तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष रामचंदर राव का अनशन समाप्त, ₹15,000 करोड़ फीस रीइम्बर्समेंट पर 40 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अपनी 48 घंटे की भूख हड़ताल समाप्त कर दी। वह राज्य की कांग्रेस सरकार से ₹15,000 करोड़ की लंबित फीस रीइम्बर्समेंट राशि जारी करने की माँग को लेकर सोमवार से हैदराबाद में अनशन पर बैठे थे। इस बकाये से कथित तौर पर 40 लाख छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
स्वास्थ्य संकट और अनशन का अंत
अनशन के दौरान रामचंदर राव का रक्तचाप अचानक गिर गया, जिसके बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में चिंता की लहर दौड़ गई। वरिष्ठ नेताओं की सलाह पर उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता एवं सांसद के. लक्ष्मण ने उन्हें नींबू पानी पिलाकर अनशन तुड़वाया।
पार्टी का समर्थन और एकजुटता
अनशन स्थल पर पूर्व राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, सांसद ईटाला राजेंद्र, तेलंगाना विधानसभा में BJP विधायक दल के नेता महेश्वर रेड्डी समेत कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने पहुँचकर रामचंदर राव के साथ एकजुटता प्रकट की। पार्टी के इस व्यापक समर्थन ने प्रदर्शन को राज्यव्यापी राजनीतिक संदेश का रूप दे दिया।
सरकार पर आरोप और छात्रों की पीड़ा
सांसद ईटाला राजेंद्र ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को छात्रों के भविष्य के प्रति गंभीरता से सोचना चाहिए। रामचंदर राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की लापरवाही के कारण 40 लाख छात्र उच्च शिक्षा और रोज़गार के अवसरों से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने छात्रों और युवाओं से किए गए प्रमुख वादे पूरे नहीं किए, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में आ गई है।
एक्स पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प
अनशन के दूसरे दिन रामचंदर राव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह तेलंगाना के छात्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। उनका यह पोस्ट व्यापक रूप से साझा किया गया और पार्टी समर्थकों में चर्चा का विषय बना।
आगे क्या होगा
अनशन समाप्त होने के बावजूद भाजपा ने स्पष्ट किया है कि फीस रीइम्बर्समेंट का मुद्दा उनके एजेंडे पर सर्वोच्च प्राथमिकता पर बना रहेगा। यह देखना होगा कि क्या रेवंत रेड्डी सरकार इस दबाव के बाद बकाया राशि जारी करने पर कोई ठोस कदम उठाती है, या यह विवाद आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों में और उग्र रूप लेता है।