कलकत्ता हाई कोर्ट: पूर्व मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका अब जस्टिस तीर्थंकर घोष की बेंच सुनेगी, 3 सितंबर को पहली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट की एक नई सिंगल-जज बेंच अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक और पश्चिम बंगाल के पूर्व फायर सर्विस मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) द्वारा दर्ज इस मामले में 3 सितंबर 2026 को पहली सुनवाई निर्धारित की गई है। यह मामला उस समय नई बेंच को सौंपा गया जब पूर्व पीठासीन न्यायाधीश ने एक गंभीर प्रक्रियागत अनियमितता का हवाला देते हुए खुद को इससे अलग कर लिया।
मामला नई बेंच को क्यों सौंपा गया
जस्टिस सुव्रा घोष ने 19 अगस्त को सुनवाई पूरी होने के बाद फ़ैसला सुनाने से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने बताया कि बोस के वकीलों में से एक उनकी अनुपस्थिति में उनके चैंबर में आया और इस मामले से संबंधित एक फाइल उनके निजी सचिव को सौंप दी। जस्टिस घोष ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और तत्काल इसकी सूचना कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती को दी।
इस असाधारण घटनाक्रम के बाद, मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय ने यह मामला जस्टिस तीर्थंकर घोष की सिंगल-जज बेंच को सौंप दिया। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायिक निष्पक्षता को लेकर संवेदनशीलता पहले से अधिक है।
सुजीत बोस पर क्या आरोप हैं
ईडी ने 11 मई 2026 को सुजीत बोस को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने साउथ दम दम म्युनिसिपैलिटी में नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के नाम गैर-कानूनी तरीके से अनुशंसित किए। ईडी ने ट्रायल कोर्ट में दावा किया कि इस सूची में पूर्व मंत्री द्वारा अनुशंसित लगभग 150 नाम शामिल थे।
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार से अर्जित धनराशि बोस और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में जमा की गई। गिरफ्तारी से पूर्व जाँच एजेंसी ने उनसे कई बार पूछताछ की थी।
सुजीत बोस का राजनीतिक परिचय
सुजीत बोस उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार TMC विधायक रहे हैं। हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार शरद्वत मुखर्जी ने पराजित किया, जो अब पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री हैं।
आगे क्या होगा
जस्टिस तीर्थंकर घोष की बेंच 3 सितंबर 2026 को जमानत याचिका पर पहली सुनवाई करेगी। इस मामले का परिणाम न केवल बोस के भविष्य को, बल्कि पश्चिम बंगाल में ईडी की जाँचों से जुड़े राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। गौरतलब है कि यह मामला उस व्यापक जाँच का हिस्सा है जो राज्य में नगरपालिका भर्ती घोटालों को लेकर चल रही है।