पश्चिम बंगाल: सीएम सुवेंदु अधिकारी की सिलीगुड़ी बैठक में टीएमसी के 14 विधायकों को न्योता, 15 साल बाद लौटी लोकतांत्रिक परंपरा

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पश्चिम बंगाल: सीएम सुवेंदु अधिकारी की सिलीगुड़ी बैठक में टीएमसी के 14 विधायकों को न्योता, 15 साल बाद लौटी लोकतांत्रिक परंपरा

सारांश

पश्चिम बंगाल में BJP सरकार ने 15 साल बाद वह परंपरा बहाल की जो ममता बनर्जी के शासन में बंद हो गई थी — विपक्षी विधायकों को सरकारी बैठक में आमंत्रण। सीएम अधिकारी की सिलीगुड़ी समीक्षा बैठक में TMC के 14 विधायकों को न्योता, लोकतांत्रिक शिष्टाचार का स्पष्ट संदेश।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सिलीगुड़ी प्रशासनिक समीक्षा बैठक में TMC के 14 विधायकों को आमंत्रित किया गया।
उत्तरी बंगाल के 8 जिलों से TMC विधायक आमंत्रित — मालदा से सर्वाधिक 6 , उत्तरी दिनाजपुर से 5 ।
ममता बनर्जी के 2011–2026 के 15 वर्षीय कार्यकाल में विपक्षी विधायकों को कोई निमंत्रण नहीं दिया गया था।
वामपंथी मुख्यमंत्रियों ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य के समय यह परंपरा नियमित रूप से निभाई जाती थी।
BSF अधिकारियों के साथ बैठक में बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तार लगाने की प्रक्रिया की समीक्षा होगी।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में सिलीगुड़ी में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में उत्तरी बंगाल के आठ जिलों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 14 विधायकों को आमंत्रित किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने 20 मई 2026 को यह न्योता भेजा, जिसे राजनीतिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक परंपरा की पुनर्स्थापना के रूप में देखा जा रहा है।

क्यों भेजा गया विपक्षी विधायकों को निमंत्रण

CMO के एक अधिकारी ने बताया, 'तृणमूल कांग्रेस राज्य की एकमात्र विपक्षी पार्टी है जिसके उत्तरी बंगाल के आठ जिलों से चुने हुए विधायक हैं। इसलिए मुख्यमंत्री कार्यालय से TMC के सभी 14 विधायकों को बैठक में शामिल होने का न्योता भेजा गया है।'

जानकारी के अनुसार यह निमंत्रण मुख्यमंत्री अधिकारी के विशेष आग्रह पर भेजा गया। उनका उद्देश्य यह मिसाल कायम करना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसेवा के मामलों में विपक्षी विधायकों को शामिल करना और उनसे सुझाव लेना एक आवश्यक परंपरा है।

ममता बनर्जी के कार्यकाल से तुलना

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम के ज़रिए अधिकारी अपनी पूर्ववर्ती ममता बनर्जी को भी परोक्ष संदेश देना चाहते हैं। ममता बनर्जी के 2011 से 2026 तक के 15 वर्षीय कार्यकाल में किसी भी सरकारी कार्यक्रम में विपक्षी दल के एक भी विधायक को आमंत्रित नहीं किया गया था।

गौरतलब है कि इससे पहले वामपंथी शासन में दिवंगत मुख्यमंत्री ज्योति बसु और दिवंगत बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल में सरकारी कार्यक्रमों में विपक्षी विधायकों को आमंत्रित करने की परंपरा नियमित रूप से निभाई जाती थी। TMC के डेढ़ दशक के शासन में यह परंपरा पूरी तरह बंद हो गई थी। अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार इसे पुनर्जीवित कर रही है।

उत्तरी बंगाल में TMC विधायकों का जिलेवार वितरण

उत्तरी बंगाल के आठ जिलों से TMC के 14 विधायकों का वितरण इस प्रकार है — कूचबिहार से 1, उत्तरी दिनाजपुर से 5, दक्षिणी दिनाजपुर से 2 और मालदा से 6। वहीं, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों से TMC का कोई भी विधायक नहीं है।

बीएसएफ बैठक और सीमा बाड़ की समीक्षा

सिलीगुड़ी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री अधिकारी के देर दोपहर तक कोलकाता लौटने का कार्यक्रम है। इसके बाद वे सीमा सुरक्षा बल (BSF) के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

इस बैठक में बांग्लादेश से लगी उन सीमाओं पर कंटीले तार लगाने की प्रक्रिया की समीक्षा होगी जहाँ अभी तक बाड़ नहीं लगी है। राज्य सरकार द्वारा इस कार्य के लिए भूमि सौंपने की प्रक्रिया पर विशेष चर्चा होने की संभावना है।

आगे क्या

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि TMC के विधायक इस निमंत्रण को स्वीकार करते हैं या राजनीतिक कारणों से इससे दूरी बनाए रखते हैं। यदि वे बैठक में भाग लेते हैं, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई सहयोगी कार्यसंस्कृति की शुरुआत का संकेत होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताता है कि उनका शासन लोकतांत्रिक मर्यादाओं से कितना दूर था। लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या TMC के विधायक इस निमंत्रण को राजनीतिक जाल मानकर अस्वीकार करते हैं या सहयोग की राह चुनते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि शिष्टाचार और शासन में सहयोग दो अलग बातें हैं — निमंत्रण देना नीतिगत समावेश की गारंटी नहीं है। बांग्लादेश सीमा बाड़ की समीक्षा के साथ इस बैठक का जुड़ना यह संकेत देता है कि अधिकारी एक साथ कई मोर्चों पर अपनी सरकार की छाप छोड़ना चाहते हैं।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिलीगुड़ी प्रशासनिक समीक्षा बैठक में TMC विधायकों को क्यों बुलाया गया?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के आग्रह पर TMC के 14 विधायकों को इसलिए आमंत्रित किया गया क्योंकि वे उत्तरी बंगाल के आठ जिलों में एकमात्र विपक्षी दल के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। अधिकारी लोकतांत्रिक परंपरा स्थापित करना चाहते हैं जिसमें जनसेवा के मामलों में विपक्ष को भी शामिल किया जाए।
ममता बनर्जी के शासनकाल में विपक्षी विधायकों को क्यों नहीं बुलाया जाता था?
2011 से 2026 तक ममता बनर्जी के 15 वर्षीय कार्यकाल में किसी भी सरकारी कार्यक्रम में विपक्षी दल के विधायकों को आमंत्रित नहीं किया गया। यह परंपरा TMC सरकार के दौरान पूरी तरह बंद रही, जबकि इससे पहले वाम मोर्चे के मुख्यमंत्री यह परंपरा नियमित रूप से निभाते थे।
उत्तरी बंगाल के किन जिलों से TMC के विधायक हैं?
उत्तरी बंगाल के आठ जिलों में से चार में TMC के विधायक हैं — मालदा से 6, उत्तरी दिनाजपुर से 5, दक्षिणी दिनाजपुर से 2 और कूचबिहार से 1। दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में TMC का कोई विधायक नहीं है।
सिलीगुड़ी बैठक के बाद मुख्यमंत्री अधिकारी का क्या कार्यक्रम है?
बैठक के बाद मुख्यमंत्री अधिकारी देर दोपहर तक कोलकाता लौटेंगे। इसके बाद वे सीमा सुरक्षा बल (BSF) के शीर्ष अधिकारियों से मिलेंगे, जिसमें बांग्लादेश सीमा पर अभी तक बिना बाड़ वाले हिस्सों पर कंटीले तार लगाने की प्रक्रिया की समीक्षा होगी।
क्या पहले भी पश्चिम बंगाल में विपक्षी विधायकों को सरकारी बैठकों में बुलाया जाता था?
हाँ, वाम मोर्चे के दिवंगत मुख्यमंत्री ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल में यह परंपरा नियमित रूप से निभाई जाती थी। TMC के 15 वर्षीय शासन में यह बंद हो गई थी और अब BJP सरकार इसे फिर से शुरू कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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