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भाजपा का निशाना अब टीएमसी पर — शिवसेना-NCP के बाद विपक्ष तोड़ने की साजिश: कीर्ति आजाद

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भाजपा का निशाना अब टीएमसी पर — शिवसेना-NCP के बाद विपक्ष तोड़ने की साजिश: कीर्ति आजाद

सारांश

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने भाजपा पर 'ऑपरेशन लोटस' के ज़रिए तृणमूल तोड़ने का आरोप लगाया — शिवसेना और NCP के बाद अब बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी निशाने पर है। बागी सांसदों की स्याही और डर का माहौल — यह महज़ आंतरिक असंतोष नहीं, बल्कि एक बड़ी राजनीतिक चाल का हिस्सा हो सकती है।

मुख्य बातें

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने 12 जून 2026 को कोलकाता में भाजपा पर 'ऑपरेशन लोटस' के ज़रिए टीएमसी तोड़ने का आरोप लगाया।
आजाद के अनुसार, बागी सांसदों के घरों पर सीआईडी छापेमारी हुई और भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें धमकाया।
बागी पत्र पर हस्ताक्षरों में अलग-अलग स्याही दिखने का दावा — आजाद ने इसे संदिग्ध बताया।
शिव सेना और NCP के विभाजन के बाद तृणमूल को भाजपा का अगला निशाना बताया गया।
आजाद ने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन विधेयक के लिए संसद में दो-तिहाई समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है।
तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी के पार्टी छोड़ने की संभावना से आजाद ने इनकार किया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी उथल-पुथल के बीच टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने 12 जून 2026 को कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा हमला बोला और आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी दलों को व्यवस्थित तरीके से तोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि शिव सेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विभाजन के बाद अब तृणमूल कांग्रेस भाजपा के निशाने पर है।

ऑपरेशन लोटस और टीएमसी में फूट

कीर्ति आजाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ऑपरेशन लोटस कभी फेल नहीं होता।' उनके अनुसार, तृणमूल के बागी सांसदों को डराने-धमकाने का सिलसिला पहले से चल रहा था। उन्होंने बताया कि कुछ सांसदों के घरों पर सीआईडी की छापेमारी हुई, भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें धमकाया गया और स्थानीय लोगों को उनके घरों तक पहुँचने से रोका गया।

आजाद ने यह भी सवाल उठाया कि यदि बागी सांसदों को पार्टी से शिकायत थी, तो विधानसभा चुनाव में हार के तुरंत बाद ही यह कदम क्यों उठाया गया। उन्होंने दावा किया कि बागी पत्र पर किए गए हस्ताक्षर अलग-अलग समय पर लिए गए प्रतीत होते हैं, क्योंकि उनमें इस्तेमाल की गई स्याही अलग-अलग दिखती है।

ममता बनर्जी की ताकत पर भरोसा

टीएमसी सांसद ने कहा कि इस घटनाक्रम से पार्टी को कोई दीर्घकालिक नुकसान नहीं होगा, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी के नाम और उनके संघर्ष की बुनियाद पर खड़ी है। उनके अनुसार, कोई भी सांसद यह दावा नहीं कर सकता कि वह केवल अपनी व्यक्तिगत क्षमता के बल पर चुनाव जीतता है।

तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा ममता बनर्जी को कथित तौर पर खुद और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी में से किसी एक को चुनने की चेतावनी पर कीर्ति आजाद ने कहा कि इस मामले को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी स्वयं देखेंगी। उन्होंने कल्याण बनर्जी को पार्टी का 'मजबूत और समर्पित सिपाही' बताया और उनके पार्टी छोड़ने की संभावना से इनकार किया।

भाजपा पर विपक्ष खत्म करने का आरोप

कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि भाजपा नहीं चाहती कि देश में कोई मजबूत विपक्ष बचे। उन्होंने शिव सेना और NCP के विभाजन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता पहले से ही दबाव में है।

परिसीमन विधेयक और दो-तिहाई बहुमत की रणनीति

आजाद ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा संसद में परिसीमन विधेयक (डिलिमिटेशन बिल) पारित कराने के लिए दो-तिहाई समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है। आलोचकों का कहना है कि इसी उद्देश्य के तहत विपक्षी दलों में तोड़-फोड़ की कोशिशें की जा रही हैं।

आगे क्या

गौरतलब है कि टीएमसी में यह अंदरूनी कलह ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं। पार्टी नेतृत्व का रुख और बागी सांसदों के खिलाफ संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई आने वाले दिनों में तस्वीर को और स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समय और संदर्भ उन्हें महत्वपूर्ण बनाते हैं — शिवसेना और NCP के विभाजन के बाद विपक्षी खेमे में यह आशंका गहरी हो चुकी है कि केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक दबाव के औज़ार के रूप में हो रहा है। बागी पत्र पर अलग-अलग स्याही का दावा यदि सत्यापित होता है, तो यह महज़ आंतरिक असंतोष नहीं, बल्कि एक संगठित प्रयास की ओर इशारा करता है। दूसरी ओर, टीएमसी की अपनी अंदरूनी दरारें — ममता बनर्जी बनाम अभिषेक बनर्जी की कथित खींचतान — को बाहरी साजिश की आड़ में नज़रअंदाज़ करना भी उचित नहीं होगा। परिसीमन विधेयक वाला आरोप सबसे गंभीर है और इसकी स्वतंत्र पड़ताल ज़रूरी है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कीर्ति आजाद ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए हैं?
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया है कि भाजपा 'ऑपरेशन लोटस' के ज़रिए तृणमूल कांग्रेस में फूट डालने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, शिवसेना और NCP के बाद अब TMC भाजपा का अगला निशाना है और पार्टी विपक्ष को व्यवस्थित रूप से खत्म करना चाहती है।
ऑपरेशन लोटस क्या है?
ऑपरेशन लोटस विपक्षी दलों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को तोड़कर भाजपा में शामिल कराने की कथित रणनीति को दिया गया नाम है। विपक्षी नेता इस शब्द का इस्तेमाल उन घटनाओं के संदर्भ में करते हैं जहाँ सत्तारूढ़ दल पर दलबदल कराने का आरोप लगता है।
टीएमसी में अंदरूनी कलह की वजह क्या है?
कुछ टीएमसी सांसदों के बागी रुख अपनाने और कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व को चुनौती देने से यह कलह सामने आई है। कीर्ति आजाद के अनुसार, बागी सांसदों पर सीआईडी छापेमारी और धमकियों का दबाव था, जिसके चलते कई नए सांसद भय के माहौल में थे।
कल्याण बनर्जी के बारे में कीर्ति आजाद ने क्या कहा?
कीर्ति आजाद ने कहा कि तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी पार्टी के मजबूत और समर्पित सिपाही हैं। उन्होंने कल्याण बनर्जी के पार्टी छोड़ने की संभावना से इनकार किया और कहा कि ममता बनर्जी इस मामले को खुद देखेंगी।
परिसीमन विधेयक से भाजपा का क्या संबंध बताया गया है?
कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि भाजपा संसद में परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है। आलोचकों का मानना है कि इसी उद्देश्य के तहत विपक्षी दलों में तोड़-फोड़ की कोशिशें हो रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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