तेलंगाना सरकार पर भाजपा का गंभीर आरोप, स्कूल फीस को जबरन वसूली का कार्यक्रम न बनाए
सारांश
Key Takeaways
- तेलंगाना में स्कूल फीस में बढ़ोतरी से परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
- भाजपा ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं।
- मुख्यमंत्री को स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।
हैदराबाद, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तेलंगाना में स्कूलों में बढ़ती फीस के खिलाफ जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। भाजपा नेता टीआर श्रीनिवास ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल की फीस को वार्षिक जबरन वसूली का कार्यक्रम न बनाया जाए।
टीआर श्रीनिवास ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "मैं मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से पूछना चाहता हूं कि क्या उन्होंने स्कूल में बढ़ी फीस के बारे में सुना है? निजी स्कूलों में फीस लगातार बढ़ाई जा रही है, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।"
उन्होंने आगे कहा, "लोगों की आय पहले से ही कम है, और अब फीस में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो रही है। इसके अलावा, किताबें और यूनिफॉर्म भी खरीदने होते हैं, और बच्चों का बस किराया भी देना होता है। यह आम जनता के साथ किस तरह का न्याय है? मध्यम परिवार के लोग इन बढ़ती लागतों को कैसे संभाल सकते हैं?"
भाजपा नेता ने यह भी प्रश्न उठाया कि सरकार फीस को लेकर स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कोई कदम क्यों नहीं उठाती है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से आग्रह करते हुए कहा, "स्कूल की फीस को वार्षिक जबरन वसूली का कार्यक्रम न बनाया जाए। फीस के लिए एक उचित व्यवस्था बनानी चाहिए।"
इससे पहले, तेलंगाना जागृति पार्टी की प्रमुख के. कविता ने भी फीस बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा, "राज्य पर भारी दबाव है, क्योंकि निजी स्कूल हर वर्ष फीस में 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि कर रहे हैं। कक्षा 1 से 10 तक दाखिला लेने वाले छात्रों से वादा किया जाता है कि फीस हर साल अधिकतम 10 प्रतिशत बढ़ेगी, लेकिन कई स्कूल इससे कहीं अधिक फीस वसूल रहे हैं।"