नगर पालिका भर्ती घोटाले में मदन मित्रा ईडी दफ्तर पहुंचे, बोले — 'भ्रष्टाचार से कोई संबंध नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी विधायक मदन मित्रा बुधवार, 29 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे कोलकाता के साल्ट लेक स्थित सेंट्रल गवर्नमेंट ऑफिस (सीजीओ) कॉम्प्लेक्स में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे। पश्चिम बंगाल की नगर पालिकाओं में कथित नकद और सोने के बदले नौकरी देने के मामले में उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था। कमरहाटी विधानसभा क्षेत्र से विधायक मित्रा ने दफ्तर में प्रवेश से पहले मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी वित्तीय अनियमितता से कोई संबंध नहीं है।
मित्रा का बयान और रुख
ईडी कार्यालय पहुंचने से पहले मदन मित्रा ने पत्रकारों से कहा कि वे जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग देने के अपने वादे को निभाने आए हैं और किसी भी तरह के वित्तीय भ्रष्टाचार से उनका कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया कि क्या ईडी के पूछताछ नोटिस के कारण उन्होंने बागी गुट में शामिल होने का फैसला किया — जैसा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल के नेताओं का दावा है।
मामले की पृष्ठभूमि
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, उत्तरी 24 परगना जिले की टीटागढ़ नगर पालिका में कथित तौर पर नकद या सोने के बदले कम से कम 125 लोगों को नौकरी दी गई थी और इसी संदर्भ में मित्रा का नाम सामने आया। गौरतलब है कि 13 जून को ईडी ने मित्रा के दो आवासों — दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर और कमारहाटी — पर छापेमारी की थी। उसी दिन कोलकाता और आसपास के सात अन्य स्थानों पर भी एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया था।
यह ऐसे समय में आया है जब पिछले हफ्ते ईडी अधिकारी मित्रा के दो बेटों और पत्नी से भी इसी मामले में पूछताछ कर चुके हैं। अक्टूबर 2025 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी नगर पालिका भर्ती अनियमितताओं के इसी मामले में मित्रा के घर पर छापा मारा था।
सीबीआई की कार्रवाई और चार्जशीट
सीबीआई ने पिछले सप्ताह कोलकाता की एक विशेष अदालत में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस और उनके बेटे के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत चार्जशीट दाखिल की। यह इस पूरे मामले में जांच की व्यापकता को दर्शाता है और संकेत देता है कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का दायरा बढ़ रहा है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि मदन मित्रा हाल तक ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाते थे, लेकिन हाल ही में वे तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट में शामिल हो गए। इस गुट का नेतृत्व पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। TMC नेताओं का आरोप है कि ईडी नोटिस के दबाव में ही मित्रा ने पाला बदला, जबकि मित्रा इस दावे को सिरे से खारिज करते हैं।
आगे क्या
ईडी की पूछताछ पूरी होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। टीटागढ़ नगर पालिका भर्ती घोटाले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है और आने वाले हफ्तों में और गिरफ्तारियाँ या समन जारी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।