6 अगस्त 2026
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तेलंगाना: ₹500 करोड़ के धान घोटाले की जांच की मांग, BJP अध्यक्ष ने CM रेवंत रेड्डी को लिखा पत्र

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तेलंगाना: ₹500 करोड़ के धान घोटाले की जांच की मांग, BJP अध्यक्ष ने CM रेवंत रेड्डी को लिखा पत्र

सारांश

तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने CM रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर ₹500 करोड़ और 90,000 टन धान की कथित हेराफेरी की निष्पक्ष जांच की माँग की है। 2023 से मिलों को दिए गए धान और वापस मिले चावल के बीच बढ़ता अंतर किसानों और जनता में गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

मुख्य बातें

तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन.
रामचंद्र राव ने 6 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखा।
कथित हेराफेरी का अनुमानित मूल्य ₹500 करोड़ ; लापता धान की मात्रा लगभग 90,000 टन ।
आरोप है कि 2023 से कस्टम मिलिंग के लिए भेजा गया धान न स्टॉक में मिला, न चावल के रूप में वापस आया।
BJP नेता ने निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।
खरीद, परिवहन, भंडारण और मिलिंग में प्रणालीगत सुधार लागू करने की भी अपील की गई।

तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने 6 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर राज्य सरकार द्वारा खरीदे गए लगभग ₹500 करोड़ मूल्य के धान की कथित हेराफेरी की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच की मांग की। आरोपों के अनुसार, लगभग 90,000 टन धान न तो गोदामों में मिला और न ही चावल के रूप में सरकार को वापस किया गया।

मुख्य आरोप क्या हैं

रामचंद्र राव ने अपने पत्र में कहा कि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि कस्टम मिलिंग के लिए मिल मालिकों को सौंपा गया हजारों टन धान 2023 के बाद से न तो स्टॉक में उपलब्ध है और न ही चावल के रूप में सरकारी खजाने में वापस आया। उन्होंने कहा कि मिलों को आपूर्ति किए गए धान और सरकार को प्राप्त चावल की मात्रा के बीच का यह बढ़ता अंतर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।

किसानों और सार्वजनिक वितरण पर असर

BJP नेता ने धान खरीद प्रणाली को किसानों की आजीविका की महत्वपूर्ण सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण ढाँचे का अनिवार्य घटक बताया। उनका कहना है कि सरकारी स्टॉक का कोई भी गबन या दुरुपयोग न केवल राजकोष को वित्तीय नुकसान पहुँचाता है, बल्कि उन किसानों का विश्वास भी तोड़ता है जो एक पारदर्शी और जवाबदेह खरीद तंत्र पर निर्भर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में किसानों की आर्थिक स्थिति पहले से ही चर्चा का विषय है।

जांच और सुधार की माँग

रामचंद्र राव ने मुख्यमंत्री से माँग की कि दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध, चाहे उनका पद या प्रभाव कुछ भी हो, कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने खरीद, परिवहन, भंडारण और कस्टम मिलिंग की पूरी प्रक्रिया में निगरानी एवं जवाबदेही को मजबूत करने के लिए प्रणालीगत सुरक्षा उपाय लागू करने की भी अपील की।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार और विपक्षी BJP के बीच खरीद नीतियों को लेकर पहले से तनाव है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की कथित अनियमितताएँ राज्य के सार्वजनिक वितरण तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं। रामचंद्र राव ने जोर देकर कहा कि इस मामले को उचित प्राथमिकता दी जानी चाहिए और सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 टन धान के लापता होने के आरोप गंभीर हैं, लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये अभी तक मीडिया रिपोर्टों और विपक्षी दल के दावों पर आधारित हैं — सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। तेलंगाना में धान खरीद प्रणाली की खामियाँ कोई नई बात नहीं; पिछली सरकारों के दौर में भी कस्टम मिलिंग में अनियमितताओं की शिकायतें आती रही हैं। असली सवाल यह है कि क्या मौजूदा सरकार स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करेगी, या यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ जाएगा। किसानों और सार्वजनिक वितरण तंत्र पर निर्भर आम जनता के हित में पारदर्शिता की माँग जायज़ है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना धान हेराफेरी मामला क्या है?
मीडिया रिपोर्टों के आधार पर BJP ने आरोप लगाया है कि तेलंगाना सरकार द्वारा कस्टम मिलिंग के लिए मिलों को सौंपा गया लगभग 90,000 टन धान 2023 के बाद से न स्टॉक में मिला और न चावल के रूप में सरकार को वापस किया गया, जिससे अनुमानित ₹500 करोड़ का नुकसान हुआ। यह मामला अभी जांच के दायरे में है।
BJP अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने क्या माँग की है?
उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच की माँग की है। साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और खरीद, परिवहन, भंडारण व मिलिंग प्रक्रियाओं में प्रणालीगत सुधार की अपील की है।
इस कथित घोटाले से किसानों पर क्या असर पड़ता है?
धान खरीद प्रणाली किसानों की आजीविका और सार्वजनिक वितरण तंत्र की रीढ़ है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे किसानों का सरकारी खरीद तंत्र पर भरोसा टूट सकता है और सार्वजनिक वितरण ढाँचे की आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो सकती है।
कस्टम मिलिंग प्रक्रिया में क्या खामी बताई जा रही है?
आरोप है कि 2023 से मिल मालिकों को आपूर्ति किए गए धान और सरकार को वापस मिले चावल की मात्रा के बीच लगातार अंतर बढ़ता रहा। इस अंतर को ही कथित हेराफेरी का मुख्य आधार बताया जा रहा है।
तेलंगाना सरकार की अब तक क्या प्रतिक्रिया है?
अब तक मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी या राज्य सरकार की ओर से BJP के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। BJP ने माँग की है कि मामले को उचित प्राथमिकता दी जाए।
राष्ट्र प्रेस
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