पश्चिम बंगाल नगरपालिका भर्ती घोटाला: ईडी ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस को किया गिरफ्तार, 10 दिन की हिरासत

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पश्चिम बंगाल नगरपालिका भर्ती घोटाला: ईडी ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस को किया गिरफ्तार, 10 दिन की हिरासत

सारांश

पश्चिम बंगाल के कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले में ईडी ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि नौकरी के बदले फ्लैट और करोड़ों नकद लिए गए। घोटाले का दायरा शिक्षा से नगरपालिका तक फैला है और जाँच अभी जारी है।

मुख्य बातें

ईडी ने 11 मई 2026 को पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक सुजीत बोस को पश्चिम बंगाल नगरपालिका भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया।
कोलकाता की विशेष अदालत बिचार भवन ने ईडी को 10 दिनों की हिरासत दी है।
आरोप है कि नौकरी दिलाने के बदले सुजीत बोस को कई फ्लैट मिले और करोड़ों रुपए नकद लिए गए।
छापेमारी में करीब ₹3.45 करोड़ नकद, दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण ज़ब्त किए जा चुके हैं।
जाँच कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है।
कारोबारी अयान सिल के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत पहले ही दाखिल हो चुकी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 11 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक सुजीत बोस को गिरफ्तार किया। धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 19(1) के तहत की गई इस गिरफ्तारी के बाद कोलकाता की विशेष अदालत बिचार भवन ने ईडी को 10 दिनों की हिरासत प्रदान की है।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी के अनुसार, जाँच के दौरान सुजीत बोस को कई बार पूछताछ के लिए समन भेजे गए, किंतु वे बार-बार किसी न किसी बहाने से उपस्थित होने से बचते रहे। एजेंसी का आरोप है कि पूछताछ के दौरान भी उन्होंने सहयोग नहीं किया और लगातार समय माँगते रहे।

यह जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज उस एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जो कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर दर्ज की गई थी। ईडी ने अदालत में दायर अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि पश्चिम बंगाल की विभिन्न नगरपालिकाओं में भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुईं।

आरोप: फ्लैट, नकदी और मनी लॉन्ड्रिंग

ईडी का दावा है कि जाँच में यह सामने आया है कि नौकरी दिलाने के बदले सुजीत बोस को कई फ्लैट मिले थे, जो कथित तौर पर सीधे अपराध से अर्जित संपत्ति हैं। इसके अलावा करोड़ों रुपए नकद लेने और उन्हें अपने कारोबारी उपक्रमों के ज़रिए ठिकाने लगाने के भी आरोप हैं।

इस मामले में ईडी पहले भी सुजीत बोस और पश्चिम बंगाल सरकार के पूर्व मंत्री रथिन घोष समेत कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। उन छापों के दौरान करीब ₹3.45 करोड़ नकद, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण ज़ब्त किए गए थे।

घोटाले का दायरा: शिक्षा से नगरपालिका तक

ईडी की जाँच में पहले शिक्षक भर्ती घोटाले के दौरान कारोबारी अयान सिल और अन्य लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहाँ से अहम दस्तावेज़ और डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए थे। जाँच में पता चला कि यह घोटाला केवल शिक्षकों की भर्ती तक सीमित नहीं था, बल्कि कई नगरपालिकाओं में मजदूर, स्वीपर, क्लर्क, चपरासी, एम्बुलेंस अटेंडेंट, पंप ऑपरेटर, हेल्पर और ड्राइवर जैसे पदों पर भी कथित तौर पर अवैध नियुक्तियाँ की गई थीं।

एजेंसी के अनुसार विभिन्न नगर निगमों और नगरपालिकाओं की भर्ती प्रक्रिया का ठेका एक ही कंपनी को दिया गया था, जिसके निदेशक अयान सिल थे। आरोप है कि प्रश्न पत्र छापने, ओएमआर शीट तैयार करने और मूल्यांकन की ज़िम्मेदारी सँभालने वाली इस कंपनी ने ओएमआर शीट में हेरफेर कर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति करवाई।

अयान सिल के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल

ईडी ने इस मामले में अयान सिल के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत पहले ही दाखिल कर दी है। एजेंसी का कहना है कि मामले की जाँच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल में भर्ती अनियमितताओं की उस श्रृंखला का हिस्सा है जिसकी जड़ें शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ी बताई जाती हैं। सुजीत बोस की गिरफ्तारी के साथ ईडी की जाँच का दायरा और व्यापक होने के संकेत हैं, तथा अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा कसने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुजीत बोस को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
सुजीत बोस को पश्चिम बंगाल के कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले में धन शोधन के आरोप में ईडी ने 11 मई 2026 को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि नौकरी दिलाने के बदले उन्हें फ्लैट और करोड़ों रुपए नकद मिले थे।
अदालत ने ईडी को कितने दिनों की हिरासत दी है?
कोलकाता की विशेष अदालत बिचार भवन ने ईडी को सुजीत बोस की 10 दिनों की हिरासत दी है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें इसी अदालत में पेश किया गया था।
पश्चिम बंगाल नगरपालिका भर्ती घोटाला क्या है?
यह घोटाला पश्चिम बंगाल की विभिन्न नगरपालिकाओं में भर्ती प्रक्रिया में कथित बड़े पैमाने की अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि एक ही कंपनी को भर्ती का ठेका दिया गया और ओएमआर शीट में हेरफेर कर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति करवाई गई।
इस मामले में अयान सिल की क्या भूमिका बताई जा रही है?
ईडी के अनुसार अयान सिल उस कंपनी के निदेशक थे जिसे नगरपालिकाओं की भर्ती प्रक्रिया का ठेका दिया गया था। उनके खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत पहले ही दाखिल की जा चुकी है।
यह जाँच किसके निर्देश पर शुरू हुई थी?
यह जाँच कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। बाद में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से अपनी स्वतंत्र जाँच शुरू की।
राष्ट्र प्रेस
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