21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पश्चिम बंगाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई: 8 ठिकानों पर छापे, ₹165 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पश्चिम बंगाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई: 8 ठिकानों पर छापे, ₹165 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

सारांश

पश्चिम बंगाल में ईडी ने एक साथ 8 ठिकानों पर छापे मारे — कोलकाता और बंगांव में। आरोप है कि सरकारी कल्याण योजनाओं का झांसा देकर करीब 20,000 लोगों से ₹165 करोड़ ऐंठे गए। TMC नेता अभिजीत बिस्वास मुख्य आरोपी, लेकिन छापे के वक्त घर से नदारद।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल में 8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
आरोप है कि सरकारी कल्याण योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर करीब 20,000 लोगों से ₹165 करोड़ की वसूली की गई।
छापेमारी के ठिकानों में 4 कोलकाता में और 4 उत्तर 24 परगना के बंगांव सब-डिवीजन में हैं।
स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिजीत बिस्वास को मुख्य आरोपी माना जा रहा है, जो छापे के समय घर पर नहीं मिले।
'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' के तहत संपत्ति जब्ती का प्रावधान लागू हो सकता है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल में वित्तीय भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े मामले की जांच के तहत आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों की मदद से की गई इस कार्रवाई में आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर करीब 20,000 लोगों से लगभग ₹165 करोड़ की अवैध वसूली की गई।

छापेमारी के ठिकाने और दायरा

सूत्रों के अनुसार, जिन आठ स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया, उनमें चार ठिकाने कोलकाता में और चार उत्तर 24 परगना जिले के बंगांव सब-डिवीजन में हैं। यह व्यापक भौगोलिक दायरा इस मामले की जटिलता और संगठित स्वरूप को दर्शाता है।

गौरतलब है कि ईडी की कई टीमों ने एक साथ इन स्थानों पर दबिश दी, जो इस जांच की गंभीरता का संकेत है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाली इस एजेंसी ने मामले की शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई का फैसला किया।

मुख्य आरोपी और उनकी अनुपस्थिति

बंगांव में स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिजीत बिस्वास के आवास पर भी छापा मारा गया। सूत्रों के मुताबिक, बिस्वास को इस भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी मामले का मुख्य आरोपी माना जा रहा है।

हालांकि, मंगलवार सुबह जब ईडी की टीम बंगांव में उनके घर पहुंची, तो वह वहां मौजूद नहीं थे। उनके परिवार ने बताया कि बिस्वास अधिकांश समय बंगांव से बाहर रहते हैं और कभी-कभी ही घर लौटते हैं। पड़ोसियों ने भी परिवार के इस बयान की पुष्टि की।

धोखाधड़ी का तरीका

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में आरोपियों ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे ऐंठे। इस तरह करीब 20,000 लोगों से लगभग ₹165 करोड़ जुटाए गए। यह मामला उन कमज़ोर तबकों को निशाना बनाता प्रतीत होता है जो सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामले केंद्रीय जांच एजेंसियों की जद में आए हैं। ईडी के अधिकारियों ने फिलहाल इस मामले में विस्तृत जानकारी देने से इनकार किया है।

कानूनी ढांचा और नया अधिनियम

हाल ही में लागू किए गए 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' में भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। यह कानून राज्य सरकार को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के संबंधित प्रावधानों के तहत ऐसे अपराधों में शामिल व्यक्तियों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार देता है।

आगे क्या होगा

ईडी की तलाशी में मिले दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मुख्य आरोपी अभिजीत बिस्वास की तलाश जारी है। यह मामला पश्चिम बंगाल में सरकारी योजनाओं से जुड़े भ्रष्टाचार पर केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता की कड़ी में एक और अध्याय जोड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 पीड़ितों का आंकड़ा बताता है कि यह कोई छोटा स्थानीय घोटाला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है — जिसकी जड़ें और शाखाएं अभी सामने आनी बाकी हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में ईडी ने किस मामले में छापेमारी की?
ईडी ने वित्तीय भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के एक मामले में 21 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के 8 ठिकानों पर छापे मारे। आरोप है कि सरकारी कल्याण योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर करीब 20,000 लोगों से ₹165 करोड़ की अवैध वसूली की गई।
अभिजीत बिस्वास कौन हैं और उनका इस मामले से क्या संबंध है?
अभिजीत बिस्वास उत्तर 24 परगना जिले के बंगांव के स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेता हैं। सूत्रों के अनुसार उन्हें इस भ्रष्टाचार मामले का मुख्य आरोपी माना जा रहा है, हालांकि छापे के समय वह अपने घर पर मौजूद नहीं थे।
ईडी ने किन-किन जगहों पर छापेमारी की?
ईडी ने कुल 8 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया — जिनमें 4 कोलकाता में और 4 उत्तर 24 परगना जिले के बंगांव सब-डिवीजन में हैं। छापेमारी में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवान भी साथ थे।
इस धोखाधड़ी में लोगों से पैसे कैसे वसूले गए?
आरोपियों ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे ऐंठे। इस तरह करीब 20,000 लोगों से लगभग ₹165 करोड़ जुटाए गए, जिसकी शिकायत मिलने के बाद ईडी ने कार्रवाई शुरू की।
इस मामले में कौन सा नया कानून लागू हो सकता है?
हाल ही में लागू 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' के तहत भ्रष्टाचार में शामिल लोगों की संपत्ति जब्त की जा सकती है। यह अधिकार भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के प्रावधानों के साथ मिलकर लागू होता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले