तेलंगाना में 27,000 स्कूल विलय प्रस्ताव पर भाजपा का हमला, ग्रामीण शिक्षा पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कथित स्कूल विलय योजना को लेकर राज्य की राजनीति तेज हो गई है। 15 जून, सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए शिक्षा क्षेत्र की जानबूझकर अनदेखी करने का आरोप लगाया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित योजना के तहत राज्य के लगभग 27,000 सरकारी स्कूलों को मिलाकर करीब 4,000 बड़े संस्थान बनाए जाने की तैयारी है।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा के तेलंगाना राज्य मुख्य प्रवक्ता एन.वी. सुभाष ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, 'यह सरकार नाकाम रही है। देश में हर किसी को शिक्षा का अधिकार है। शिक्षा सबसे जरूरी चीजों में से एक है और हर नागरिक, हर बच्चे को सीखने का मौका मिलना चाहिए।'
सुभाष ने आगे कहा, 'ये बच्चे देश का भविष्य बनेंगे और हर किसी को शिक्षा और स्कूल जाने का अधिकार है। दुख की बात है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री किसी न किसी वजह से सरकारी स्कूल बंद कर रहे हैं।'
विलय प्रस्ताव का विवरण
कथित योजना के मुताबिक, गाँवों और छोटी बस्तियों में संचालित स्कूलों को बंद कर उन्हें नजदीकी बड़े संस्थानों में समाहित किया जाएगा। आलोचकों का कहना है कि इस कदम से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बच्चों की शिक्षा तक पहुँच गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं।
सिविल सोसाइटी की चिंताएँ
तेलंगाना सेव एजुकेशन कमेटी (TSEC) के नेता जी. हरगोपाल ने इस प्रस्ताव को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे ग्रामीण समुदायों में स्कूलों की उपलब्धता घट सकती है।
हरगोपाल ने कहा कि एक मानवीय और समावेशी समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक गाँव में सरकारी स्कूल का होना अनिवार्य है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेड्डी से इस संबंध में दिए गए बयानों को तुरंत वापस लेने की माँग की।
TSEC की बजट माँग
तेलंगाना सेव एजुकेशन कमेटी ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह शिक्षा क्षेत्र के लिए राज्य बजट का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करे, ताकि सभी सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाया जा सके और समान, मुफ्त तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित हो सके।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह विवाद तेलंगाना में राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर बुनियादी शिक्षा तक पहुँच कमजोर करने का आरोप लगाया है, जबकि नागरिक समाज संगठन राज्यभर में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए दबाव बना रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।