आलिया भट्ट ने महेश भट्ट को बताया 'भालू जैसा नाटकीय', 'ओम का हरि' स्क्रीनिंग में शेयर किया बचपन का किस्सा
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री आलिया भट्ट ने 16 सितंबर को मुंबई में अपनी माँ सोनी राजदान की फिल्म 'ओम का हरि' की स्पेशल स्क्रीनिंग में शिरकत की और इस मौके पर अपने पिता महेश भट्ट से जुड़ा एक मज़ेदार बचपन का किस्सा साझा किया। आलिया ने महेश भट्ट को 'नाटकीय' और 'मनोरंजक' बताते हुए कहा कि उनके साथ बिताए पलों की यादें आज भी उनके ज़ेहन में ताज़ा हैं।
आलिया ने क्या सुनाया किस्सा
आलिया भट्ट ने स्क्रीनिंग के दौरान बताया कि जब वह पहली कक्षा में थीं, तब उनका स्पेलिंग टेस्ट था। उन्हें डर था कि वह 'द' (the) शब्द की स्पेलिंग भूल न जाएँ। आलिया ने कहा, 'पापा ने ये बात मेरे दिमाग में बैठाने के लिए बहुत बड़ा ड्रामा किया, ताकि मैं स्पेलिंग कभी न भूलूं। मुझे आज भी याद है कि वह उस समय एक बड़े भालू की तरह, बहुत ही नाटकीय और मनोरंजक लग रहे थे।'
यह किस्सा महेश भट्ट के उस पहलू को सामने लाता है जो अक्सर उनकी फ़िल्मी छवि के पीछे छुप जाता है — एक मज़ाकिया और भावुक पिता की भूमिका। गौरतलब है कि आलिया और महेश भट्ट के बीच का रिश्ता अक्सर मीडिया में चर्चा का विषय रहा है, और इस बार आलिया ने खुद इसे एक गर्मजोशी भरे अंदाज़ में पेश किया।
फिल्म 'ओम का हरि' की कहानी
फिल्म 'ओम का हरि' पिता और पुत्र के जटिल रिश्ते को कॉमेडी और ड्रामा के माध्यम से दर्शाती है। फिल्म में यह दिखाया गया है कि परिवार में कई बार ऐसी बातें होती हैं जिन्हें कह पाना मुश्किल होता है, फिर भी दोनों पीढ़ियाँ एक-दूसरे को समझने की कोशिश करती हैं।
फिल्म का निर्देशन हरीश व्यास ने किया है। मुख्य किरदारों में अंशुमान झा और रघुबीर यादव नज़र आएंगे, जबकि सोनी राजदान, आयशा कपूर और समता सुदीक्षा भी अहम भूमिकाओं में हैं।
निर्देशक और कलाकारों का सफर
'ओम का हरि' हरीश व्यास और अंशुमान झा की साथ में तीसरी फिल्म है। इससे पहले दोनों 'अंग्रेजी में कहते हैं' और 'हम भी अकेले-तुम भी अकेले' में साथ काम कर चुके हैं। यह फिल्म फर्स्ट रे फिल्म्स के बैनर तले बनाई गई है और सितंबर में सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है।
पिता-पुत्र के रिश्ते का सिनेमाई आईना
यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी सिनेमा में पारिवारिक रिश्तों पर केंद्रित फिल्मों की माँग बढ़ रही है। 'ओम का हरि' उसी भावनात्मक धरातल पर खड़ी है जहाँ पिता-पुत्र के प्यार और टकराव को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पर्दे पर उतारने की कोशिश की गई है। आलिया का यह किस्सा फिल्म के विषय के साथ एक स्वाभाविक तालमेल बिठाता है।