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तथागत रॉय की भाजपा को चेतावनी: TMC के बिखरने से सीपीआई(एम) को बंगाल में पैर न जमाने दें

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तथागत रॉय की भाजपा को चेतावनी: TMC के बिखरने से सीपीआई(एम) को बंगाल में पैर न जमाने दें

सारांश

TMC की बड़ी हार के बाद बंगाल में राजनीतिक शून्य बन रहा है — और तथागत रॉय का मानना है कि सीपीआई(एम) इसी खालीपन में घुसने की फिराक में है। एक सीट पर सिमटी पार्टी अब हॉकर आंदोलन जैसे मुद्दों से ज़मीन तैयार कर रही है। रॉय की चेतावनी भाजपा के लिए उतनी ही अंदरूनी है जितनी बाहरी।

मुख्य बातें

तथागत रॉय ने 18 जुलाई को सोशल मीडिया पर भाजपा को आगाह किया कि TMC के बिखरने से बने राजनीतिक शून्य का फायदा सीपीआई(एम) को न उठाने दें।
रॉय ने कहा कि 'कम्युनिस्ट यानी धोखा' — यह बात अभी भी कई बंगाली हिंदुओं की समझ में नहीं आती।
हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एम) को केवल एक सीट मिली, फिर भी पार्टी मुद्दा-आधारित आंदोलनों से ज़मीन तैयार कर रही है।
रॉय ने 2002 में स्वर्गीय बुद्धदेव भट्टाचार्य के मदरसा-विरोधी बयान और उसे वापस लिए जाने का संदर्भ दिया।
उत्तर प्रदेश ATS द्वारा नॉर्थ 24 परगना के दो मदरसों में हालिया छापेमारी को रॉय ने भट्टाचार्य के बयान की पुष्टि बताया।

पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने शनिवार, 18 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आगाह किया कि हाल के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बड़ी हार से उपजे राजनीतिक शून्य का फायदा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — को नहीं उठाने देना चाहिए। रॉय ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक बयान में यह चेतावनी दी।

मुख्य बयान और चेतावनी

रॉय ने अपने बयान में कहा, 'भाजपा को यह पक्का करने के लिए सतर्क रहना होगा कि आज तृणमूल कांग्रेस के बिखरने से बने राजनीतिक खालीपन का फायदा उठाकर सीपीआई(एम) उसमें घुस न जाए। यह सीधी सी बात कि कम्युनिस्ट यानी धोखा — अभी भी हममें से कई लोगों, यानी बंगाली हिंदुओं, की समझ में नहीं आती है।' उनके अनुसार, TMC में अंदरूनी हलचल का यह दौर वामपंथी दलों के लिए राज्य में पुनः पैर जमाने का अवसर बन सकता है।

हिंदू-मुस्लिम राजनीति पर रॉय का तर्क

रॉय ने दावा किया कि हिंदू कम्युनिस्ट नेता हमेशा मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के लिए अतिरिक्त उत्सुक रहते हैं। अपनी बात को पुष्ट करने के लिए उन्होंने पश्चिम बंगाल के एक हिंदू सीपीआई(एम) नेता का उदाहरण दिया, जो कथित तौर पर बीफ खाते थे, जबकि एक प्रमुख मुस्लिम सीपीआई(एम) नेता को कभी पोर्क खाते नहीं देखा गया। यह तर्क, हालांकि विवादास्पद है, रॉय की नज़र में कम्युनिस्ट पार्टी की 'तुष्टिकरण की राजनीति' का प्रतीक है।

बुद्धदेव भट्टाचार्य का संदर्भ और मदरसा विवाद

रॉय ने पश्चिम बंगाल के अंतिम कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री, स्वर्गीय बुद्धदेव भट्टाचार्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2002 में भट्टाचार्य ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि राज्य के सीमावर्ती इलाकों के कई मदरसों में देश-विरोधी प्रचार हो रहा है। रॉय के अनुसार, 'उनके बयान सभी अखबारों में छपे थे, जिसमें सीपीआई(एम) का पार्टी मुखपत्र गणशक्ति भी शामिल था। अगले ही दिन, पार्टी नेतृत्व के दबाव में भट्टाचार्य को अपना बयान वापस लेना पड़ा।'

रॉय ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस के एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा हाल ही में नॉर्थ 24 परगना जिले के दो मदरसों में की गई छापेमारी यह साबित करती है कि उस समय भट्टाचार्य का बयान कितना सटीक था।

सीपीआई(एम) की मौजूदा स्थिति

गौरतलब है कि हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एम) को मात्र एक सीट मिली थी — जो दशकों तक राज्य पर शासन करने वाली पार्टी के लिए ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर प्रदर्शन है। तब से पार्टी नेतृत्व ने मुद्दा-आधारित आंदोलनों की राह पकड़ी है, जिसमें सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली मौजूदा पश्चिम बंगाल सरकार के तहत हॉकरों (फेरीवालों) को हटाए जाने का विरोध प्रमुख है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता-परिवर्तन के बाद TMC कमज़ोर पड़ी है और विपक्षी दल अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटे हैं। रॉय की यह चेतावनी भाजपा के भीतर उस वर्ग की सोच को उजागर करती है जो वामपंथी पुनरुत्थान को दीर्घकालिक खतरे के रूप में देखता है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि भाजपा नेतृत्व इस चेतावनी पर कोई रणनीतिक कदम उठाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भाजपा की अपनी रणनीतिक चूक पर भी इशारा है — एक सीट पर सिमटी सीपीआई(एम) को 'खतरा' बताना तभी तार्किक है जब भाजपा खुद TMC के बाद की राजनीतिक ज़मीन पर मज़बूत पकड़ नहीं बना पाई हो। रॉय का बुद्धदेव भट्टाचार्य वाला संदर्भ दिलचस्प है — यह दर्शाता है कि कम्युनिस्ट शासन में भी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर आंतरिक दबाव था, जिसे पार्टी ने दबाया। आलोचकों का कहना है कि रॉय का यह बयान विधानसभा परिणामों के बाद भाजपा के भीतर चल रही आत्ममंथन की प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि कोई ठोस रणनीतिक रोडमैप।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तथागत रॉय ने भाजपा को किस बात की चेतावनी दी?
तथागत रॉय ने भाजपा को आगाह किया कि TMC की हार से बने राजनीतिक शून्य का फायदा सीपीआई(एम) को न उठाने दिया जाए। उनका कहना था कि 'कम्युनिस्ट यानी धोखा' — यह सच्चाई अभी भी कई बंगाली हिंदुओं को समझ नहीं आती।
हाल के विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एम) का प्रदर्शन कैसा रहा?
हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एम) को केवल एक सीट मिली, जो दशकों तक राज्य पर शासन करने वाली पार्टी के लिए ऐतिहासिक रूप से निराशाजनक प्रदर्शन है। इसके बावजूद पार्टी हॉकरों को हटाए जाने जैसे मुद्दों पर आंदोलन के ज़रिए ज़मीन तैयार कर रही है।
बुद्धदेव भट्टाचार्य का 2002 का मदरसा बयान क्या था?
2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा था कि राज्य के सीमावर्ती इलाकों के कई मदरसों में देश-विरोधी प्रचार हो रहा है। यह बयान सभी प्रमुख अखबारों और सीपीआई(एम) के मुखपत्र 'गणशक्ति' में छपा, लेकिन पार्टी नेतृत्व के दबाव में अगले दिन वापस ले लिया गया।
नॉर्थ 24 परगना के मदरसों में ATS छापेमारी से क्या संबंध है?
तथागत रॉय ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश ATS द्वारा नॉर्थ 24 परगना जिले के दो मदरसों में हाल ही में की गई छापेमारी यह साबित करती है कि 2002 में बुद्धदेव भट्टाचार्य का बयान सही था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
पश्चिम बंगाल में TMC की हार के बाद राजनीतिक स्थिति क्या है?
हाल के विधानसभा चुनाव में TMC की बड़ी हार के बाद पार्टी में अंदरूनी हलचल बताई जा रही है। इस राजनीतिक शून्य में भाजपा और सीपीआई(एम) दोनों अपनी-अपनी ज़मीन मज़बूत करने की कोशिश में हैं, और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार सत्ता में है।
राष्ट्र प्रेस
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