टीएमसी विधायक मदन मित्रा के 7 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, 125 से अधिक अवैध भर्तियों से सीधा जुड़ाव
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 13 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नगरपालिका भर्ती घोटाले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा से जुड़े 7 ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। ईडी सूत्रों के अनुसार, कोलकाता जोन की टीम ने इन स्थानों से दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य ज़ब्त किए हैं। जाँच में कथित तौर पर 125 से अधिक अवैध नियुक्तियों में मदन मित्रा की प्रत्यक्ष भूमिका सामने आई है।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी सूत्रों के मुताबिक, मदन मित्रा पर आरोप है कि उन्होंने विभिन्न नगरपालिकाओं में अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के बदले मध्यस्थों के ज़रिए नकद और सोने के रूप में रिश्वत ली। इनमें कामारहाटी नगरपालिका का नाम विशेष रूप से सामने आया है। जाँच एजेंसी अब इन ठिकानों से बरामद सामग्री की गहन पड़ताल कर रही है।
घोटाले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इस नगरपालिका भर्ती घोटाले की परतें सबसे पहले तब खुलीं, जब ईडी पश्चिम बंगाल के स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में टीएमसी से जुड़े प्रमोटर अयान शील के घर छापेमारी कर रही थी। उस कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेज़ों और सूचनाओं ने नगरपालिका स्तर पर व्यापक भ्रष्टाचार के संकेत दिए।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियाँ एक के बाद एक सत्ताधारी दल से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच कर रही हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी 'नगरपालिका नौकरियों के बदले नकद' मामले में समानांतर जाँच शुरू की है।
राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नाम सामने आए
जैसे-जैसे ईडी और सीबीआई की जाँच आगे बढ़ी, राज्य के मंत्रियों और सत्ताधारी दल के कई नेताओं के नाम कथित तौर पर इस घोटाले से जुड़ते गए। यह इस श्रृंखला की नवीनतम कड़ी है जिसमें सार्वजनिक नियुक्तियों को भ्रष्टाचार का माध्यम बताया जा रहा है।
आगे की जाँच
ईडी की टीम फिलहाल बरामद दस्तावेज़ों और डिजिटल उपकरणों का विश्लेषण कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में आगे और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सीबीआई की समानांतर जाँच भी जारी है और दोनों एजेंसियों के निष्कर्ष मिलकर इस घोटाले की पूरी तस्वीर सामने लाने में सहायक होंगे।