ईडी का बड़ा एक्शन: पश्चिम बंगाल में PDS राशन घोटाले पर 9 ठिकानों पर छापेमारी

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ईडी का बड़ा एक्शन: पश्चिम बंगाल में PDS राशन घोटाले पर 9 ठिकानों पर छापेमारी

सारांश

पश्चिम बंगाल में PDS राशन घोटाले में ईडी ने PMLA के तहत कोलकाता, बर्धवान और हाबरा में 9 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। आरोपी निरंजन चंद्र साहा और उनके सहयोगियों पर FCI का गेहूं खुले बाजार में बेचकर करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

Key Takeaways

  • ईडी ने 25 अप्रैल 2025 को पश्चिम बंगाल में PDS राशन घोटाले के तहत 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
  • छापेमारी कोलकाता, बर्धवान और उत्तर 24 परगना के हाबरा में PMLA-2002 के तहत की गई।
  • मुख्य आरोपी निरंजन चंद्र साहा और उनके नेटवर्क से जुड़े सप्लायर व वितरक जांच के दायरे में हैं।
  • मामले की जड़ 23 अक्तूबर 2020 को बशीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर है, जो घोझाडांगा एलसीएस के सीमा शुल्क उपायुक्त की शिकायत पर दर्ज हुई थी।
  • आरोपियों ने FCI की बोरियों से सरकारी निशान हटाकर PDS गेहूं को खुले बाजार में बेचकर अपराध से अर्जित संपत्ति बनाई।
  • यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

कोलकाता, 25 अप्रैल। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) राशन घोटाले में शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कोलकाता, बर्धवान और उत्तर 24 परगना के हाबरा में 9 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम-2002 (PMLA) के तहत की गई और इसमें सप्लायरों, वितरकों तथा निर्यातकों से जुड़े परिसर शामिल रहे।

किन ठिकानों पर हुई छापेमारी?

ईडी के कोलकाता जोनल ऑफिस की विशेष टीम ने शनिवार सुबह एक साथ 9 स्थानों पर तलाशी शुरू की। ये सभी परिसर PDS घोटाले के मुख्य आरोपी निरंजन चंद्र साहा और उनसे जुड़े अन्य व्यक्तियों के हैं। हाबरा में एक प्रमुख कारोबारी के ठिकाने भी इस अभियान में शामिल थे। ईडी ने इन परिसरों से दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य जब्त किए।

मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर का इतिहास

इस पूरे मामले की नींव 23 अक्तूबर 2020 को बशीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर पर टिकी है। यह एफआईआर घोझाडांगा एलसीएस के सीमा शुल्क उपायुक्त की शिकायत पर दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित PDS गेहूं की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही है।

पश्चिम बंगाल पुलिस की इसी एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने PMLA के तहत अपनी स्वतंत्र जांच शुरू की और धीरे-धीरे घोटाले की परतें उघाड़ीं।

घोटाले का तरीका: कैसे लूटा गया गरीबों का अनाज?

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक सुनियोजित और बहुस्तरीय षड्यंत्र के तहत PDS गेहूं की हेराफेरी की। सप्लायरों, लाइसेंसधारक वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से यह अनाज अनाधिकृत माध्यमों से बेहद कम कीमतों पर खरीदा जाता था।

इसके बाद गेहूं की बड़ी मात्रा को आपूर्ति श्रृंखला से अवैध रूप से निकालकर कई गोदामों में जमा किया गया। असली पहचान छिपाने के लिए आरोपियों ने उन बोरियों को हटाया या पलटा जिन पर भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार के सरकारी निशान अंकित थे। इसके बाद उन्हीं बोरियों में दोबारा गेहूं भरकर उन्हें वैध स्टॉक के रूप में खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया गया।

इस तरह आरोपियों ने गरीब कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों का हक छीनकर अपराध से अर्जित संपत्ति (Proceeds of Crime) बनाई, जिसे बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई।

राजनीतिक संदर्भ: चुनाव के बीच ईडी की कार्रवाई के मायने

यह छापेमारी ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल गर्म है। गौरतलब है कि PDS घोटाले को लेकर विपक्षी दल पहले से ही तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। 2020 से शुरू हुई यह जांच अब तक कई आरोपियों तक पहुंच चुकी है।

यह भी उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी ईडी और सीबीआई ने बंगाल में शारदा चिटफंड, नारद स्टिंग और कोयला तस्करी जैसे मामलों में कार्रवाई की है, जो राज्य की राजनीति में केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता को दर्शाता है। आलोचकों का कहना है कि चुनावी मौसम में इस तरह की कार्रवाइयां राजनीतिक रंग लेती हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि भ्रष्टाचार की जांच कभी भी और कहीं भी होनी चाहिए।

आगे क्या होगा?

ईडी की इस छापेमारी के बाद आने वाले दिनों में निरंजन चंद्र साहा और अन्य आरोपियों को समन या गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है। जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद ईडी और अधिक संपत्तियों की कुर्की भी कर सकती है। इस मामले में PMLA के तहत विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल होने की प्रक्रिया भी तेज होने की संभावना है।

Point of View

वहां FCI के गेहूं की बोरियों से सरकारी मुहरें उखाड़कर खुले बाजार में बेचने का धंधा वर्षों से चल रहा था। ईडी की यह कार्रवाई चुनाव के ठीक बीच आई है, जो इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाती है — लेकिन यह भी सच है कि 2020 से चली आ रही जांच के नतीजे अब सामने आ रहे हैं। असली सवाल यह है कि इस नेटवर्क की राजनीतिक जड़ें कितनी गहरी हैं और क्या जांच वहां तक पहुंचेगी?
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

पश्चिम बंगाल PDS राशन घोटाले में ईडी ने कहां-कहां छापे मारे?
ईडी ने कोलकाता, बर्धवान और उत्तर 24 परगना के हाबरा में कुल 9 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। ये सभी परिसर सप्लायरों, वितरकों और आरोपी निरंजन चंद्र साहा के नेटवर्क से जुड़े हैं।
PDS राशन घोटाले में ईडी की जांच कैसे शुरू हुई?
23 अक्तूबर 2020 को बशीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने PMLA-2002 के तहत जांच शुरू की। यह एफआईआर घोझाडांगा एलसीएस के सीमा शुल्क उपायुक्त की शिकायत पर दर्ज हुई थी।
बंगाल PDS घोटाले में गेहूं की हेराफेरी कैसे की जाती थी?
आरोपियों ने FCI और राज्य सरकार के निशान वाली बोरियों को बदलकर PDS गेहूं को वैध स्टॉक के रूप में खुले बाजार में बेचा। सप्लायरों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से यह अनाज सप्लाई चेन से अवैध रूप से निकाला जाता था।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन है?
ईडी की जांच में निरंजन चंद्र साहा को इस घोटाले का मुख्य आरोपी बताया गया है। उनके अलावा कई सप्लायर, लाइसेंसधारक वितरक और बिचौलिए भी जांच के दायरे में हैं।
क्या चुनाव के दौरान ईडी की यह कार्रवाई राजनीतिक है?
यह कार्रवाई 2020 में दर्ज एफआईआर पर आधारित लंबी जांच का हिस्सा है, हालांकि विधानसभा चुनाव के बीच इसके समय को लेकर राजनीतिक बहस जरूर छिड़ी है। ईडी का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
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