तथागत रॉय की भाजपा को चेतावनी: TMC के बिखरने से सीपीआई(एम) को बंगाल में पैर न जमाने दें
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने शनिवार, 18 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आगाह किया कि हाल के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बड़ी हार से उपजे राजनीतिक शून्य का फायदा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — को नहीं उठाने देना चाहिए। रॉय ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक बयान में यह चेतावनी दी।
मुख्य बयान और चेतावनी
रॉय ने अपने बयान में कहा, 'भाजपा को यह पक्का करने के लिए सतर्क रहना होगा कि आज तृणमूल कांग्रेस के बिखरने से बने राजनीतिक खालीपन का फायदा उठाकर सीपीआई(एम) उसमें घुस न जाए। यह सीधी सी बात कि कम्युनिस्ट यानी धोखा — अभी भी हममें से कई लोगों, यानी बंगाली हिंदुओं, की समझ में नहीं आती है।' उनके अनुसार, TMC में अंदरूनी हलचल का यह दौर वामपंथी दलों के लिए राज्य में पुनः पैर जमाने का अवसर बन सकता है।
हिंदू-मुस्लिम राजनीति पर रॉय का तर्क
रॉय ने दावा किया कि हिंदू कम्युनिस्ट नेता हमेशा मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के लिए अतिरिक्त उत्सुक रहते हैं। अपनी बात को पुष्ट करने के लिए उन्होंने पश्चिम बंगाल के एक हिंदू सीपीआई(एम) नेता का उदाहरण दिया, जो कथित तौर पर बीफ खाते थे, जबकि एक प्रमुख मुस्लिम सीपीआई(एम) नेता को कभी पोर्क खाते नहीं देखा गया। यह तर्क, हालांकि विवादास्पद है, रॉय की नज़र में कम्युनिस्ट पार्टी की 'तुष्टिकरण की राजनीति' का प्रतीक है।
बुद्धदेव भट्टाचार्य का संदर्भ और मदरसा विवाद
रॉय ने पश्चिम बंगाल के अंतिम कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री, स्वर्गीय बुद्धदेव भट्टाचार्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2002 में भट्टाचार्य ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि राज्य के सीमावर्ती इलाकों के कई मदरसों में देश-विरोधी प्रचार हो रहा है। रॉय के अनुसार, 'उनके बयान सभी अखबारों में छपे थे, जिसमें सीपीआई(एम) का पार्टी मुखपत्र गणशक्ति भी शामिल था। अगले ही दिन, पार्टी नेतृत्व के दबाव में भट्टाचार्य को अपना बयान वापस लेना पड़ा।'
रॉय ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस के एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा हाल ही में नॉर्थ 24 परगना जिले के दो मदरसों में की गई छापेमारी यह साबित करती है कि उस समय भट्टाचार्य का बयान कितना सटीक था।
सीपीआई(एम) की मौजूदा स्थिति
गौरतलब है कि हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एम) को मात्र एक सीट मिली थी — जो दशकों तक राज्य पर शासन करने वाली पार्टी के लिए ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर प्रदर्शन है। तब से पार्टी नेतृत्व ने मुद्दा-आधारित आंदोलनों की राह पकड़ी है, जिसमें सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली मौजूदा पश्चिम बंगाल सरकार के तहत हॉकरों (फेरीवालों) को हटाए जाने का विरोध प्रमुख है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता-परिवर्तन के बाद TMC कमज़ोर पड़ी है और विपक्षी दल अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटे हैं। रॉय की यह चेतावनी भाजपा के भीतर उस वर्ग की सोच को उजागर करती है जो वामपंथी पुनरुत्थान को दीर्घकालिक खतरे के रूप में देखता है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि भाजपा नेतृत्व इस चेतावनी पर कोई रणनीतिक कदम उठाता है या नहीं।