तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी का विपक्ष पर पलटवार: 'अच्छे काम के लिए इस्तीफा दूँ?'
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार, 30 जुलाई को विपक्ष की उस माँग को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उनसे शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार छोड़ने की अपील की गई थी। हैदराबाद में फिनलैंड और जर्मनी से लौटे शिक्षकों के एक समूह के साथ संवाद करते हुए उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि क्या शिक्षा क्षेत्र में सुधार करना ही उनके इस्तीफे का आधार बन रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
रेड्डी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, 'कुछ लोग मुझसे शिक्षा मंत्री का पद छोड़ने की माँग कर रहे हैं। क्या इसलिए कि नर्सरी से कक्षा 12वीं तक नाश्ता दिया जा रहा है? क्या इसलिए कि शिक्षकों की भर्ती और प्रमोशन को सुव्यवस्थित किया जा रहा है? क्या इसलिए कि आईटीआई (इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट) को एटीसी (एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेंटर) में रूपांतरित किया जा रहा है?'
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या स्किल यूनिवर्सिटी की स्थापना और उसके बोर्ड में वैश्विक कॉर्पोरेट जगत के अनुभवी नामों को शामिल करना ही विपक्ष की आपत्ति का कारण है।
शिक्षा सुधारों का ब्यौरा
मुख्यमंत्री ने बताया कि तेलंगाना सरकार प्रत्येक सरकारी स्कूली छात्र पर ₹1.08 लाख वार्षिक व्यय करती है। उन्होंने दावा किया कि इन सुधारों के परिणामस्वरूप सरकारी स्कूलों में एक लाख अतिरिक्त छात्रों ने दाखिला लिया है — जो सार्वजनिक शिक्षा में बढ़ते विश्वास का संकेत है।
रेड्डी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अर्थ केवल कौशल अर्जन नहीं है। उनके अनुसार, कक्षा 12वीं के बाद हर छात्र को वैश्विक परिदृश्य की व्यापक समझ होनी चाहिए, और यह दायित्व शिक्षकों पर है।
वैश्विक दृष्टिकोण और शिक्षकों से आग्रह
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों से भारतीय युवा केवल अमेरिका को अवसरों की भूमि मानते रहे हैं, लेकिन अब जर्मनी, जापान और सिंगापुर जैसे देशों में भी असीमित संभावनाएँ हैं। उन्होंने शिक्षकों से समाज के लिए पाँच वर्ष समर्पित करने और नई पीढ़ी का भविष्य बदलने का आग्रह किया।
उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि दिसंबर तक एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए, जिसमें आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए सुधारों के सुझाव शामिल हों। उन्होंने कहा, 'तेलंगाना को देश के लिए एक रोल मॉडल बनाने के लक्ष्य के साथ काम करें।'
राजनीतिक संदेश और भविष्य की घोषणाएँ
रेड्डी ने विश्वास व्यक्त किया कि कांग्रेस पार्टी 2034 तक तेलंगाना में सत्ता में बनी रहेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जिस प्रकार आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को विदेश में प्रशिक्षण के अवसर मिलते हैं, उसी तर्ज पर शिक्षकों को भी उच्च अध्ययन के लिए विदेश भेजा जाएगा। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब तेलंगाना सरकार शिक्षा क्षेत्र को अपनी प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।