26 जुलाई 2026
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तेलंगाना भाजपा का अल्टीमेटम: फीस वापसी दो या शिक्षा मंत्री पद छोड़ो — रेवंत रेड्डी पर दबाव

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तेलंगाना भाजपा का अल्टीमेटम: फीस वापसी दो या शिक्षा मंत्री पद छोड़ो — रेवंत रेड्डी पर दबाव

सारांश

तेलंगाना भाजपा ने CM रेवंत रेड्डी को एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है — ₹12,000 करोड़ की लंबित फीस वापसी चुकाएं या शिक्षा मंत्री पद से हटें। 20 लाख छात्रों के प्रमाण पत्र रोके जाने का यह मुद्दा तेलंगाना की राजनीति में नया तूफान लाने की ओर है।

मुख्य बातें

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन.
रामचंद्र राव ने 26 जुलाई को CM रेवंत रेड्डी को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया।
आरोप है कि ₹12,000 करोड़ की फीस वापसी न मिलने से लगभग 20 लाख छात्रों के प्रमाण पत्र रोके गए हैं।
रामचंद्र राव ने एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस की 'चुप्पी' पर सवाल उठाए।
भाजपा सांसद डीके अरुणा ने दिल्ली विरोध प्रदर्शन में 'बाहरी तत्वों' और 'विदेशी धन' की भूमिका का आरोप लगाया — स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं।
भाजपा ने पूर्व BRS सरकार के दौरान ग्रुप-1 पेपर लीक का भी जिक्र कर विपक्ष पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया।

तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने रविवार, 26 जुलाई को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया — या तो लंबित फीस वापसी का भुगतान करें या राज्य के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दें। रामचंद्र राव ने आरोप लगाया कि ₹12,000 करोड़ के बकाया का भुगतान न होने से लगभग 20 लाख छात्रों का भविष्य संकट में है।

मुख्य घटनाक्रम

हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए रामचंद्र राव ने कहा कि रेवंत रेड्डी को बकाया फीस वापसी का भुगतान करना चाहिए, अन्यथा शिक्षा मंत्री पद की जिम्मेदारी किसी और को सौंप देनी चाहिए। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि कांग्रेस शासित तेलंगाना में लंबित शुल्क वापसी संकट पर 'युवाओं के तथाकथित संरक्षकों की चुप्पी' से वे स्तब्ध हैं, जहाँ लगभग 20 लाख छात्र उच्च शिक्षा या रोजगार प्राप्त करने में असमर्थ हैं क्योंकि उनके प्रमाण पत्र रोके गए हैं।

गौरतलब है कि रामचंद्र राव ने नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा ने अपनी ईमानदारी साबित की है, और रेवंत रेड्डी को भी अपनी ईमानदारी साबित करनी चाहिए।

नीट और दिल्ली प्रदर्शन पर भाजपा का रुख

भाजपा सांसद डीके अरुणा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को अस्थिर करने के इरादे से युवाओं को भड़काने की कोशिश की। उन्होंने यह भी दावा किया कि नई दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन में वास्तविक छात्रों की तुलना में बाहरी क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों की संख्या अधिक थी।

अरुणा ने आरोप लगाया कि राष्ट्र-विरोधी तत्वों ने विदेश से धन भेजकर दंगे भड़काने की योजना बनाई थी — हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र ने नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करके छात्रों के हितों की रक्षा की।

कांग्रेस और विपक्ष पर निशाना

अरुणा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि वे संसद में किसी भी मुद्दे पर बहस करने से कतराते हैं, लेकिन काले कपड़े पहनकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में कांग्रेस सत्ता में है, वहाँ भ्रष्टाचार चरम पर है और उन राज्यों से धन दिल्ली में कांग्रेस पार्टी को भेजा जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब रेवंत रेड्डी ने नई दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता के विरोध में हैदराबाद में एक रैली का नेतृत्व किया था, जिसे भाजपा ने 'दोहरा मापदंड' करार दिया।

पूर्व सरकार पर सवाल

अरुणा ने तेलंगाना में पिछली भारत राष्ट्र समिति (BRS) सरकार के दौरान ग्रुप-1 परीक्षा के पेपर लीक का भी जिक्र करते हुए पूछा कि उस समय किसी ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया। यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से विपक्षी दलों की चयनात्मक जवाबदेही की माँग पर सवाल उठाती है।

आगे क्या होगा

भाजपा ने एक सप्ताह की समय सीमा तय की है। यदि इस अवधि में फीस वापसी का भुगतान नहीं होता, तो पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी। 20 लाख छात्रों के प्रमाण पत्र रोके जाने का मुद्दा तेलंगाना में राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रिया की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की लंबित फीस वापसी महज एक वित्तीय मुद्दा नहीं, बल्कि यह राज्य में कांग्रेस सरकार की प्राथमिकताओं पर एक बड़ा सवाल है — 20 लाख छात्रों के प्रमाण पत्र रोकना किसी भी सरकार के लिए गंभीर विफलता है। भाजपा का यह अल्टीमेटम रणनीतिक है: नीट विवाद में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की नैतिक ऊँचाई का इस्तेमाल करते हुए रेवंत रेड्डी को रक्षात्मक स्थिति में धकेलना। हालाँकि, डीके अरुणा के 'विदेशी धन' और 'राष्ट्र-विरोधी तत्वों' जैसे आरोप बिना सत्यापन के महज राजनीतिक बयानबाजी की श्रेणी में आते हैं। असली मुद्दा यह है कि छात्रों की पीड़ा को राजनीतिक हथियार बनाने की होड़ में उनके वास्तविक हल की गति धीमी न पड़ जाए।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में फीस वापसी का मुद्दा क्या है?
तेलंगाना में कथित तौर पर ₹12,000 करोड़ की फीस वापसी लंबित है, जिसके कारण लगभग 20 लाख छात्रों के प्रमाण पत्र रोके गए हैं और वे उच्च शिक्षा या रोजगार प्राप्त करने में असमर्थ हैं। भाजपा के अनुसार यह कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक विफलता है।
भाजपा ने रेवंत रेड्डी से इस्तीफे की माँग क्यों की?
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव का तर्क है कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी राज्य के शिक्षा मंत्री भी हैं और फीस वापसी का भुगतान न होना उनकी सीधी जिम्मेदारी है। उन्होंने नीट विवाद में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का हवाला देते हुए कहा कि जवाबदेही का यही मानक रेवंत रेड्डी पर भी लागू होना चाहिए।
भाजपा ने दिल्ली के छात्र विरोध प्रदर्शन पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा सांसद डीके अरुणा ने आरोप लगाया कि दिल्ली विरोध प्रदर्शन में बाहरी तत्वों की संख्या वास्तविक छात्रों से अधिक थी और कथित तौर पर विदेश से धन भेजकर दंगे भड़काने की कोशिश हुई। ये आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
तेलंगाना भाजपा ने एक सप्ताह की समय सीमा के बाद क्या करने का संकेत दिया है?
भाजपा ने स्पष्ट रूप से नहीं बताया कि एक सप्ताह बाद वे क्या कदम उठाएंगे, लेकिन पार्टी के सुर से संकेत मिलता है कि वे राज्यव्यापी आंदोलन तेज कर सकती है। 20 लाख छात्रों का मुद्दा तेलंगाना में राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।
भाजपा ने पूर्व BRS सरकार का जिक्र क्यों किया?
भाजपा सांसद डीके अरुणा ने तेलंगाना में पिछली भारत राष्ट्र समिति (BRS) सरकार के दौरान ग्रुप-1 परीक्षा पेपर लीक का हवाला देकर विपक्ष पर चयनात्मक जवाबदेही का आरोप लगाया। उनका सवाल था कि तब किसी ने इस्तीफा क्यों नहीं माँगा।
राष्ट्र प्रेस
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