TMC के 2 बागी सांसद और विधायक CM सुवेंदु अधिकारी की कोलाघाट समीक्षा बैठक में शामिल
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में 9 जून 2026 को पूर्वी मिदनापुर जिले के कोलाघाट में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो बागी लोकसभा सांसदों और एक विधायक ने भाग लिया। यह बैठक पूर्वी मिदनापुर, पश्चिमी मिदनापुर और झाड़ग्राम जिलों के प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
बैठक में शामिल होने वाले दो लोकसभा सदस्यों में घाटाल से TMC सांसद दीपक अधिकारी उर्फ देव — जो अभिनेता से राजनेता बने हैं — और मेदिनीपुर से TMC सांसद जून मालिया — जो अभिनेत्री से राजनेता बनी हैं — शामिल थे। घाटाल और मेदिनीपुर दोनों निर्वाचन क्षेत्र पश्चिमी मिदनापुर जिले में आते हैं। TMC विधायक शिउली साहा भी इस बैठक में उपस्थित रहीं।
TMC में बगावत की पृष्ठभूमि
देव और मालिया उन 20 TMC लोकसभा सदस्यों में शामिल हैं जिन्होंने अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को मानने से इनकार कर दिया है। इस बागी गुट का नेतृत्व वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय कर रहे हैं। यह बगावत ऐसे समय में सामने आई है जब TMC पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर हो चुकी है और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर तनाव गहरा है।
विपक्षी प्रतिनिधियों को आमंत्रण की परंपरा
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों सहित सभी निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को प्रशासनिक समीक्षा बैठकों में आमंत्रित करने की परंपरा स्थापित की है। उनका तर्क है कि जिला प्रशासन और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच समन्वय — चाहे वे सत्तारूढ़ दल के हों या विपक्षी — सुचारू शासन के लिए अनिवार्य है।
ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह परंपरा नई नहीं है। 1977 से 2011 तक वाम मोर्चा के 34 वर्षीय शासनकाल के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य भी विपक्षी प्रतिनिधियों को इसी तरह बैठकों में शामिल करते थे। हालाँकि, 2011 से 2026 तक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC के 15 वर्षीय शासनकाल के दौरान इस प्रथा को बंद कर दिया गया था। अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार ने इस व्यवस्था को पुनर्जीवित किया है।
आगे क्या
TMC के बागी सांसदों का BJP सरकार की बैठकों में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई समीकरणों का संकेत देता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि TMC नेतृत्व इन बागी सदस्यों के खिलाफ क्या रुख अपनाता है।