26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

TMC के 2 बागी सांसद और विधायक CM सुवेंदु अधिकारी की कोलाघाट समीक्षा बैठक में शामिल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
TMC के 2 बागी सांसद और विधायक CM सुवेंदु अधिकारी की कोलाघाट समीक्षा बैठक में शामिल

सारांश

TMC के 20 बागी सांसदों में शामिल देव और जून मालिया का CM सुवेंदु अधिकारी की सरकारी बैठक में शामिल होना बंगाल की बदलती राजनीतिक धारा का संकेत है — और उस परंपरा की वापसी जिसे ममता बनर्जी ने 15 साल पहले बंद किया था।

मुख्य बातें

TMC के बागी सांसद दीपक अधिकारी (देव) और जून मालिया तथा विधायक शिउली साहा ने 9 जून 2026 को कोलाघाट में CM सुवेंदु अधिकारी की बैठक में भाग लिया।
बैठक में पूर्वी मिदनापुर , पश्चिमी मिदनापुर और झाड़ग्राम जिलों के प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा की गई।
देव और मालिया उन 20 TMC सांसदों के बागी गुट में हैं जिन्होंने अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व मानने से इनकार किया है।
विपक्षी प्रतिनिधियों को बैठकों में आमंत्रित करने की यह परंपरा 2011 में TMC सरकार ने बंद की थी; BJP ने इसे पुनर्जीवित किया है।
यह प्रथा 1977-2011 के वाम मोर्चा शासन में ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य के समय से चली आ रही थी।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में 9 जून 2026 को पूर्वी मिदनापुर जिले के कोलाघाट में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो बागी लोकसभा सांसदों और एक विधायक ने भाग लिया। यह बैठक पूर्वी मिदनापुर, पश्चिमी मिदनापुर और झाड़ग्राम जिलों के प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

बैठक में शामिल होने वाले दो लोकसभा सदस्यों में घाटाल से TMC सांसद दीपक अधिकारी उर्फ देव — जो अभिनेता से राजनेता बने हैं — और मेदिनीपुर से TMC सांसद जून मालिया — जो अभिनेत्री से राजनेता बनी हैं — शामिल थे। घाटाल और मेदिनीपुर दोनों निर्वाचन क्षेत्र पश्चिमी मिदनापुर जिले में आते हैं। TMC विधायक शिउली साहा भी इस बैठक में उपस्थित रहीं।

TMC में बगावत की पृष्ठभूमि

देव और मालिया उन 20 TMC लोकसभा सदस्यों में शामिल हैं जिन्होंने अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को मानने से इनकार कर दिया है। इस बागी गुट का नेतृत्व वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय कर रहे हैं। यह बगावत ऐसे समय में सामने आई है जब TMC पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर हो चुकी है और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर तनाव गहरा है।

विपक्षी प्रतिनिधियों को आमंत्रण की परंपरा

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों सहित सभी निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को प्रशासनिक समीक्षा बैठकों में आमंत्रित करने की परंपरा स्थापित की है। उनका तर्क है कि जिला प्रशासन और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच समन्वय — चाहे वे सत्तारूढ़ दल के हों या विपक्षी — सुचारू शासन के लिए अनिवार्य है।

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि यह परंपरा नई नहीं है। 1977 से 2011 तक वाम मोर्चा के 34 वर्षीय शासनकाल के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य भी विपक्षी प्रतिनिधियों को इसी तरह बैठकों में शामिल करते थे। हालाँकि, 2011 से 2026 तक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC के 15 वर्षीय शासनकाल के दौरान इस प्रथा को बंद कर दिया गया था। अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार ने इस व्यवस्था को पुनर्जीवित किया है।

आगे क्या

TMC के बागी सांसदों का BJP सरकार की बैठकों में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई समीकरणों का संकेत देता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि TMC नेतृत्व इन बागी सदस्यों के खिलाफ क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह बगावत पार्टी के भीतर एक नई सौदेबाजी की शुरुआत है। अधिकारी की 'सर्वदलीय समन्वय' की रणनीति राजनीतिक रूप से चतुर है — यह विपक्ष को विभाजित करती है और BJP को 'सबका साथ' की छवि देती है, ठीक वैसे जैसे वाम मोर्चे ने दशकों तक किया था।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलाघाट की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में कौन-कौन TMC नेता शामिल हुए?
बैठक में TMC सांसद दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया और विधायक शिउली साहा शामिल हुए। ये तीनों TMC के बागी धड़े से हैं जिसने अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को मानने से इनकार किया है।
सुवेंदु अधिकारी विपक्षी सांसदों को बैठकों में क्यों बुलाते हैं?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का तर्क है कि जिला प्रशासन के सुचारू संचालन के लिए सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों — चाहे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के — का समन्वय जरूरी है। यह परंपरा 1977-2011 के वाम मोर्चा शासन में भी अपनाई जाती थी।
TMC के 20 बागी सांसदों का नेतृत्व कौन कर रहा है?
TMC के बागी गुट का नेतृत्व वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय कर रहे हैं। इस गुट ने अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व मानने से इनकार कर दिया है।
क्या पहले भी विपक्षी नेताओं को बंगाल में सरकारी बैठकों में बुलाया जाता था?
हाँ, 1977 से 2011 तक वाम मोर्चा के शासन में मुख्यमंत्री ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य यह परंपरा निभाते थे। 2011 से 2026 तक ममता बनर्जी की TMC सरकार ने इसे बंद कर दिया था, जिसे अब BJP सरकार ने पुनर्जीवित किया है।
इस बैठक में किन जिलों के प्रशासन की समीक्षा हुई?
9 जून 2026 को कोलाघाट में हुई बैठक में पूर्वी मिदनापुर, पश्चिमी मिदनापुर और झाड़ग्राम जिलों के प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा की गई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले