छात्र आंदोलन पर आलिया भट्ट का समर्थन, कमल हासन बोले — 'जवाब की जगह लाठियाँ देना देश की विफलता'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट और अभिनेता-राजनेता कमल हासन ने देश में जारी छात्र आंदोलन पर खुलकर अपनी राय रखी है। परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में उठी छात्रों की आवाज़ को अब मनोरंजन जगत की प्रमुख हस्तियों का भी समर्थन मिल रहा है। 23 जुलाई को सामने आई इन प्रतिक्रियाओं ने इस मुद्दे को और व्यापक चर्चा में ला दिया है।
आलिया भट्ट का छात्रों के साथ
आलिया भट्ट ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावुक नोट साझा करते हुए लिखा, 'पिछले कुछ दिनों ने मेरा दिल कई बार तोड़ा और फिर उम्मीद के साथ उसे जोड़ा। हर उस छात्र के पीछे एक सपना, परिवार की उम्मीद, वर्षों की मेहनत और त्याग की कहानी छिपी होती है।'
उन्होंने आगे लिखा, 'छात्र सिर्फ अपने लिए आवाज़ नहीं उठा रहे हैं, बल्कि वे उन लोगों की उम्मीदों का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिन्होंने उनका साथ दिया है। छात्रों का साहस समाज के सामने यह सवाल रखता है कि क्या हम वास्तव में उन लोगों की बात सुन रहे हैं, जो देश का भविष्य संभालने वाले हैं।'
कमल हासन की तीखी टिप्पणी
अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, 'हमें तब सुनना चाहिए था, जब एक बच्चा रोया था — लेकिन हमने तब तक इंतज़ार किया, जब तक बहुत सारे बच्चों की आवाज़ खामोश नहीं हो गई।'
हासन ने व्यवस्था पर और तीखा प्रहार करते हुए कहा, 'ऐसी व्यवस्था, जहाँ पढ़ाई और सीखने की जगह सिर्फ कोचिंग का दबाव बढ़ जाए, जहाँ जिज्ञासा की जगह डर पैदा हो और जहाँ योग्यता की जगह गलत तरीके आगे आने लगें, वह व्यवस्था कमज़ोर हो जाती है। जब बच्चों को जवाब देने की जगह बैरिकेड और लाठियाँ मिलती हैं, तो यह देश की विफलता है।'
वांगचुक से अनशन तोड़ने की अपील
कमल हासन ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भी अनशन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने लिखा, 'वांगचुक जी, आने वाले समय के लिए देश को आपके विवेक की ज़रूरत होगी। कृपया अपना अनशन खत्म करें।' उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, 'भारत के बच्चों, आप हमारे बीच के सबसे अच्छे इंसान हैं। आपने अपना कर्तव्य निभाया है। अब समय है कि देश आपके लिए अपना कर्तव्य निभाए। आपके सपने हमेशा हमारी कमियों से बड़े होने चाहिए।'
छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि देशभर में परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्र संगठन सड़कों पर उतरे हुए हैं। कई संगठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। यह आंदोलन ऐसे समय में और तेज़ हुआ है, जब शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पहले से ही गंभीर सवाल उठ रहे थे।
आगे क्या
मनोरंजन जगत की इन प्रतिक्रियाओं ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर और व्यापक बना दिया है। आलोचकों का कहना है कि जब तक व्यवस्थागत सुधार नहीं होते और जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक छात्रों का असंतोष कम होने की संभावना नहीं है।