्तारी पर ईडी से 29 जून तक रिपोर्ट तलब की
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार, 15 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री और तीन बार के तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक सुजीत बोस की गिरफ्तारी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से 29 जून तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला पश्चिम बंगाल में नगरपालिकाओं की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े व्यापक घोटाले का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता की एकल पीठ के समक्ष सुजीत बोस की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के अंत में अदालत ने ईडी को आदेश दिया कि वह 29 जून तक गिरफ्तारी से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करे। इस मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को निर्धारित की गई है।
ईडी अधिकारियों ने पिछले महीने 10 घंटे से अधिक की लंबी पूछताछ के बाद सुजीत बोस को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पूर्व एजेंसी ने उनके घर, कार्यालय और उनके द्वारा संचालित ढाबे पर भी तलाशी ली थी।
याचिका की पृष्ठभूमि
गिरफ्तारी के बाद सुजीत बोस ने सबसे पहले अवकाशकालीन पीठ के समक्ष ईडी द्वारा दर्ज प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को रद्द करने की याचिका दाखिल की थी। हालाँकि, न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने उनकी यह याचिका खारिज करते हुए उन्हें जमानत याचिका दाखिल करने की सलाह दी। इसके बाद उनके वकील ने न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता की पीठ में जमानत याचिका दायर की, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई।
ईडी के आरोप
ईडी के अनुसार, सुजीत बोस पर दक्षिण दमदम नगरपालिका में भर्ती प्रक्रिया के दौरान अवैध रूप से नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों के नाम की सिफारिश करने का आरोप है। जाँच में कथित तौर पर लगभग 150 नौकरी चाहने वालों के नाम सामने आए हैं। एजेंसी का यह भी दावा है कि भ्रष्टाचार से अर्जित धन को कई बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया, जिनकी जाँच जारी है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में नगरपालिका भर्ती घोटाले की जाँच कई स्तरों पर चल रही है। गौरतलब है कि राज्य में स्कूल भर्ती घोटाले के बाद नगरपालिका नौकरी अनियमितताओं का यह मामला TMC सरकार के लिए एक और राजनीतिक और कानूनी दबाव का कारण बन रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के मामले सत्तारूढ़ दल के भीतर भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों की ओर इशारा करते हैं।
अदालत के इस निर्देश के बाद अब सभी की निगाहें 29 जून को ईडी की रिपोर्ट और उसके बाद 1 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस मामले की दिशा तय करेगी।