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टीएमसी-कांग्रेस विलय की अफवाहों पर ऋतब्रत बनर्जी का खंडन: '64 विधायक नहीं जाएंगे कांग्रेस के साथ'

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टीएमसी-कांग्रेस विलय की अफवाहों पर ऋतब्रत बनर्जी का खंडन: '64 विधायक नहीं जाएंगे कांग्रेस के साथ'

सारांश

ममता बनर्जी की दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद विलय की अटकलें तेज हुईं, लेकिन टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने साफ कह दिया — 64 विधायक, 20 लोकसभा सांसद और नगरपालिकाएँ कांग्रेस के साथ नहीं जाएंगी। पार्टी के भीतर नेतृत्व शैली को लेकर गहरा असंतोष भी सामने आया।

मुख्य बातें

टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने 10 जून 2026 को टीएमसी-कांग्रेस विलय की अटकलों को सिरे से खारिज किया।
उनके अनुसार टीएमसी के 64 विधायक और लोकसभा के 20 सांसद कांग्रेस के साथ नहीं जाएंगे।
राज्यसभा के कुछ सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं और आगे भी इस्तीफे संभव बताए जा रहे हैं।
ऋतब्रत ने पार्टी में पंद्रह महीनों से चले आ रहे संगठनात्मक असंतोष और नेतृत्व शैली पर सवाल उठाए।
यह बयान ममता बनर्जी की नई दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद उठी विलय की चर्चाओं के बीच आया।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने 10 जून 2026 को स्पष्ट किया कि पार्टी का कांग्रेस में विलय या उसके साथ जाने का कोई सवाल ही नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया जब टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की नई दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के बाद दोनों दलों के संभावित गठजोड़ को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई थीं। ऋतब्रत ने दावा किया कि टीएमसी के पास फिलहाल 64 विधायक हैं और यह संख्या आगे और बढ़ेगी।

ऋतब्रत बनर्जी का सीधा बयान

ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, 'हम लोग तो नहीं जा रहे हैं, तो कौन जा रहा है? लोकसभा के बीस सांसद नहीं जा रहे हैं। राज्यसभा के कुछ सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं और और भी इस्तीफा देंगे। 64 विधायक भी कांग्रेस के साथ नहीं जा रहे हैं। जहाँ तक मुझे मालूम है, नगरपालिकाएँ भी नहीं जाएंगी, जिला परिषद भी नहीं जाएगा। तो फिर कौन जाएगा? हम लोग कांग्रेस के साथ जाने का कोई सवाल ही नहीं है।' यह बयान विलय की अटकलों पर सीधा विराम लगाने की कोशिश है।

पार्टी के भीतर असंतोष की तस्वीर

ऋतब्रत ने यह भी माना कि टीएमसी में संगठनात्मक स्तर पर गंभीर समस्याएँ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नेतृत्व के कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता नाराज हैं। उनके अनुसार, 'कुछ लोग खुद को मास्टर और बाकी को स्लेव समझते हैं,' जिससे पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और लोग इस स्थिति से छुटकारा पाना चाहते हैं।

पंद्रह महीनों का अनुभव और आंतरिक संकट

ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि पिछले पंद्रह महीनों में उन्होंने पार्टी के भीतर कई तरह की समस्याएँ देखी हैं। उन्होंने इसे नेतृत्व शैली और संगठनात्मक ढाँचे की खामियों से जुड़ा बताया। राज्यसभा सदस्यों के इस्तीफों का सिलसिला और आंतरिक असंतोष इस बात का संकेत है कि टीएमसी के भीतर अंदरूनी दरारें गहरी हो रही हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह

गौरतलब है कि ममता बनर्जी की दिल्ली यात्रा और कांग्रेस नेताओं से मुलाकात को विपक्षी एकता की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था। ऋतब्रत के बयान से स्पष्ट है कि टीएमसी के एक बड़े धड़े में इस विचार को लेकर कोई उत्साह नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू होने लगी हैं और हर दल अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है। टीएमसी का अगला कदम क्या होगा, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि टीएमसी के भीतर उबलते असंतोष की सार्वजनिक स्वीकृति है। 'मास्टर और स्लेव' जैसी भाषा संगठनात्मक लोकतंत्र की गहरी कमी की ओर इशारा करती है। विपक्षी एकता की बात करते हुए कांग्रेस और टीएमसी दोनों यह नजरअंदाज करते हैं कि जमीनी कार्यकर्ताओं और विधायकों का विश्वास जीते बिना कोई भी गठजोड़ टिकाऊ नहीं होगा। पश्चिम बंगाल में चुनावी दाँव ऊँचे हैं — और यह आंतरिक विद्रोह ममता के उस नैरेटिव को कमजोर करता है जिसमें वे खुद को अकेली विपक्षी धुरी के रूप में पेश करती हैं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी और कांग्रेस के विलय की अटकलें क्यों उठीं?
ममता बनर्जी की नई दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के बाद दोनों दलों के संभावित गठजोड़ या विलय की चर्चाएँ तेज हो गईं। इस मुलाकात को विपक्षी एकता की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था।
ऋतब्रत बनर्जी ने विलय पर क्या कहा?
ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि टीएमसी के 64 विधायक, लोकसभा के 20 सांसद, नगरपालिकाएँ और जिला परिषद — कोई भी कांग्रेस के साथ नहीं जाएगा। उनके अनुसार विलय का सवाल ही नहीं उठता।
टीएमसी के भीतर असंतोष की वजह क्या है?
ऋतब्रत बनर्जी के अनुसार पार्टी में पिछले पंद्रह महीनों से नेतृत्व शैली और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर गहरा असंतोष है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता अन्य सदस्यों के साथ सही व्यवहार नहीं करते।
राज्यसभा सदस्यों के इस्तीफों का क्या मामला है?
ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि टीएमसी के राज्यसभा के कुछ सदस्य पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं और आने वाले समय में और भी इस्तीफे हो सकते हैं। उन्होंने इसे पार्टी के आंतरिक संकट का हिस्सा बताया।
इस विवाद का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर होगा?
टीएमसी के भीतर यह आंतरिक विद्रोह पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठने से विपक्षी दलों को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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