16 सितंबर 2026
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चिट फंड घोटाला: ईडी ने कोलकाता में APM ग्रुप के 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की

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चिट फंड घोटाला: ईडी ने कोलकाता में APM ग्रुप के 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की

सारांश

ईडी ने बुधवार सुबह कोलकाता के 6 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा — निशाने पर है APM ग्रुप, जिस पर शेल कंपनी के ज़रिए MLM स्कीमों से जमा करोड़ों रुपये के गबन का आरोप है। 2012 के शारदा और रोज़ वैली घोटालों के बाद पश्चिम बंगाल में यह ताज़ा बड़ी जाँच कार्रवाई है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 सितंबर 2026 को कोलकाता में चिट फंड घोटाले के तहत 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
मुख्य निशाना APM ग्रुप है, जिस पर MLM स्कीमों के ज़रिए बिना नियामक अनुमति के निवेशकों से करोड़ों रुपये जमा करने का आरोप है।
जमा धन को शेल कंपनी के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश किया गया।
ईडी टीम CAPF के साथ सुबह 7 बजे उत्तरी कोलकाता के नारकेलडांगा इलाके में पहुँची।
2012 से पश्चिम बंगाल पोंजी घोटालों का केंद्र रहा है; शारदा ग्रुप और रोज़ वैली ग्रुप जैसे बड़े मामले पहले भी उजागर हो चुके हैं।
इन मामलों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं को पूर्व में गिरफ्तार किया जा चुका है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को कोलकाता में एक बड़े चिट फंड घोटाले के सिलसिले में छह अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई पोंजी कंपनी APM ग्रुप से जुड़े धनशोधन के आरोपों के तहत की गई, जिस पर बिना नियामक अनुमति के लोगों से करोड़ों रुपये जमा करने का आरोप है।

छापेमारी का घटनाक्रम

सूत्रों के अनुसार, ईडी अधिकारियों की एक टीम सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (CAPF) के साथ सुबह करीब 7 बजे उत्तरी कोलकाता के नारकेलडांगा इलाके में एक कारोबारी के आवास पर पहुँची। इसके बाद ईडी की पाँच और टीमों ने उत्तरी और दक्षिणी कोलकाता के पाँच अन्य ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली।

सूत्रों ने बताया कि संदिग्ध कारोबारी के आवास के अलावा उसके करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर भी यह छापेमारी की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य वित्तीय दस्तावेज़ और साक्ष्य एकत्र करना बताया जा रहा है।

APM ग्रुप और धोखाधड़ी का तरीका

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी कारोबारी ने APM ग्रुप के नाम पर निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने का वादा कर उनसे पैसे जमा कराए। ये रकम बाद में एक शेल कंपनी (केवल कागजों पर चलने वाली कंपनी) के ज़रिए अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश की गई।

जांच में सामने आया है कि ग्रुप ने मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) स्कीमों के माध्यम से बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया और इसे शेल कंपनी के ज़रिए विभिन्न क्षेत्रों में लगाया। सूत्रों के अनुसार, यह सारी रकम संबंधित नियामक प्राधिकरण से आवश्यक स्वीकृति लिए बिना जमा की गई थी।

पश्चिम बंगाल और पोंजी घोटालों का इतिहास

गौरतलब है कि 2012 से पश्चिम बंगाल पोंजी स्कीम चलाने वाली कंपनियों का केंद्र बनता आया है। इस सूची में सुदीप्तो सेन की शारदा ग्रुप और गौतम कुंडू की रोज़ वैली ग्रुप जैसे बड़े घोटाले शामिल हैं, जिन्होंने लाखों निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया।

यह ऐसे समय में आया है जब ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) लंबे समय से राज्य में ऐसी कई कंपनियों की गतिविधियों की अलग-अलग जाँच कर रहे हैं। इन मामलों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई बड़े नेताओं को कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

आगे क्या होगा

ईडी द्वारा छापेमारी में जब्त दस्तावेज़ों और डिजिटल सामग्री की जाँच के बाद आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत औपचारिक कार्रवाई की संभावना है। इस मामले में आगे की गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की भी हो सकती है। निवेशकों को न्याय मिलने की उम्मीद इस जाँच की प्रगति पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इससे पहले TMC नेताओं की गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं और केंद्र-राज्य के बीच टकराव की पृष्ठभूमि बनी हुई है। असली सवाल यह है कि बार-बार छापेमारी और गिरफ्तारियों के बावजूद MLM-आधारित पोंजी स्कीमें राज्य में दोबारा क्यों पनप रही हैं, और निवेशकों के धन की वापसी कितनी वास्तविकता में होती है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने कोलकाता में चिट फंड मामले में छापेमारी क्यों की?
ईडी ने पोंजी कंपनी APM ग्रुप से जुड़े धन शोधन के आरोपों की जाँच के तहत यह कार्रवाई की। इस ग्रुप पर बिना नियामक मंजूरी के निवेशकों से करोड़ों रुपये जमा कर शेल कंपनी के ज़रिए गबन करने का आरोप है।
APM ग्रुप क्या है और इसने कैसे धोखाधड़ी की?
APM ग्रुप एक कथित पोंजी कंपनी है, जिसने MLM स्कीमों के ज़रिए निवेशकों को अच्छे रिटर्न का वादा करके पैसे जमा किए। इन पैसों को एक शेल कंपनी (केवल कागजों पर चलने वाली कंपनी) के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में लगाया गया और कथित तौर पर गबन किया गया।
पश्चिम बंगाल में पोंजी घोटालों का क्या इतिहास है?
2012 से पश्चिम बंगाल पोंजी स्कीमों का केंद्र रहा है। सुदीप्तो सेन की शारदा ग्रुप और गौतम कुंडू की रोज़ वैली ग्रुप इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं, जिन्होंने लाखों निवेशकों को भारी नुकसान पहुँचाया।
इन मामलों में TMC नेताओं की क्या भूमिका रही है?
ईडी और CBI ने पूर्व में पोंजी कंपनियों से कथित संलिप्तता के आरोप में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया है। हालाँकि मौजूदा APM ग्रुप मामले में किसी राजनेता का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
इस छापेमारी के बाद आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?
जाँच में मिले दस्तावेज़ों के आधार पर ईडी PMLA के तहत गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्की कर सकती है। निवेशकों के धन की वापसी अदालती प्रक्रिया और जाँच की प्रगति पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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