सुजीत बोस की ईडी गिरफ्तारी को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती, 29 मई को न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पॉल करेंगी सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस ने 28 मई 2026 को कलकत्ता हाई कोर्ट की एकल-न्यायाधीश अवकाश पीठ में याचिका दायर कर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को कानूनी चुनौती दी है। यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में 11 मई को हुई थी। मामले की पहली सुनवाई 29 मई को न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पॉल की पीठ के समक्ष निर्धारित है।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बार विधायक रहे सुजीत बोस हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में पराजित हो गए थे। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित हुए और ठीक सात दिन बाद, 11 मई की रात, लगभग 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद ईडी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है कि राज्य विधानसभा चुनावों से पूर्व ईडी ने उन्हें कई बार समन भेजे थे, किंतु सुजीत बोस ने व्यस्त चुनावी कार्यक्रम का हवाला देते हुए उपस्थित होने से इनकार कर दिया था।
मुख्य आरोप क्या हैं
ईडी के अनुसार, सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगरपालिका (उत्तर 24 परगना) में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए कथित तौर पर 150 अयोग्य उम्मीदवारों की सिफारिश नकद के बदले की और इससे भारी रकम अर्जित की। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी ने उनके दफ्तरों और आवास पर छापेमारी की तथा उनके एवं उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों की भी जाँच की।
रेस्तरां और संदिग्ध लेन-देन
ईडी अधिकारियों ने यह भी दावा किया है कि सुजीत बोस के स्वामित्व वाले एक रेस्तरां ने 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान करोड़ों रुपए कमाए, जबकि उस अवधि में प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद था। ईडी के वकील ने कोलकाता की एक विशेष मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) अदालत को बताया कि लॉकडाउन के दौरान रेस्तरां के खाते में ₹1.1 करोड़ तथा सुजीत बोस के निजी खाते में ₹2.2 करोड़ स्थानांतरित किए गए थे।
अदालत में याचिका
28 मई को उनके वकील ने गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए याचिका दायर की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। सुजीत बोस फिलहाल ईडी की हिरासत में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में नगरपालिका भर्ती से जुड़े कई मामले न्यायिक जाँच के दायरे में हैं।
आगे क्या होगा
29 मई को न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पॉल की एकल-न्यायाधीश अवकाश पीठ इस याचिका पर पहली सुनवाई करेगी। अदालत का निर्णय यह तय करेगा कि सुजीत बोस की हिरासत जारी रहेगी या उन्हें अंतरिम राहत मिलती है। इस मामले के नतीजे का असर राज्य में ईडी की जाँच की दिशा पर भी पड़ सकता है।