चिट फंड घोटाला: ईडी ने कोलकाता में APM ग्रुप के 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को कोलकाता में एक बड़े चिट फंड घोटाले के सिलसिले में छह अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई पोंजी कंपनी APM ग्रुप से जुड़े धनशोधन के आरोपों के तहत की गई, जिस पर बिना नियामक अनुमति के लोगों से करोड़ों रुपये जमा करने का आरोप है।
छापेमारी का घटनाक्रम
सूत्रों के अनुसार, ईडी अधिकारियों की एक टीम सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (CAPF) के साथ सुबह करीब 7 बजे उत्तरी कोलकाता के नारकेलडांगा इलाके में एक कारोबारी के आवास पर पहुँची। इसके बाद ईडी की पाँच और टीमों ने उत्तरी और दक्षिणी कोलकाता के पाँच अन्य ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली।
सूत्रों ने बताया कि संदिग्ध कारोबारी के आवास के अलावा उसके करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर भी यह छापेमारी की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य वित्तीय दस्तावेज़ और साक्ष्य एकत्र करना बताया जा रहा है।
APM ग्रुप और धोखाधड़ी का तरीका
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी कारोबारी ने APM ग्रुप के नाम पर निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने का वादा कर उनसे पैसे जमा कराए। ये रकम बाद में एक शेल कंपनी (केवल कागजों पर चलने वाली कंपनी) के ज़रिए अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश की गई।
जांच में सामने आया है कि ग्रुप ने मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) स्कीमों के माध्यम से बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया और इसे शेल कंपनी के ज़रिए विभिन्न क्षेत्रों में लगाया। सूत्रों के अनुसार, यह सारी रकम संबंधित नियामक प्राधिकरण से आवश्यक स्वीकृति लिए बिना जमा की गई थी।
पश्चिम बंगाल और पोंजी घोटालों का इतिहास
गौरतलब है कि 2012 से पश्चिम बंगाल पोंजी स्कीम चलाने वाली कंपनियों का केंद्र बनता आया है। इस सूची में सुदीप्तो सेन की शारदा ग्रुप और गौतम कुंडू की रोज़ वैली ग्रुप जैसे बड़े घोटाले शामिल हैं, जिन्होंने लाखों निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया।
यह ऐसे समय में आया है जब ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) लंबे समय से राज्य में ऐसी कई कंपनियों की गतिविधियों की अलग-अलग जाँच कर रहे हैं। इन मामलों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई बड़े नेताओं को कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
आगे क्या होगा
ईडी द्वारा छापेमारी में जब्त दस्तावेज़ों और डिजिटल सामग्री की जाँच के बाद आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत औपचारिक कार्रवाई की संभावना है। इस मामले में आगे की गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की भी हो सकती है। निवेशकों को न्याय मिलने की उम्मीद इस जाँच की प्रगति पर टिकी है।