वीरता पदक विजेता सैनिकों को आजीवन रेल यात्रा सुविधा, रक्षा मंत्रालय ने दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सेना पदक, नौसेना पदक और वायु सेना पदक (वीरता) से सम्मानित सैनिकों को भारतीय रेल में आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने को मंजूरी प्रदान की है। यह सुविधा न केवल वीरता पुरस्कार विजेता सैनिकों को, बल्कि उनके जीवनसाथी को भी मिलेगी, और विधवा या विधुर की स्थिति में यह लाभ पुनर्विवाह तक जारी रहेगा।
किन्हें मिलेगा लाभ
इस पहल के तहत पात्र लाभार्थियों में सेना पदक, नौसेना पदक और वायु सेना पदक (वीरता) विजेता सैनिक, उनके जीवनसाथी और विशेष परिस्थितियों में उनके माता-पिता शामिल हैं। सेना के अनुसार, उन सैनिकों के माता-पिता को भी इस योजना में शामिल किया गया है जिन्हें अविवाहित होने की स्थिति में मरणोपरांत वीरता पुरस्कार प्रदान किया गया हो।
पात्र लाभार्थी भारतीय रेल की प्रथम श्रेणी, द्वितीय वातानुकूलित श्रेणी और एसी चेयर कार में यात्रा करने के अधिकारी होंगे। यह व्यवस्था सैनिकों की सेवा और बलिदान को सीधे मान्यता देने का एक ठोस प्रयास है।
डिजिटल और कागज रहित प्रक्रिया
रक्षा मंत्रालय ने इस सुविधा को सुलभ बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल एवं कागज रहित रखा है। पात्र लाभार्थियों को भारतीय रेलवे रियायत कार्ड पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। सत्यापन और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक यात्रा पास ऑनलाइन जारी किए जाएंगे।
इन इलेक्ट्रॉनिक पास के आधार पर टिकट बुकिंग की सुविधा 1 नवंबर 2026 से भारतीय रेलवे के IRCCP वेब पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध हो जाएगी। यह डिजिटल व्यवस्था लाभार्थियों को लंबी कागजी प्रक्रियाओं और अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत देगी।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुविधा महज़ एक रेल रियायत नहीं है, बल्कि उन सैनिकों के साहस, सेवा और बलिदान के प्रति राष्ट्र की भावनात्मक स्वीकृति है। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन परिवारों ने हर विपरीत परिस्थिति में अपने सैनिकों का साथ दिया, उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना भी इस निर्णय का अभिन्न हिस्सा है।
गौरतलब है कि वीरता पुरस्कार पाने वाले सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए असाधारण साहस का परिचय दिया है और कई ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान भी दिया है।
सैनिक कल्याण की दिशा में व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार सैन्य कल्याण से जुड़ी नीतियों को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाने पर ज़ोर दे रही है। रक्षा मंत्रालय की यह पहल उन परिवारों की गरिमा और सम्मान को प्राथमिकता देने की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है जिनके सदस्यों ने राष्ट्र की रक्षा को सर्वोपरि रखा।
ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक पास की त्रि-स्तरीय व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया गया है कि पात्र लाभार्थियों को बिना किसी बाधा के इस सुविधा का लाभ मिले। 1 नवंबर 2026 की समय-सीमा के साथ यह योजना अमल में आने के करीब है।