पश्चिम बंगाल: सीएम सुवेंदु अधिकारी की सिलीगुड़ी बैठक में टीएमसी के 14 विधायकों को न्योता, 15 साल बाद लौटी लोकतांत्रिक परंपरा
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में सिलीगुड़ी में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में उत्तरी बंगाल के आठ जिलों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 14 विधायकों को आमंत्रित किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने 20 मई 2026 को यह न्योता भेजा, जिसे राजनीतिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक परंपरा की पुनर्स्थापना के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों भेजा गया विपक्षी विधायकों को निमंत्रण
CMO के एक अधिकारी ने बताया, 'तृणमूल कांग्रेस राज्य की एकमात्र विपक्षी पार्टी है जिसके उत्तरी बंगाल के आठ जिलों से चुने हुए विधायक हैं। इसलिए मुख्यमंत्री कार्यालय से TMC के सभी 14 विधायकों को बैठक में शामिल होने का न्योता भेजा गया है।'
जानकारी के अनुसार यह निमंत्रण मुख्यमंत्री अधिकारी के विशेष आग्रह पर भेजा गया। उनका उद्देश्य यह मिसाल कायम करना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसेवा के मामलों में विपक्षी विधायकों को शामिल करना और उनसे सुझाव लेना एक आवश्यक परंपरा है।
ममता बनर्जी के कार्यकाल से तुलना
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम के ज़रिए अधिकारी अपनी पूर्ववर्ती ममता बनर्जी को भी परोक्ष संदेश देना चाहते हैं। ममता बनर्जी के 2011 से 2026 तक के 15 वर्षीय कार्यकाल में किसी भी सरकारी कार्यक्रम में विपक्षी दल के एक भी विधायक को आमंत्रित नहीं किया गया था।
गौरतलब है कि इससे पहले वामपंथी शासन में दिवंगत मुख्यमंत्री ज्योति बसु और दिवंगत बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल में सरकारी कार्यक्रमों में विपक्षी विधायकों को आमंत्रित करने की परंपरा नियमित रूप से निभाई जाती थी। TMC के डेढ़ दशक के शासन में यह परंपरा पूरी तरह बंद हो गई थी। अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार इसे पुनर्जीवित कर रही है।
उत्तरी बंगाल में TMC विधायकों का जिलेवार वितरण
उत्तरी बंगाल के आठ जिलों से TMC के 14 विधायकों का वितरण इस प्रकार है — कूचबिहार से 1, उत्तरी दिनाजपुर से 5, दक्षिणी दिनाजपुर से 2 और मालदा से 6। वहीं, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों से TMC का कोई भी विधायक नहीं है।
बीएसएफ बैठक और सीमा बाड़ की समीक्षा
सिलीगुड़ी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री अधिकारी के देर दोपहर तक कोलकाता लौटने का कार्यक्रम है। इसके बाद वे सीमा सुरक्षा बल (BSF) के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।
इस बैठक में बांग्लादेश से लगी उन सीमाओं पर कंटीले तार लगाने की प्रक्रिया की समीक्षा होगी जहाँ अभी तक बाड़ नहीं लगी है। राज्य सरकार द्वारा इस कार्य के लिए भूमि सौंपने की प्रक्रिया पर विशेष चर्चा होने की संभावना है।
आगे क्या
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि TMC के विधायक इस निमंत्रण को स्वीकार करते हैं या राजनीतिक कारणों से इससे दूरी बनाए रखते हैं। यदि वे बैठक में भाग लेते हैं, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई सहयोगी कार्यसंस्कृति की शुरुआत का संकेत होगा।