2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तेलंगाना में 27,000 स्कूल विलय प्रस्ताव पर भाजपा का हमला, ग्रामीण शिक्षा पर उठे सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तेलंगाना में 27,000 स्कूल विलय प्रस्ताव पर भाजपा का हमला, ग्रामीण शिक्षा पर उठे सवाल

सारांश

तेलंगाना में 27,000 सरकारी स्कूलों को मिलाकर 4,000 बड़े संस्थान बनाने की कथित योजना ने राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। भाजपा ने सरकार को 'नाकाम' बताया और TSEC ने शिक्षा बजट में 20% हिस्सेदारी की माँग उठाई।

मुख्य बातें

तेलंगाना में कथित तौर पर 27,000 सरकारी स्कूलों को विलय कर 4,000 बड़े संस्थान बनाने का प्रस्ताव सामने आया है।
भाजपा के राज्य मुख्य प्रवक्ता एन.वी.
सुभाष ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की सरकार को शिक्षा क्षेत्र में 'नाकाम' करार दिया।
तेलंगाना सेव एजुकेशन कमेटी (TSEC) के नेता जी.
हरगोपाल ने प्रस्ताव को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और मुख्यमंत्री से बयान वापस लेने की माँग की।
TSEC ने राज्य सरकार से शिक्षा पर बजट का 20 प्रतिशत खर्च करने की अपील की है।
आलोचकों का कहना है कि स्कूल विलय से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा तक पहुँच कमजोर होगी।

तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कथित स्कूल विलय योजना को लेकर राज्य की राजनीति तेज हो गई है। 15 जून, सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए शिक्षा क्षेत्र की जानबूझकर अनदेखी करने का आरोप लगाया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित योजना के तहत राज्य के लगभग 27,000 सरकारी स्कूलों को मिलाकर करीब 4,000 बड़े संस्थान बनाए जाने की तैयारी है।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा के तेलंगाना राज्य मुख्य प्रवक्ता एन.वी. सुभाष ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, 'यह सरकार नाकाम रही है। देश में हर किसी को शिक्षा का अधिकार है। शिक्षा सबसे जरूरी चीजों में से एक है और हर नागरिक, हर बच्चे को सीखने का मौका मिलना चाहिए।'

सुभाष ने आगे कहा, 'ये बच्चे देश का भविष्य बनेंगे और हर किसी को शिक्षा और स्कूल जाने का अधिकार है। दुख की बात है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री किसी न किसी वजह से सरकारी स्कूल बंद कर रहे हैं।'

विलय प्रस्ताव का विवरण

कथित योजना के मुताबिक, गाँवों और छोटी बस्तियों में संचालित स्कूलों को बंद कर उन्हें नजदीकी बड़े संस्थानों में समाहित किया जाएगा। आलोचकों का कहना है कि इस कदम से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बच्चों की शिक्षा तक पहुँच गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं।

सिविल सोसाइटी की चिंताएँ

तेलंगाना सेव एजुकेशन कमेटी (TSEC) के नेता जी. हरगोपाल ने इस प्रस्ताव को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे ग्रामीण समुदायों में स्कूलों की उपलब्धता घट सकती है।

हरगोपाल ने कहा कि एक मानवीय और समावेशी समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक गाँव में सरकारी स्कूल का होना अनिवार्य है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेड्डी से इस संबंध में दिए गए बयानों को तुरंत वापस लेने की माँग की।

TSEC की बजट माँग

तेलंगाना सेव एजुकेशन कमेटी ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह शिक्षा क्षेत्र के लिए राज्य बजट का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करे, ताकि सभी सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाया जा सके और समान, मुफ्त तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित हो सके।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह विवाद तेलंगाना में राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर बुनियादी शिक्षा तक पहुँच कमजोर करने का आरोप लगाया है, जबकि नागरिक समाज संगठन राज्यभर में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए दबाव बना रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 स्कूलों को 4,000 में समेटने का यह प्रस्ताव प्रशासनिक दक्षता के नाम पर शिक्षा की भौगोलिक पहुँच को बलिदान करने जैसा है — एक ऐसी नीतिगत गलती जो देश के कई राज्य पहले कर चुके हैं और जिसके नतीजे नामांकन में गिरावट के रूप में सामने आए। तेलंगाना सरकार ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई पारदर्शी डेटा या प्रभाव आकलन सार्वजनिक नहीं किया है, जो खुद में चिंताजनक है। भाजपा का हमला राजनीतिक रूप से स्वाभाविक है, लेकिन TSEC जैसे गैर-राजनीतिक संगठनों की आपत्तियाँ इस मुद्दे की गंभीरता को अलग स्तर पर रखती हैं। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार विलय से पहले स्वतंत्र प्रभाव अध्ययन कराएगी।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में सरकारी स्कूल विलय का प्रस्ताव क्या है?
कथित तौर पर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की योजना के तहत राज्य के लगभग 27,000 सरकारी स्कूलों को आपस में मिलाकर करीब 4,000 बड़े संस्थान बनाए जाने की तैयारी है। इस प्रस्ताव में गाँवों और छोटी बस्तियों के स्कूलों को बंद करना शामिल है।
भाजपा ने तेलंगाना सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
भाजपा के राज्य मुख्य प्रवक्ता एन.वी. सुभाष ने सरकार को 'नाकाम' करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री जानबूझकर सरकारी स्कूल बंद कर रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि गलत नीतियों के कारण राज्य का शिक्षा क्षेत्र बदहाली की कगार पर पहुँच गया है।
TSEC यानी तेलंगाना सेव एजुकेशन कमेटी की क्या माँगें हैं?
TSEC ने राज्य सरकार से शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट का कम से कम 20 प्रतिशत आवंटित करने की माँग की है। संगठन के नेता जी. हरगोपाल ने मुख्यमंत्री से स्कूल विलय संबंधी बयान तुरंत वापस लेने की भी अपील की है।
स्कूल विलय से ग्रामीण इलाकों पर क्या असर पड़ेगा?
आलोचकों और सिविल सोसाइटी समूहों का कहना है कि गाँवों में स्कूल बंद होने से बच्चों को दूर-दराज के संस्थानों में जाना पड़ेगा, जिससे विशेष रूप से लड़कियों और वंचित वर्ग के बच्चों का स्कूल छोड़ने का खतरा बढ़ेगा। हरगोपाल के अनुसार, समावेशी समाज के लिए हर गाँव में सरकारी स्कूल जरूरी है।
तेलंगाना सरकार ने इस विवाद पर क्या कहा है?
रिपोर्टों के अनुसार, अभी तक राज्य सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रभाव आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया है। विवाद जारी रहने के साथ राजनीतिक और नागरिक समाज का दबाव बढ़ता जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले