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ममता बनर्जी TMC-कांग्रेस विलय की अटकलों के बीच अकेले कोलकाता लौटीं, अभिषेक दिल्ली में

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ममता बनर्जी TMC-कांग्रेस विलय की अटकलों के बीच अकेले कोलकाता लौटीं, अभिषेक दिल्ली में

सारांश

ममता बनर्जी की सोनिया गांधी से और अभिषेक बनर्जी की राहुल गांधी से अलग-अलग मुलाकातों के बाद TMC-कांग्रेस विलय की अटकलें तेज़ हो गई हैं। लेकिन ममता हवाई अड्डे पर चुप रहीं, बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने विलय से इनकार किया, और राज्य कांग्रेस ने कड़ी शर्तें रख दीं।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी बुधवार, 10 जून को नई दिल्ली से कोलकाता लौटीं; भतीजे अभिषेक बनर्जी दिल्ली में रुके।
मंगलवार को ममता की सोनिया गांधी से और बुधवार को अभिषेक की राहुल गांधी से अलग बैठक के बाद विलय की अटकलें तेज़।
TMC बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने विलय की संभावना से स्पष्ट इनकार किया; गुट की विधायक संख्या 58 से बढ़कर 64 हुई।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने दो शर्तें रखीं — राहुल गांधी को सर्वोच्च नेता माना जाए और कांग्रेस को कानूनी ढाल न बनाया जाए।
ममता बनर्जी ने 1 जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर TMC की स्थापना की थी।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के संभावित पुनर्विलय की अटकलों के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार, 10 जून को नई दिल्ली से कोलकाता लौट आईं, जबकि उनके भतीजे और TMC नेता अभिषेक बनर्जी राजधानी में ही रुके रहे। दोनों नेताओं की दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से अलग-अलग मुलाकातों के बाद यह अटकलें और तेज़ हो गई हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार को ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की, जबकि बुधवार को अभिषेक बनर्जी ने नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से अलग से बैठक की। इन दो उच्चस्तरीय बैठकों ने TMC के कांग्रेस में पुनर्विलय की संभावना को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा को हवा दी।

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों ने ममता बनर्जी से विलय की संभावना पर सवाल पूछे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री बिना कोई बयान दिए जल्दी से अपनी गाड़ी में बैठकर वहाँ से रवाना हो गईं।

ऋतब्रत बनर्जी का स्पष्ट इनकार

पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC विधायक दल के नवगठित बहुमत वाले गुट के नेता और सदन में विपक्ष के आधिकारिक नेता ऋतब्रत बनर्जी ने किसी भी विलय की संभावना को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'हमारा गुट पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य तृणमूल कांग्रेस है। हमने 58 विधायकों के साथ शुरुआत की थी, और आज यह संख्या 64 है। मैंने सुना है कि TMC के 28 लोकसभा सदस्यों में से अधिकांश अब बागी गुट में हैं। हम मुख्य तृणमूल कांग्रेस हैं, इसलिए हमारी पार्टी के कांग्रेस में विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता।'

राज्य कांग्रेस की शर्तें

पश्चिम बंगाल में राज्य कांग्रेस नेताओं ने भी इस संभावना पर संशय जताया। पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने दो प्रमुख शर्तें गिनाईं। उन्होंने कहा कि पहली शर्त यह है कि कांग्रेस में वापस आने वाले किसी भी नेता को राहुल गांधी को अपना सर्वोच्च नेता स्वीकार करना होगा। दूसरी शर्त यह है कि यदि कोई भ्रष्टाचार के पुराने मामलों में कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए कांग्रेस को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की सोच रहा है, तो यह स्वीकार्य नहीं होगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने 1 जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व पर पश्चिम बंगाल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन संगठित करने में अनिच्छा का आरोप लगाया था। यह ऐसे समय में आया है जब TMC आंतरिक विभाजन के दौर से गुज़र रही है और विधानसभा में बागी गुट की संख्या लगातार बढ़ रही है।

आगे क्या होगा

अभिषेक बनर्जी के दिल्ली में रुके होने और दोनों पक्षों की बैठकों के जारी रहने के संकेतों के बीच राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, TMC के भीतर बागी गुट की बढ़ती ताकत और आगामी चुनावी समीकरण इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि TMC के भीतर बागी गुट पहले से ही खुद को 'असली TMC' घोषित कर चुका है। कांग्रेस की शर्तें — राहुल गांधी की सर्वोच्चता और भ्रष्टाचार के मामलों में ढाल न बनने देना — दरअसल विलय के दरवाज़े को व्यावहारिक रूप से बंद करने जैसी हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि विलय की बातचीत से TMC के अंदर की दरार और गहरी हो सकती है, जो ममता के लिए दिल्ली में कांग्रेस से दोस्ती से कहीं बड़ा राजनीतिक जोखिम है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TMC और कांग्रेस के विलय की अटकलें क्यों तेज़ हुईं?
मंगलवार को ममता बनर्जी की सोनिया गांधी से और बुधवार को अभिषेक बनर्जी की राहुल गांधी से अलग-अलग बैठकों के बाद यह अटकलें तेज़ हुईं। ममता के कोलकाता लौटने पर मीडिया के सवालों पर उनकी चुप्पी ने अनिश्चितता और बढ़ा दी।
ममता बनर्जी ने TMC की स्थापना कब और क्यों की थी?
ममता बनर्जी ने 1 जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर पश्चिम बंगाल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन संगठित करने में अनिच्छा का आरोप लगाया था।
ऋतब्रत बनर्जी ने विलय पर क्या कहा?
ऋतब्रत बनर्जी, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के बागी बहुमत गुट के नेता हैं, ने विलय की किसी भी संभावना से स्पष्ट इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनका गुट ही मुख्य TMC है और उसकी विधायक संख्या 58 से बढ़कर 64 हो चुकी है।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने विलय के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने दो शर्तें रखीं — कांग्रेस में वापस आने वाले को राहुल गांधी को सर्वोच्च नेता मानना होगा, और कांग्रेस को भ्रष्टाचार के मामलों में कानूनी ढाल के रूप में इस्तेमाल करना स्वीकार्य नहीं होगा।
अभिषेक बनर्जी अभी भी दिल्ली में क्यों हैं?
ममता बनर्जी के कोलकाता लौटने के बाद भी अभिषेक बनर्जी नई दिल्ली में रुके हुए हैं। बुधवार को उनकी राहुल गांधी से अलग बैठक हुई, और कथित तौर पर राजनीतिक बातचीत अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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