खेलो भारत मिशन पर बड़ा संदेश: मांडविया बोले — हर जिले और हर युवा के सपने में दिखे बदलाव
सारांश
Key Takeaways
- श्रीनगर में शनिवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों का चिंतन शिविर आयोजित हुआ।
- केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलो भारत मिशन युवाओं की ऊर्जा और राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है।
- 15 से अधिक राज्यों के खेल मंत्रियों ने अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग के साथ भाग लिया।
- मंत्री ने 2028 ओलंपिक को लक्ष्य रखते हुए जमीनी प्रतिभा पहचान से लेकर उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण तक संरचित मार्ग बनाने का आह्वान किया।
- जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी भारत को खेल महाशक्ति बनाने की परिकल्पना की सराहना की।
- शिविर में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को जमीनी खेल पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ बताया गया और कोच प्रमाणीकरण को अनिवार्य बनाने पर सहमति बनी।
श्रीनगर, 25 जनवरी। केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने शनिवार को श्रीनगर में आयोजित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों के चिंतन शिविर में स्पष्ट संदेश दिया कि खेलो भारत मिशन महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह देश के युवाओं की ऊर्जा और राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतिबिंब है। इस शिविर का उद्देश्य भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को जमीनी स्तर से मजबूत करना था।
चिंतन शिविर का उद्घाटन और मुख्य संदेश
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की उपस्थिति में आयोजित इस शिविर का उद्घाटन सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। डॉ. मांडविया ने कहा कि वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की 10 वर्षीय योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — इसे हर खेल के मैदान, हर जिले और हर युवा के सपने में साकार होना होगा।
उन्होंने राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे नीति अपनाने की औपचारिकता से आगे बढ़कर सक्रिय और मापनीय कार्यान्वयन की ओर कदम बढ़ाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक प्रगति का आकलन जिलों, प्रशिक्षण प्रणालियों और जमीनी स्तर के खेल पारिस्थितिकी तंत्र में दिखने वाले ठोस परिणामों से होगा।
प्रतिभा विकास और समन्वय पर जोर
डॉ. मांडविया ने राज्य सरकारों और खेल संघों के बीच वर्षों से चले आ रहे मतभेद को दूर करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक मजबूत और एकीकृत प्रतिभा विकास प्रणाली के लिए घनिष्ठ समन्वय अनिवार्य है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रारंभिक प्रतिभा की पहचान के लिए शिक्षा प्रणाली के साथ तालमेल जरूरी है और शारीरिक शिक्षा शिक्षक जमीनी खेल पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। उन्होंने चेताया कि यदि अवसर की कमी से एक भी प्रतिभाशाली बच्चा पीछे रह जाता है, तो यह सिर्फ उस बच्चे का नहीं, पूरे राष्ट्र का नुकसान है।
जम्मू-कश्मीर में खेल की भूमिका
केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में खेल की परिवर्तनकारी शक्ति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि खेल सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के सशक्त माध्यम हैं। यह शिविर श्रीनगर में आयोजित करना स्वयं में एक सांकेतिक और सार्थक निर्णय था।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी भारत को खेलों का वैश्विक महाशक्तिस्थल बनाने की इस परिकल्पना की सराहना की और इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक नई उम्मीद बताया।
व्यवस्थागत सुधार और ओलंपिक लक्ष्य
डॉ. मांडविया ने प्रशिक्षकों के नियमित प्रमाणीकरण और उन्नयन, खिलाड़ियों के वैज्ञानिक प्रशिक्षण और खेल प्रशासन में क्षमता निर्माण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जब बुनियादी ढांचा, प्रतिभा की पहचान और प्रशिक्षित मानव संसाधन एक अटूट श्रृंखला के रूप में जुड़ते हैं, तो ओलंपिक पोडियम स्वयं ही मिल जाते हैं।
खेल सचिव हरि रंजन राव ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इस शिविर को महज एक सम्मेलन नहीं, बल्कि चिंतन, संकल्प और नवीकृत प्रतिबद्धता का सामूहिक क्षण बताया।
प्रख्यात खेल हस्तियों की भागीदारी
शिविर में 15 से अधिक राज्यों के खेल मंत्रियों के साथ-साथ अदिले सुमारीवाला, अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग जैसी दिग्गज खेल हस्तियों ने भाग लिया। इन सभी ने मिलकर पदक रणनीति, नीति समन्वय, स्वच्छ एवं सुरक्षित खेल और प्रतिभा पहचान एवं विकास पर विषयगत सत्रों में विचार साझा किए।
विचार-विमर्श में केंद्र-राज्य समन्वय, कोचिंग प्रणाली को बेहतर बनाने, नैतिक खेल वातावरण सुनिश्चित करने और स्कूलों से लेकर विशिष्ट प्रशिक्षण केंद्रों तक एकीकृत वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी-संचालित प्रतिभा विकास प्रणाली बनाने पर सहमति बनी।
प्रतिभागियों ने यह भी तय किया कि नीतिगत लक्ष्यों को जमीनी प्रभाव में बदलने के लिए राज्यों के बीच निरंतर निगरानी, मूल्यांकन और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान अनिवार्य होगा।
आगे की राह
यह चिंतन शिविर भारत की वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की दिशा में एक ठोस नीतिगत आधार तैयार करने का प्रयास है। आने वाले महीनों में राज्यों से अपेक्षा है कि वे शिविर में बनी सहमति को जमीन पर उतारें और जिला स्तर पर खेल पारिस्थितिकी तंत्र को सक्रिय करें। 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए यह प्रक्रिया जितनी जल्दी शुरू होगी, भारत के पदक अभियान की नींव उतनी ही मजबूत होगी।