सौगत रॉय का स्पष्ट इनकार: 'भाजपा में जाना धर्मनिरपेक्षता से समझौता', बागी सांसदों की टीएमसी वापसी संभव
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने 1 अगस्त को कोलकाता में स्पष्ट किया कि कुछ सांसदों ने उनसे बातचीत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने से इनकार किया है। उनके अनुसार, इन सांसदों का मानना है कि भाजपा में जाना धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के साथ सीधा समझौता होगा। वहीं, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
बागी सांसदों की वापसी और टीएमसी का रुख
सौगत रॉय ने बताया कि उन्होंने कुछ सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की है जो भाजपा में सहज महसूस नहीं कर रहे। उनके अनुसार, संभव है कि इन सांसदों पर वहाँ बने रहने के लिए दबाव या धमकी हो। रॉय ने कहा कि यदि ये नेता टीएमसी में वापस लौटते हैं, तो यह एक सकारात्मक राजनीतिक घटनाक्रम होगा और पार्टी नेतृत्व से इस विषय पर चर्चा भी हो चुकी है।
गौरतलब है कि टीएमसी और भाजपा के बीच बंगाल की राजनीति में लंबे समय से तीखी प्रतिस्पर्धा रही है और दलबदल का यह सिलसिला नया नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ दोनों दलों में जोर पकड़ रही हैं।
तसलीमा नसरीन की कोलकाता वापसी पर प्रतिक्रिया
प्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन की कोलकाता वापसी पर सौगत रॉय ने कहा कि यह सभी के लिए खुशी की बात है। उन्होंने नसरीन को एक अच्छी कवयित्री और लेखिका बताते हुए स्पष्ट किया कि उनकी वापसी में किसी प्रकार की राजनीति नहीं है।
कमर्शियल एलपीजी मूल्य कटौती पर विपक्ष की मिली-जुली प्रतिक्रिया
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया कटौती पर सौगत रॉय ने कहा कि एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से आम लोग लंबे समय से परेशान हैं। यदि सरकार इस दिशा में कदम उठाती है, तो यह स्वागतयोग्य होगा।
वहीं, इमरान मसूद ने इस राहत को अपर्याप्त करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले कीमतें लगभग ₹1,000 तक बढ़ाईं और अब केवल ₹200 की कमी कर इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है, जिससे आम जनता को वास्तविक राहत नहीं मिलेगी।
संसद में हंगामे पर इमरान मसूद का हमला
इमरान मसूद ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बोलने के दौरान हुए हंगामे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सच्चाई से बचना चाहती है और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। मसूद ने यह भी कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कथित तौर पर उनके साथ कठोर कार्रवाई क्यों की गई।
बसपा के रुख पर मसूद की टिप्पणी
बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इमरान मसूद ने कहा कि बसपा का ऐसा रुख नया नहीं है और पार्टी पहले भी इस तरह के राजनीतिक फैसले लेती रही है। उन्होंने इसे बसपा की स्थापित राजनीतिक शैली का हिस्सा बताया। आने वाले दिनों में इन राजनीतिक घटनाक्रमों का असर विपक्षी एकजुटता और संसदीय रणनीति दोनों पर पड़ सकता है।