खेल उपकरण निर्माण में भारत को वैश्विक ताकत बनाने का रोडमैप, एमएसएमई की नियामकीय बाधाएं हटाना सबसे बड़ी प्राथमिकता: नीति आयोग
सारांश
मुख्य बातें
नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार संजीत सिंह ने 25 अगस्त को कहा कि केंद्र सरकार खेल उपकरण विनिर्माण को देश की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का एक रणनीतिक स्तंभ मानती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र की 90 प्रतिशत इकाइयाँ एमएसएमई हैं और इनके सामने सबसे बड़ी चुनौतियाँ वित्तीय नहीं, बल्कि नियामकीय और प्रक्रियागत हैं।
नीति आयोग का रोडमैप और युवा मंत्रालय की भूमिका
संजीत सिंह के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' विजन के अनुरूप नीति आयोग ने खेल उपकरण विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया था। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने इस रोडमैप को अपनाकर इसे एक सक्रिय योजना में परिवर्तित किया। उन्होंने कहा, 'पिछले एक दशक से भारत सरकार खेल उपकरण और खेल सामग्री विनिर्माण को एक रणनीतिक विकास चालक के रूप में आगे बढ़ा रही है। नीति आयोग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट को युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने एक प्रभावी योजना में परिवर्तित किया है।'
एमएसएमई क्षेत्र की असली बाधाएं
नीति आयोग के अध्ययन और उद्योग जगत से हुई बातचीत में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि खेल उपकरण बनाने वाली इकाइयों की अधिकांश समस्याएँ वित्तीय नहीं हैं। संजीत सिंह ने कहा, 'हमारे अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ कि खेल उपकरण बनाने वाली इकाइयों की अधिकांश समस्याएं वित्तीय नहीं हैं, बल्कि नियमों, प्रक्रियाओं और अन्य बाधाओं से जुड़ी हुई हैं।' उनके अनुसार, इन प्रशासनिक और नियामकीय अवरोधों को दूर कर इस उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।
'मेड इन इंडिया' को वैश्विक ब्रांड बनाने की दिशा
संजीत सिंह ने जोर दिया कि भारत को केवल स्थापित विदेशी ब्रांडों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, 'ब्रांडिंग किसी भी क्षेत्र की सफलता की जीवनरेखा है। लेकिन हमें अपने विनिर्माण को बढ़ाने के लिए केवल बड़े ब्रांडों का इंतजार नहीं करना चाहिए। हमारा लक्ष्य 'मेड इन इंडिया' को एक मजबूत वैश्विक पहचान दिलाना होना चाहिए।' उनके अनुसार, यह ब्रांड किसी एक संस्था के प्रयासों से नहीं बनेगा — इसके लिए खिलाड़ियों, खेल संगठनों, युवा प्रतिभाओं, कॉर्पोरेट क्षेत्र और खेल आयोजनों को सामूहिक रूप से काम करना होगा।
स्पोर्ट्सकॉम जैसे मंचों की भूमिका
संजीत सिंह ने कहा कि स्पोर्ट्सकॉम जैसे उद्योग मंच और खेल से जुड़े आयोजन भारतीय खेल उपकरण विनिर्माण को नई वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में पहले ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी जगह बना चुका है। गौरतलब है कि जब खिलाड़ी भारतीय उत्पादों का उपयोग करेंगे और उद्योग गुणवत्ता के उच्च मानकों को अपनाएगा, तभी भारतीय खेल उपकरण विश्व बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकेंगे।
आगे की राह: रोजगार और वैश्विक बाजार
नीति आयोग के अनुसार, सरकार की कोशिश है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत खेल उपकरण उद्योग को उसी प्रकार प्रोत्साहित किया जाए, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा विनिर्माण क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि भारतीय एमएसएमई क्षेत्र को वैश्विक बाजारों तक पहुँचने का अवसर भी मिलेगा। अब देखना यह होगा कि नियामकीय सुधारों की यह प्रक्रिया कितनी तेज़ी से ज़मीन पर उतरती है।