धान खरीद में देरी पर किशन रेड्डी का तेलंगाना सरकार पर हमला, केंद्र पर दोष मढ़ने का आरोप

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धान खरीद में देरी पर किशन रेड्डी का तेलंगाना सरकार पर हमला, केंद्र पर दोष मढ़ने का आरोप

सारांश

केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने हैदराबाद में तेलंगाना सरकार को घेरा — जब धान खरीद का पूरा खर्च केंद्र उठा रहा हो और किसान सड़कों पर हों, तो देरी की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। ऋण माफी, फसल बीमा और बटाईदार किसानों से वादाखिलाफी के आरोपों ने विवाद को और गहरा किया।

मुख्य बातें

किशन रेड्डी ने 17 मई को हैदराबाद में तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर धान खरीद में देरी का आरोप लगाया।
धान खरीद का संपूर्ण खर्च — बोरे, परिवहन, कर्ज, ब्याज और गोदाम किराया — केंद्र सरकार वहन कर रही है।
केंद्र 45 किलो यूरिया की बोरी किसानों को मात्र ₹242 में दे रही है, जबकि वास्तविक लागत ₹2,500 है।
कई इलाकों में किसान फसल खरीद की माँग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
राज्य सरकार पर फसल बीमा योजना न लागू करने और कृषि ऋण माफी अधूरी छोड़ने का भी आरोप।
सरकार की लापरवाही से लाखों किसान बैंक डिफॉल्टर बने, ऐसा किशन रेड्डी ने दावा किया।

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने रविवार, 17 मई को हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर धान खरीद प्रक्रिया में जानबूझकर देरी करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि धान खरीद का संपूर्ण वित्तीय भार — बोरे, परिवहन, भुगतान के लिए कर्ज, उस कर्ज का ब्याज और गोदाम किराया — केंद्र सरकार वहन कर रही है, फिर भी राज्य सरकार खरीद प्रक्रिया को सुचारु नहीं बना पा रही।

केंद्र उठा रहा है पूरा खर्च, फिर भी देरी क्यों

किशन रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना सरकार पर धान खरीद को लेकर एक रुपये का भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता, क्योंकि केंद्र सरकार हर खर्च का प्रबंध कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र की ओर से पूर्ण सहयोग मिल रहा है, तब राज्य सरकार को खरीद प्रक्रिया में इतनी लापरवाही क्यों बरतनी चाहिए। उनके अनुसार, तेलंगाना इस समय देश में सर्वाधिक धान उत्पादन करने वाला राज्य है, इसलिए यहाँ खरीद प्रक्रिया का निर्बाध होना और भी ज़रूरी है।

किसानों का सड़कों पर उतरना और राज्य सरकार की जवाबदेही

भाजपा नेता ने दावा किया कि कई इलाकों में किसान अपनी फसल की खरीद की माँग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपनी विफलता का दोष केंद्र सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों पर थोपने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्य के सभी मंत्रियों से माँग की कि वे अपने-अपने जिलों में जाकर खरीद कार्यों की निगरानी करें और किसानों की समस्याओं का समाधान निकालें।

उर्वरक सब्सिडी और फसल बीमा पर भी निशाना

किशन रेड्डी ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र सरकार 45 किलो यूरिया की एक बोरी किसानों को मात्र ₹242 में उपलब्ध करा रही है, जबकि इसकी वास्तविक लागत ₹2,500 है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों की कीमतें बढ़ने के बावजूद केंद्र ने किसानों के हित में कई वर्षों से यूरिया की कीमत में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की। इसके अतिरिक्त उन्होंने राज्य सरकार पर फसल बीमा योजना लागू न करने का भी आरोप लगाया।

कृषि ऋण माफी और बटाईदार किसानों से वादाखिलाफी

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कृषि ऋण माफी योजना पूरी तरह लागू नहीं की गई है और सरकार ने कृषि मजदूरों व बटाईदार किसानों से किए गए वादे भी पूरे नहीं किए। उनके अनुसार, राज्य सरकार की इस लापरवाही के कारण लाखों किसान बैंक डिफॉल्टर बन गए हैं। गौरतलब है कि तेलंगाना में धान और कपास दो प्रमुख नकदी फसलें हैं — धान की खरीद राज्य सरकार के माध्यम से होती है, जबकि कपास की खरीद केंद्र सरकार सीधे करती है।

आगे क्या होगा

किशन रेड्डी के इस हमले के बाद तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ेगा। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब रबी सीजन की फसल कटाई के बाद किसान अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार में हैं। राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और खरीद प्रक्रिया में सुधार पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि केंद्र-राज्य समन्वय की यह खाई किसानों को कितनी महँगी पड़ रही है। तेलंगाना देश का शीर्ष धान उत्पादक राज्य है — यहाँ खरीद में देरी सीधे किसानों की नकदी तरलता को प्रभावित करती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि धान खरीद की संरचनात्मक जटिलता — जहाँ वित्त केंद्र का और क्रियान्वयन राज्य का है — किसी एक दल की सरकार में भी टकराव पैदा करती रही है। तेलंगाना सरकार का पक्ष अभी सामने नहीं आया है, इसलिए एकतरफा तस्वीर से सावधान रहना ज़रूरी है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशन रेड्डी ने तेलंगाना सरकार पर क्या आरोप लगाए?
केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर धान खरीद में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि खरीद का पूरा खर्च केंद्र उठा रहा है, फिर भी राज्य सरकार प्रक्रिया को सुचारु नहीं बना पा रही।
धान खरीद का खर्च कौन उठाता है — केंद्र या राज्य?
किशन रेड्डी के अनुसार, बोरे, परिवहन, भुगतान के लिए कर्ज, उस कर्ज का ब्याज और गोदाम किराया — सब केंद्र सरकार वहन करती है। राज्य सरकार पर एक रुपये का भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।
तेलंगाना में किसानों की स्थिति क्या है?
किशन रेड्डी के दावे के अनुसार, कई इलाकों में किसान फसल खरीद की माँग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार की कथित लापरवाही से लाखों किसान बैंक डिफॉल्टर बन गए हैं।
केंद्र सरकार यूरिया पर कितनी सब्सिडी दे रही है?
केंद्र सरकार 45 किलो यूरिया की एक बोरी किसानों को मात्र ₹242 में उपलब्ध करा रही है, जबकि इसकी वास्तविक लागत ₹2,500 है। किशन रेड्डी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद केंद्र ने वर्षों से यूरिया की कीमत नहीं बढ़ाई।
तेलंगाना में कृषि ऋण माफी योजना को लेकर क्या विवाद है?
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने कृषि ऋण माफी योजना पूरी तरह लागू नहीं की और कृषि मजदूरों व बटाईदार किसानों से किए गए वादे भी अधूरे छोड़ दिए। फसल बीमा योजना लागू न करने का भी आरोप है।
राष्ट्र प्रेस
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